झारखंड राज्यसभा चुनाव हार्स ट्रेडिंग केस : DSP ने अहम बिंदुओं पर नहीं की जांच, सिटी SP ने सुपरविजन में उठाया सवाल

झारखंड की राज्यसभा चुनाव-2016 में हार्स ट्रेडिंग मामले में रांची के जगन्नाथपुर पुलिस स्टेशन में वर्ष 2018 में दर्ज FIR के IO डीएसपी हटिया राजा मित्रा के इन्विस्टीगेशन पर एसपी सिटी अंशुमान कुमार ने सवाल उठाया है। उन्होंने अपनी सुपरविजन टिप्पणी में लिखा है कि निर्देशित बिंदुओं को नजरअंदाज कर इन्विस्टीगेशन करना कहीं न कहीं जांच को बंद करने का प्रयास है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव हार्स ट्रेडिंग केस : DSP ने अहम बिंदुओं पर नहीं की जांच, सिटी SP ने सुपरविजन में उठाया सवाल

रांची। झारखंड की राज्यसभा चुनाव-2016 में हार्स ट्रेडिंग मामले में रांची के जगन्नाथपुर पुलिस स्टेशन में वर्ष 2018 में दर्ज FIR के IO डीएसपी हटिया राजा मित्रा के इन्विस्टीगेशन पर एसपी सिटी अंशुमान कुमार ने सवाल उठाया है। उन्होंने अपनी सुपरविजन टिप्पणी में लिखा है कि निर्देशित बिंदुओं को नजरअंदाज कर इन्विस्टीगेशन करना कहीं न कहीं जांच को बंद करने का प्रयास है।

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एसपी ने 17 नवंबर 2022 को अपनी सुपरविजन टिप्पणी में लिखा है कि आईओ डीएसपी राजा कुमार मित्रा ने सीएफएसएल गांधीनगर से प्राप्त जांच रिपोर्ट के दो बिंदुओं का जिक्र भी नहीं किया। न हीं बरामद आडियो का ट्रांसक्रिप्ट बनाया। जिस फोन में बातचीत रिकार्ड किया गया था, उसके मिटाए गए डेटा की एक डीवीडी बनाकर सीएफएसएल गांधीनगर से भेजी गई थी, लेकिन आईओ ने उसका अध्ययन भी नहीं किया। लिख दिया है कि बरामद मोबाइल फोन विषयांकित कांड से संबंधित नहीं है। इन परिस्थितियों में लगाये गये आरोपों की पुष्टि करना संभव प्रतीत नहीं होता है। यह कहीं से भी उचित नहीं है। एसपी सिटी ने डीएसपी को बड़कागांव एमएलए अंबा प्रसाद से मिली वीडियो-आडियो क्लिप व सीएफएसएल गुजरात से रिकवर आडियो का ट्रांसक्रिप्ट बनाकर उसकी जांच कराने का निर्देश दिया है। एसपी ने जांच को सही दिशा में ले जाने तथा पहले से जारी रिपोर्ट में दिये गये निर्देशों का पालन कर अद्यतन केस डायरी मांगी है।

पांच करोड़ व बीजेपी में शामिल होने का था आफर
वर्ष 2018 में जगन्नाथपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में इन्विस्टीगेशन के दौरान कांग्रेस से बड़कागांव की तत्कालीन एमएलए निर्मला देवी व एक्स मिनिस्टर योगेंद्र साव ने पुलिस की पूछताछ में यह बयान दिया था कि राज्यसभा चुनाव 2016 में मतदान के तत्कालीन सीएम रघुवर दास, स्पेशल ब्रांच के तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता, तत्कालीन सीएम के सलाहकार अजय कुमार ने उन्हें एनडीए कैंडिडेट के पक्ष में मतदान के एवज में पांच करोड़ रुपये का लालच दिया था। बीजेपी में शामिल होने का प्रस्ताव भी दिया था। वोटिंग के लिए आफर व धमकाने संबंधित एक आडियो भी रिकार्ड किया गया था। इसके बाद ही यह मामला तूल पकड़ा था।
FIR के तीन साल के बाद जुड़ीं पीसी एक्ट की सेक्शन
राज्यसभा चुनाव-2016 में हार्स ट्रेडिंग के मामले में रांची के जगन्नाथपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (पीसी एक्ट) यानी भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराएं प्राथमिकी दर्ज होने के तीन साल के बाद लगाई गईं थीं। रांची पुलिस ने पीसी एक्ट जोड़ने के बाद इसकी लिखित जानकारी कोर्ट को दी थी। धारा जोड़ने के साथ ही इस केस के इन्विस्टीगेशन की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर से हटाकर हटिया के डीएसपी को दी गई थी। जिनपर पीसी एक्ट लगा था, उनमें कांड के FIR एक्युज्ड तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता (वर्तमान में डीजी ट्रेनिंग) व एक्स सीएम रघुवर दास के सलाहकार अजय कुमार थे। स्टेट गवर्नमेंट ने एक्स सीएम रघुवर दास को नन FIR एक्युज्ड बनाने संबंधित प्रोपोजल को स्वीकृति दी थी। भारत निर्वाचन आयोग के आदेश के आलोक में रांची पुलिस ने कानूनी सलाह लेने के बाद राज्य सरकार की अनुमति पर यह कार्रवाई की थी।
26 माह बाद निलंबन मुक्त हुए थे एडीजी अनुराग गुप्ता
हेमंत सोरेन सरकार ने मामले में एडीजी अनुराग गुप्ता को सस्पेंड कर दिया था। लगभग 26 माह बाद एडीजी निलंबन मुक्त हुए थे। उन्हें राज्य सरकार ने 14 फरवरी 2020 को सस्पेंड किया था। उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी हुई थी। विभागीय कार्रवाई में क्लीन चिट मिलने के बाद व सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश के बाद राज्य सरकार ने उन्हें नौ मई 2022 को निलंबन मुक्त कर दिया था। उनके खिलाफ राज्यसभा चुनाव 2016 में बीजेपी कैंडिडेट के पक्ष में वोट देने के लिए बड़कागांव की तत्कालीन एमएलए निर्मला देवी को लालच दने और उनके हसबैंड एक्स मिनिस्टर योगेंद्र साव को धमकाने का आरोप था। वर्तमान में अनुराग गुप्ता डीजी ट्रेनिंग हैं।

चुनाव आयोग के निर्देश पर दर्ज हुई थी FIR
स्पेशल ब्रांच के तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता पर वर्ष 2016 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी कैंडिडेट के पक्ष में कांग्रेस की एमएलए निर्मला देवी को पैसे का लालच देने का आरोप लगा था। भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड विकास मोर्चा की शिकायत पर इसकी जांच कराई थी। आयोग ने प्रथम दृष्ट्या आरोप को सही पाते हुए उनके विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।हाॅर्स ट्रेडिंग मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) जोड़ने का आदेश भारत निर्वाचन आयोग का ही था। भारत निर्वाचन आयोग ने सुनवाई के बाद 2017 में ही हाॅर्स ट्रेडिंग मामले में धारा 171बी व 171सी भारतीय दंड विधान के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लगाने का आदेश दिया था।तब राज्य में रघुवर दास के नेतृत्व में एनडीए की सरकार थी। उस वक्त सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाने की अनुमति नहीं दी थी। 29 मार्च 2018 को केवल तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता व सीएम के सलाहकार अजय कुमार के खिलाफ जमानतीय धारा 171बी व 171सी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद ही तीनों अभियुक्तों पर पीसी एक्ट लगाया गया है।