झारखंड अलकतरा घोटाला: गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी पर CBI कोर्ट में आरोप तय

झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले में गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी पर सीबीआई की विशेष अदालत ने आरोप तय किए हैं। 2.23 करोड़ रुपये के फर्जी भुगतान मामले में 20 फरवरी से साक्ष्य प्रस्तुत करेगी सीबीआई।

झारखंड अलकतरा घोटाला: गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी पर CBI कोर्ट में आरोप तय
भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी(फाइल फोटो)।
  •  फर्जी चालानों से 2.23 करोड़ रुपये के अवैध भुगतान का आरोप
  • 20 फरवरी से विशेष अदालत में साक्ष्य पेश करेगी CBI

रांची (Threesocieties.com Desk)। झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा घोटाले में गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने बुधवार को उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए। यह मामला वर्ष 2003-04 का है, जिसमें सड़क निर्माण के दौरान फर्जी अलकतरा चालानों के जरिए करोड़ों रुपये की निकासी का आरोप है।

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किन धाराओं में आरोप तय?

अदालत ने सत्येंद्रनाथ तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी,आपराधिक षड्यंत्र व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप गठित किए हैं। कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह 20 फरवरी से इस मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करे।

क्या है पूरा मामला?

बताया जाता है कि वर्ष 2003-04 में छत्तरपुर-जपला रोड (लगभग 32 किमी) निर्माण का ठेका कलावती कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. को मिला था। उस समय सत्येंद्रनाथ तिवारी कंपनी के निदेशक थे। इस योजना की लागत करीब सात करोड़ रुपये बताई गई थी।सड़क निर्माण विभाग में अलकतरा (बिटुमेन) की खरीद में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई थी। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि कंपनी ने 114 अलकतरा चालान प्रस्तुत किए, जिनमें से 61 पूरी तरह फर्जी पाए गए।

1200 मीट्रिक टन अलकतरा के नाम पर 2.23 करोड़ की निकासी

सीबीआई जांच में यह पाया गया कि फर्जी चालानों के आधार पर करीब 1200 मीट्रिक टन अलकतरा दिखाकर लगभग 2.23 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान लिया गया। आरोप है कि कंपनी के निदेशक के रूप में सत्येंद्रनाथ तिवारी ने आपराधिक साजिश रचते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया और अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त किया।सीबीआई ने इस मामले में वर्ष 2009 में प्राथमिकी दर्ज की थी। लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में अब अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद सुनवाई तेज होने की संभावना है।

राजनीतिक असर भी संभव

गढ़वा से भाजपा विधायक होने के कारण इस मामले के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। आरोप तय होने के बाद विपक्ष के तेवर तेज हो सकते हैं, वहीं अदालत में आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। 20 फरवरी से सीबीआई विशेष अदालत में गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों की प्रस्तुति शुरू होगी, जिससे मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।