नई दिल्ली: लोकसभा में भारी हंगामे के बीच शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल पास हो गया. राज्य में राष्ट्रपति शासन का समय भी छह महीने के लिए बढ़ गया है. राष्ट्पति शासन का समय तीन जुलाई को समाप्त होने वाला था. लोकसभा में कांग्रेस ने इस बिल का जोरदार विरोध किया. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि चुनाव आयोग जब भी कहेगा जम्मू-कश्मीर में निष्पक्ष चुनाव कराये जायेंगे.
गृह मंत्री ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि मोदी सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है.हमारा विचार है कि देश की सीमाओं की रक्षा हो और देश आतंकवाद से मुक्त रहे. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन के कारण स्थिति ऐसी बन गई है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन की सीमा बढ़ानी पड़ रही है।.अगर आपकी नीति आतंकवाद के खिलाफ कठोर है तो हम उसका विरोण नहीं करते.यह बात ध्यान रखने की है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी जीती जा सकती है अगर राज्य के लोग आपके साथ हों.
नेहरू ने बढ़ाई समस्या: शाह
इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को 6 महीने और बढ़ाने का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया. कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि सूबे में चुनी हुई सरकार होती तो यह ज्यादा अच्छा होता. यही नहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर सत्ता का दुरुपयोग करने और जबरन राष्ट्रपति शासन लगाने का आरोप लगाया. गृह मंत्री अमित शाह ने नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार तक की नीतियों पर सवाल उठाये. शाह के इस बयान पर कांग्रेस के सदस्यों ने सदन में खूब हंगामा किया. शाह ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि धारा 356 का इस्तेमाल कर सबसे ज्यादा सरकारों को उन्होंने ही गिराया. कांग्रेस ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए चुनी हुई सरकारों को गिराने का काम किया.
अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की समस्या के लिए देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया.शाह के इस बयान पर कांग्रेस के सदस्य हंगामा करने लगे. अमित शाह ने कहा कि मैंने जो कहा है, सच ही कहा है. कांग्रेस सांसदों के हंगामे के बीच अमित शाह ने कहा कि अब अपने जवाब में मैं पं. नेहरू का नाम नहीं लूंगा बल्कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री का जिक्र करूंगा. कांग्रेसी सांसदों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि पटेल ने जूनागढ़ और हैदराबाद की समस्या का निपटारा किया और देश में सफल विलय कराया, लेकिन नेहरू ने कश्मीर की समस्या को बढ़ा दिया. आज एक-तिहाई जम्मू-कश्मीर भारत के साथ नहीं है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है?' शाह के इस बयान पर जमकर हंगामा हुआ. शाह ने कहा कि कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी इतिहास की बात करते हैं. यदि इतिहास की बात करें तो देश के विभाजन की जिम्मेदार कांग्रेस ही है। हम नहीं हैं। जम्मू-कश्मीर का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है. पाकिस्तानी कबायलियों को जब सेना बाहर कर रही थी तो सीजफायर कर दिया गया. हमसे कहते हैं कि लोगों को भरोसे में नहीं लेते, लेकिन नेहरू ने गृहमंत्री को भरोसे में लिए बगैर सीजफायर कर दिया.
शाह ने कहा कि हैदराबाद और जूनागढ़ में भी समस्या थी, लेकिन सरकार पटेल ने समस्याओं को खत्म कर दिया। नेहरू के जिमे कश्मीर था और वहां क्या हुआ? यह सामने है। कांग्रेस की ओर से लोकतंत्र का गला घोटने के आरोप पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, '132 बार धारा 356 का इस्तेमाल किया गया, इसमें 93 बार केंद्र सरकार ने इस्तेमाल किया। अमित शाह ने कहा कि आपने राजनीतिक मकसद से एक दिन में कई सरकारों को धारा 356 लगाकर गिरा दिया। हमने कभी इसका इस्तेमाल अपना राजनीतिक मकसद पूरा करने के लिए नहीं किया.'
अमित शाह ने कहा कि आज तक जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया. उन्होंने कहा कि जेकेएलएफ इतने सालों से किस देश का लिबरेशन करना चाहता था। उस पर बैन किसने लगाया, यह बीजेपी की सरकार ने लगाया।' शाह ने कहा, 'भारत में सुरक्षा का एक पैरामीटर यह आया कि देश विरोधी 4 बयान दे दो और सुरक्षा ले लो। भारत की बात करने वालों को सुरक्षा नहीं मिलती थी, लेकिन विरोधियों को सुरक्षा दी गई। 2,000 लोगों को सुरक्षा दी गई, इनमें से 919 की सुरक्षा हटाने का काम हमने किया। पाकिस्तान के चैनल दिखाए गए। भारत विरोधी कार्यक्रम होते थे. मैं राजनाथ सिंह और पीएम मोदी का अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने पाकिस्तान के चैनलों पर बैन लगाया.