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धनबाद। कोयला राजधानी धनबाद के सिंदरी में पिछले साल हुई तोड़फोड़, व पुलिस पर हमला मामले के आरोपी संतोष चौधरी को पुलिस ने अरेस्ट कर जेल भेज दिया है। फर्टिलाइजर फैक्ट्री वर्कर्स यूनियन महासचिव संतोष चौधरी के रांगामाटी स्थित आवास से अरेस्ट कर पुलिस उसे बैंक मोड़ पुलिस स्टेशन ले गई। कागजी कार्रवाई पूरी कर उसे कोर्ट में पेशी के बाद  जेल भेज दिया गया।

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सिंदरी पुलिस ने सिंह मेंशन के खास व जनता श्रमिक संघ संयुक्त महामंत्री गौरव वक्ष उर्फ लक्की सिंह के शहरपुरा स्थित आवास पर भी रेड की लेकिन वह बच निकला। पुलिस का कहना है कि उक्त मामले में आरोपी लक्की सिंह को जल्द दबोचा जायेगा। गौरव वक्ष के आवास पर रेड कर पुलिस उनके पिता इंद्रमोहन सिंह और बॉडीगार्ड को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन लायी थी। पूछताथ के बाद दोनों छोड़ दिया गया। सिंदरी थानेदार प्रभात कुमार सिंह ने कहा कि इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार रेड कर रही है।
यह है मामला

सिंदरी के शहरपुरा में 25 अगस्त 2022 को हिंसक शक्ति शक्ति प्रदर्शन हुआ था। संतोष चौधरी व लकी सिंह आमने-सामने थे। संतोष चौधरी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों के हमले में भौरा ओपी के तत्कालीन प्रभारी सब इंस्पेक्टर हिमांशु कुमार गंभीर रूप से घायल हो गये। सिंदरी व पाथरडीह थाना के प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए थे। उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया था। पुलिस जवानों और अफसरों की वर्दी फाड़ी गई थी। बलियापुर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम पर भी हमला हुआ था। पूरे मामले में सिंदरी में दो और बलियापुर में एक, कुल तीन एफआईआर दर्ज हुई थी। . सिंदरी थाना में पुलिस ने 39 नामजद लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिसमें सिंदरी के एक्स एमएलए आनंद महतो के पुत्र व मासस के केंद्रीय सचिव बबलू महतो, कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश रवानी, भाषा आंदोलनकारी जयराम महतो आदि शामिल हैं। बलियापुर थाने में भी 23 पर प्राथमिकी हुई थी। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी. काफी छानबीन करने के बाद नामजद किया गया है।

मामले में जयराम महतो है भी नेम्ड

भाषा आंदोलन से चर्चा में आए जयराम महतो लगातार पुलिस प्रशासन के सामने आमसभा कर रहे हैं। लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पायी है। हाल के दिनों में जयराम महतो बलियापुर में विशाल सभा को चिलचिलाती धूप में संबोधन किया और चले गये लेकिन पुलिस पकड़ना तो दूर पूछताछ तक नहीं कर सकी। जानकार सोर्सेज का कहना है कि आरोपियों में से एक, जो सरकारी नौकरी में था, वह इस्तीफा दे दिया है। उसे भय था कि अगर इस मामले में गिरफ्तारी हो जाती है और सजा हुई तो उनके पावना निर्गत होने में परेशानी हो सकती है। इसलिए नौकरी से इस्तीफा दें दिया है। इस मामले में पुलिस 11 महीने बाद रेस हो गयी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए रेड कर रही है। प्रदर्शनकारियों के हमले में 25 अगस्त 2022 गंभीर रूप से घायल भौरा ओपी के तत्कालीन प्रभारी हिमांशु कुमार को  एयर लिफ्ट कर दुर्गापुर से दिल्ली ले जाया गया था। कई मह तक चले इलाज के बाद वह ठीक हुए हैं। आरोपियों के प्रति पुलिस का नरम रुख कई सवालों को जन्म देता है। अब लंबे अरसे के बाद पुलिस आरोपियों पर दबिश देनी शुरु कर दी है।