- बीएसएनएल में एक लाख 65 हजार 179 व एमटीएनएल में 21,679 स्टाफ हैं
- BSNL और MTNL का होगा मर्जर, कर्मचारियों के लिए वीआरएस स्कीम
- दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों में रह रहे 40 लाख लोगों को मिलेगा मालिकाना अधिकार
नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सेंट्रल कैबिनेट की बैठक में आर्थिक संकट से जूझ रही गर्वमेंट की टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल का बीएसएनएल का मर्जर करने, दिल्ली के 1797 अनाधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख लोगों को मालिकाना हक दिये जाने व रबी की फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी का फैसला किया गया है. BSNL-MTNL रिवाइवल प्लान को मंजूरी, के साथ ही गर्वमेट 15 हजार करोड़ रुपये देगी. सेंट्रल मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर, रविशंकर प्रसाद और हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कांफ्रेस में कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी.
सेंट्रल मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गर्वमेंट ना तो BSNL, MTNL को बंद करने जा रही है और ना ही विनिवेश किया जायेगा.घाटे में चल रही कंपनियों को पटरी पर लाने के लिए 29,937 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. योजना के तहत 15,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड जारी किये जायेंगे. 38,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का मौद्रीकरण किया जायेगा. इसके अलावा कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना लाई जायेगी.
'BSNL और MTNL को लेकर सरकार की सोच साफ है कि यह कंपनियां नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण संपत्तियां हैं. नेपाल में भूंकप हो या कश्मीर बाढ़, सबसे अधिक सहयोगात्मक रवैया BSNL का ही होता है.हमारी आर्मी और बैंकों का नेटवर्क भी BSNL के जिम्मे है. सरकार BSNL और MTNL को ना तो बेच रही है और ना ही हिस्सा घटा रही है. हम इसमें व्यावसायिकता लाने जा रहे हैं. कंपनी को 4जी स्पेक्ट्रम दिया जायेगा.अगले चार साल में 38 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का मौद्रीकरण करने का भी फैसला किया गया है.
BSNL और MTNL में वीआरएस स्कीम
रविशंकर ने कहा कि हम लुभावना वीआरएस पैकेज लेकर आ रहे हैं. कर्मचारी संगठनों ने भी इसकी सराहना की है. अगर किसी कर्मचारी की उम्र 53 साल है तो 60 साल तक उसे 125 पर्सेंट वेतन मिलेगा. वीआरएस का मतलब है स्वेच्छा से नाकि बलपूर्वक. अन्य टेलिकॉम कंपनियां का खर्चा मानव संसाधन पर केवल पांच पर्सेंट है, लेकिन इन दोनों कंपनियों का 70 पर्सेंट है.
BSNL और MTNL का मर्जर होने में कुछ समय लगेगा. तब तक MTNL BSNL की सब्सिडियरी के रूप में काम करेगी. मर्जर से साल बाद बीएसएनएल को मुनाफे में लाया जा सकेगा. दोनों कंपनियों के लोन की रिस्ट्रक्चरिंग भी होगी.
बीएसएनएल व एमटीएनएल के स्टाफ के लिए 17169 करोड़ रुपये की वीआरएस योजना
गर्वमेंट की ओर से बीएसएनएनल एक लाख 65 हजार 179 और एमटीएनएल के 21,679 कर्मचारियों के लिए आकर्षक वीआरएस योजना भी पेश की गयी है. योजना का लाभ 50 साल या अधिक उम्र के कर्मचारी ले सकेंगे. इस स्कीम के लिए अतिरिक्त 17,169 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी. दोनों कंपनियां योजना का प्रारूप तय करेंगी.उल्लेखनीय है कि काफी दिनों से एमटीएनएल और बीएसएनएल घाटे में चल रही हैं. दोनों कंपनियों को पिछले महीनों में कई बार कर्मचारियों का वेतन देने में भी परेशानी आ चुकी है. बीएसएनएल को 2018-19 में लगभग 14,202 करोड़ रुपये का घाटा होने का अनुमान है. 2017-18 में 7,993 करोड़ रुपये, 2016-17 में 4,793 करोड़ और 2015-16 में 4,859 रुपये का घाटा हुआ था.
दिल्ली के 40 लाख लोगों को होगा फायदा
सेंट्रल गर्वमेंट दिल्ली की Unauthorised Colonies में रह रहे लोगों को मालिकाना अधिकार देने पर सहमत हो गयी है. दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों में 40 लाख लोग रह रहे हैं. कैबानेट मीटिंग के बाद प्रेस कांफ्रंस में मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कैबिनेट ने दिल्ली की अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने का फैसला लिया है. दिल्ली में लगभग 1,797 अवैध कॉलोनियां हैं.कैबिनेट के फैसले से अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 40 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. जंगलों की जमीन पर बनी और संपन्न कॉलोनियों को इसमें शामिल नहीं किया जायेगा.
