झारखंड में सूचना आयुक्त नियुक्ति पर ब्रेक! राज्यपाल ने लौटाई फाइल, नेताओं के नामों पर उठा बड़ा सवाल

झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने रोक लगा दी है। नेताओं के नामों को लेकर विवाद गहराया, हाई कोर्ट में 13 अप्रैल को अहम सुनवाई।

झारखंड में सूचना आयुक्त नियुक्ति पर ब्रेक! राज्यपाल ने लौटाई फाइल, नेताओं के नामों पर उठा बड़ा सवाल
राज्यपाल संतोष गंगवार(फाइल फोटो)।
  • झारखंड में सूचना आयुक्त नियुक्ति पर संकट
  • राज्यपाल ने रोकी प्रक्रिया

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए नामों पर सहमति देने से इनकार कर दिया है और पूरी फाइल वापस लौटा दी है। इस फैसले से नियुक्ति प्रक्रिया फिलहाल ठप हो गई है।

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 राज्यपाल ने क्यों लौटाई फाइल?

राज्यपाल ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के चर्चित ‘अंजलि भारद्वाज मामले’ के आदेश और सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के प्रावधानों की गहन समीक्षा करे। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या जिन नामों की अनुशंसा की गई है, वे वास्तव में कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।

नेताओं के नामों पर बढ़ा विवाद

राज्य सरकार ने चार पदों के लिए जिन नामों की अनुशंसा की थी, उनमें तीन नाम सीधे तौर पर राजनीतिक दलों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा
धर्मवीर सिन्हा
झामुमो आईटी सेल प्रभारी तनुज खत्री
कांग्रेस महासचिव अमूल्य नीरज खलखो
भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक

इन नामों को लेकर कई सामाजिक संगठनों और व्यक्तियों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि सूचना आयुक्त जैसे संवेदनशील और निष्पक्ष पद पर राजनीतिक रूप से सक्रिय लोगों की नियुक्ति उचित नहीं है।

शिकायतों का भी लिया गया संज्ञान

राज्यपाल ने फाइल के साथ उन सभी शिकायतों और आपत्तियों को भी संलग्न किया है, जो लोक भवन को भेजी गई थीं। इससे साफ है कि निर्णय लेने से पहले उन्होंने सभी पक्षों को ध्यान में रखा।

 नियुक्ति प्रक्रिया में फंसा पेंच

फाइल लौटने के बाद अब पूरी प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। इससे पहले भी राज्यपाल ने इन नामों पर कानूनी राय ली थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

 हाई कोर्ट की निगाहें इस मामले पर

इस पूरे मामले पर झारखंड हाई कोर्ट में 13 अप्रैल को सुनवाई होनी है। कोर्ट पहले ही राज्य सरकार को खाली पड़े पदों को जल्द भरने का निर्देश दे चुका है। राज्य सरकार ने अदालत में 7 अप्रैल तक नियुक्ति करने की बात कही थी, लेकिन अब राज्यपाल के फैसले के बाद यह समयसीमा पूरी होना मुश्किल दिख रहा है।

क्यों अहम है यह मामला?

राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त समेत कई पद लंबे समय से खाली हैं, जिससे RTI से जुड़े मामलों के निपटारे में देरी हो रही है। अगर जल्द नियुक्ति नहीं होती है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े मामलों पर सीधा असर पड़ सकता है।

आगे क्या?

अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। उसे या तो नामों पर पुनर्विचार करना होगा या फिर सुप्रीम कोर्ट और RTI कानून के अनुसार नई अनुशंसा भेजनी होगी। 13 अप्रैल की हाई कोर्ट सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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