झारखंड: मरने से पहले ‘किशन दा’ का आखिरी खत वायरल, मिसिर बेसरा को दिया सशस्त्र संघर्ष छोड़ने का संकेत!
रांची जेल में बंद माओवादी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का अंतिम पत्र वायरल, जिसमें उन्होंने मिसिर बेसरा को सशस्त्र संघर्ष पर पुनर्विचार की सलाह दी। अधिकारियों ने इसे आत्मसमर्पण का संकेत माना।
रांची(Threesocieties.com Desk): झारखंड में माओवादी आंदोलन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद रहे माओवादी संगठन के वरिष्ठ नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का एक कथित अंतिम पत्र इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र में उन्होंने पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को सशस्त्र संघर्ष की रणनीति पर पुनर्विचार करने की सलाह दी है।
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बताया जा रहा है कि यह पत्र 20 मार्च का है, जिसे किशन दा ने अपनी मृत्यु से पहले लिखा था। गौरतलब है कि 80 वर्षीय किशन दा को तबीयत बिगड़ने के बाद 3 अप्रैल को रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
क्या लिखा है आखिरी पत्र में?
वायरल पत्र में किशन दा ने “कामरेड सागर” को संबोधित किया है, जिसे माओवादी संगठन में मिसिर बेसरा के नाम से जाना जाता है। पत्र में उन्होंने मौजूदा हालात को “बेहद जटिल और गंभीर” बताते हुए कहा है कि:
वर्तमान परिस्थितियों में सशस्त्र क्रांति को आगे बढ़ाना कठिन है
कई क्षेत्रों में माओवादियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है
संघर्ष जारी रखना जोखिम भरा और नुकसानदायक हो सकता है
उन्होंने यह भी लिखा कि अब समय आ गया है कि आंदोलन की दिशा और रणनीति पर गंभीरता से विचार किया जाए।
आत्मसमर्पण का संकेत?
सुरक्षा एजेंसियों और अधिकारियों ने इस पत्र को माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा संकेत माना है। उनका मानना है कि किशन दा ने अप्रत्यक्ष रूप से मिसिर बेसरा और उनकी टीम को आत्मसमर्पण करने की सलाह दी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि “जल्द निर्णय लें, कहीं ऐसा न हो कि देर हो जाए।”
पत्र की सत्यता पर सवाल
हालांकि, इस वायरल पत्र की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो पाई है। जेल प्रशासन का कहना है कि बिना अधीक्षक के सत्यापन के कोई भी पत्र जेल से बाहर नहीं जा सकता।
यह पत्र अवैध तरीके से बाहर आया हो सकता है
मामले की जांच की जा रही है
सुरक्षा एजेंसियां इसकी प्रामाणिकता खंगाल रही हैं
सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ा
इधर, झारखंड के सारंडा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों का माओवादी विरोधी अभियान लगातार जारी है। बताया जा रहा है कि मिसिर बेसरा पिछले कई महीनों से सुरक्षा बलों के दबाव में हैं और घिरे हुए हैं। ऐसे में किशन दा का यह पत्र माओवादी संगठन के भीतर की स्थिति और मनोबल को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
क्या बदल रही है माओवादी रणनीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि माओवादी संगठन अब कमजोर स्थिति में है। लगातार ऑपरेशन और गिरफ्तारी से नेटवर्क टूट रहा है। शीर्ष नेतृत्व के इस तरह के संकेत भविष्य में बड़े बदलाव का संकेत हो सकते हैं।
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