रबी फसल के एमएसपी) में बढ़ोतरी
पीएम की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू की एमएसपी में प्रति क्विंटल 85 रुपए की वृद्धि की गई है.चना में प्रति क्विंटल 255 रुपए की और मसूर में 325 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है. यह बढ़ोत्तरी वर्ष 2019-20 के लिए तय एमएसपी को आधार मानते हुए की गई है. मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर ने बताया कि सरकार की यह पहल 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में उठाया गया एक कदम है. इसके साथ ही किसानों को किसान सम्मान निधि के तहत प्रति वर्ष छह हजार रुपए दिए जा रहे है. इसके तहत ज्यादातर किसानों को अब तक दो से तीन किश्तें मिल चुकी है.
एमएसपी में बढोत्तरी
फसलों के एमएसपी में यह बढोत्तरी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश के आधार पर किया जाता है. जो मौसम सहित फसलों के उत्पादन के अनुमान को देखते हुए इसे तय करता है.
रबी सीजन की पांच फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को मंजूरी
सीसीईए ने विपणन सत्र 2020-21 के लिए रबी सीजन की कुल पांच फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. इसके तहत गेंहू और जौ में 85 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है. इसके तहत गेंहू का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 1840 रुपए से बढ़ाकर 1925 कर दिया है. इसी तरह जौ की एमएसपी को भी प्रति क्विंटल 1440 रुपए से बढ़ाकर 1525 रुपए कर दिया गया है.सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी चना, मसूर, सरसों और कुसुम की फसलों में की गई है. चना की एमएसपी प्रति क्विंटल 4620 से बढ़ाकर 4875 कर दिया गया है. मसूर की एमएसपी प्रति क्विंटल 4475 से बढ़ाकर 4800 रुपए, सरसों की एमएसपी प्रति क्विंटल 4200 से बढ़ाकर 4425 रुपए कर दिया गया है. कुसुम की एमएसपी 4945 से बढ़ाकर 5215 प्रति क्विंटल कर दिया गया है.
अब गैर-पेट्रोलियम कंपनियां भी खोल सकेंगी पेट्रोल पंप
सेंट्रल गर्वमेंट ने पेट्रोल, डीजल के खुदरा कारोबार क्षेत्र के नियमों में बड़े बदलाव की घोषणा की है. अब ऐसी कंपनियों भी पेट्रोल पंप खोल सकेंगी जो पेट्रोलियम क्षेत्र में नहीं हैं.. सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ईंधन के खुदरा कारोबार को पेट्रोलियम क्षेत्र से बाहर की कंपनियों के लिए खोलने से निवेश और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. देश में ईंधन के खुदरा कारोबार का लाइसेंस हासिल करने के अब तक के नियमों के तहत किसी भी कंपनी को हाइड्रोकार्बन खोज, उत्पादन, रिफाइनिंग, पाइपलाइन क्षेत्र या तरलीकृत गैस टर्मिनलों (एलएनजी) में 2,000 करोड़ रुपये का निवेश करना जरूरी शर्त रखी गई थी.
कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने वाहन ईंधन के विपणन का अधिकार देने संबंधी दिशानिर्देशों की समीक्षा को मंजूरी दे दी है. नियमों में बदलाव करते हुये सरकार ने कहा है कि 250 करोड़ रुपये नेटवर्थ रखने वाली कंपनियां अब ईंधन के खुदरा कारोबार क्षेत्र में उतर सकती हैं.इसके लिए शर्त यह होगी कि कम से कम पांच प्रतिशत पेट्रोल पंप ग्रामीण इलाकों में खोले जायेंगे.पेट्रोल पंप खोलने की इच्छुक कंपनियों को परिचालन शुरू करने के तीन साल के अंदर कम से कम एक नई पीढ़ी के वैकल्पिक ईंधन मसलन सीएनजी, एलएनजी, जैव ईधन या इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की सुविधा स्थापित करनी होगी.नई नीति से अधिक निवेश आयेगा और कारोबार सुगमता की स्थिति और बेहतर हो सकेगी.इससे क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बढ़ेगा.
उन्होंने कहा कि और पेट्रोल पंप खोलने से प्रतिस्पर्धा की स्थिति बेहतर हो सकेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं दी जा सकेंगी.सरकार ने आखिरी बार 2002 में ईंधन विपणन के नियम तय किये थे. अब इसकी समीक्षा एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर की जा रही है.
वर्तमान में देश में 65,000 पेट्रोल पंप परिचालन में हैं. पंप का ज्यादातर स्वामित्व सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) रिलायंस इंडस्ट्रीज, नायरा एनर्जी (पुराना नाम एस्सार आयल) और रॉयल डच शेल भी पंट्रोल पंप चला रही है. वर्ल्ड के सबसे बड़े पेट्रोलियम रिफाइनिंग परिसर का परिचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के पेट्रोल पंपों की संख्या 1,400 से भी कम है.