घाटशिला उपचुनाव: सोमेश सोरेन की सुनामी! एक लाख पार कर रचा इतिहास, चंपई के बेटे बाबूलाल हुए धराशायी
घाटशिला उपचुनाव में झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की। एक लाख से अधिक वोट पाकर इतिहास रचा, BJP के बाबूलाल सोरेन को 38,524 वोटों से हराया। घाटशिला के चुनावी इतिहास में पहली बार किसी उम्मीदवार ने 1 लाख वोट का आंकड़ा पार किया।
- घाटशिला उपचुनाव में JMM की ऐतिहासिक जीत
- सोमेश सोरेन ने रचा नया कीर्तिमान
- BJP के बाबूलाल को करारी शिकस्त
जमशेदपुर। घाटशिला विधानसभा उपचुनाव 2025 ने इतिहास रच दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के युवा उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन ने न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि घाटशिला विधानसभा के चुनावी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड भी बना दिया। पहली बार किसी विधायक ने एक लाख से ज्यादा वोट हासिल किए—सोमेश को मिले कुल 1,04,936 वोट।
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इसके साथ ही उन्होंने भाजपा उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को 38,524 वोटों के प्रचंड अंतर से हराया। बाबूलाल को केवल 66,270 वोट मिले। झामुमो समर्थकों ने 10वें राउंड से ही जश्न मनाना शुरू कर दिया था, क्योंकि शुरुआत से ही बढ़त लगातार बढ़ती गई।
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल को 75,910 वोट मिले थे। वहीं, पूर्व मंत्री दिवंगत रामदास सोरेन को 98,356 वोट मिले थे। हालांकि तीसरे स्थान पर रहने जेएलकेएम उम्मीदवार रामदास मुर्मू ने अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर परफॉर्म किया है। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्हें 8,092 वोट मिला था।
घाटशिला में ‘सोमेश सुनामी’ – पहली बार 1 लाख वोट का आंकड़ा पार
यह जीत सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि भावनाओं, विश्वास और राजनीतिक विरासत का परिणाम है। सोमेश ने अपने पिता, दिवंगत रामदास सोरेन का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। 2024 के विधानसभा चुनाव में रामदास सोरेन ने 98,356 वोट हासिल किए थे, जो तब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। अब वही रिकॉर्ड बेटे ने तोड़ दिया—एक नए कीर्तिमान के साथ।
क्यों मिली सोमेश को इतनी बड़ी जीत?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जीत की 3 बड़ी वजहें:
सहानुभूति का बड़ा असर
दिवंगत रामदास सोरेन की मृत्यु से उपजी सहानुभूति लहर ने बड़े पैमाने पर वोटों को प्रभावित किया।
हेमंत सरकार पर जनता का भरोसा
राज्य सरकार की योजनाओं—जैसे सरना धर्म कोड, महिला सम्मान योजनाएँ, छात्रवृत्ति—ने ग्रामीण और आदिवासी वोटरों को झामुमो की ओर मोड़ा।
झामुमो का मजबूत कैडर और स्थानीय पकड़
झामुमो का कैडर गांव-गांव तक अपनी पकड़ बनाये हुए था। बाबूलाल लगातार पीछे रहे, जिससे BJP कैंप में शुरुआती राउंड से ही मायूसी दिखी।
मतगणना अपडेट: पहले राउंड से अंत तक बढ़त
मतगणना की शुरुआत से ही झामुमो उम्मीदवार आगे रहे। 10वें राउंड के बाद से झामुमो खेमे में जश्न शुरू हो गया था, जबकि BJP के अधिकांश कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर छोड़कर निकल गए।
तीसरे स्थान पर JLKM प्रत्याशी
रामदास मुर्मू (JLKM) ने 11,542 वोट हासिल कर तीसरा स्थान पाया। 2019 की तुलना में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा (2024 में उन्हें 8,092 वोट मिले थे)।
घाटशिला का चुनावी इतिहास: पिता-पुत्र की रिकॉर्ड गाथा
वर्ष विजेता प्रत्याशी प्राप्त मत पार्टी
2025 (उपचुनाव) सोमेश चंद्र सोरेन 1,04,936 झामुमो
2024 रामदास सोरेन 98,356 झामुमो
2019 रामदास सोरेन 65,307 झामुमो
2014 लक्ष्मण टुडू 55,274 भाजपा
2009 रामदास सोरेन 41,894 झामुमो
यह साफ है कि घाटशिला में सोरेन परिवार का दबदबा लगातार बढ़ता गया है—2009 से 2025 तक वोटों का ग्राफ हर चुनाव में ऊपर ही गया है।
जनता का आभार — सोमेश भावुक हुए
जीत के बाद सोमेश ने कहा: “यह जीत मेरे पिता की विरासत और जनता के विश्वास की जीत है। मैं घाटशिला के लिए दिन-रात काम करूंगा।” उनका यह बयान झामुमो समर्थकों में नई ऊर्जा और उत्साह भर गया।
जेएमएम व बीजेपी ने जीत के लिए लगा दिया था पूरा जोर
घाटशिला उपचुनाव के लिए दोनों ही प्रमुख दलों बीजेपी व जेएमएम के नेताओं ने पूरा जोर लगा दिया था। बीजेपी की तरफ से चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन मैदान में जुटे थे। इसके अलावा भी ओडिशा और बंगाल के कई बड़े नेताओं ने आकर चुनावी जनसभा को संबोधित किया था। वहीं, झामुमो की तरफ से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के साथ साथ कई मंत्रियों और विधायकों ने मोर्चा संभाल लिया था।
निष्कर्ष
घाटशिला उपचुनाव में सोमेश सोरेन की ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ एक नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि झामुमो का यह गढ़ पहले से और मजबूत हो गया है।BJP के लिए यह परिणाम बड़ा झटका है, क्योंकि वे न केवल पिछला प्रदर्शन दोहरा नहीं सके, बल्कि भारी अंतर से पराजित हुए।






