Venezuela Bhukamp: मलबे में 24 घंटे दबा रहा 18 दिन का मासूम , रोने की आवाज ने मां को भी दिलाई नई जिंदगी

Venezuela Bhukamp News: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बीच उम्मीद और चमत्कार की कहानियां सामने आई हैं। 8 मंजिला इमारत के मलबे में 24 घंटे तक दबे 18 दिन के नवजात और उसकी मां को बच्चे के रोने की आवाज के सहारे सुरक्षित बचा लिया गया। वहीं एक अन्य परिवार भी मलबे से जिंदा बाहर निकला।

Venezuela Bhukamp: मलबे में 24 घंटे दबा रहा 18 दिन का मासूम , रोने की आवाज ने मां को भी दिलाई नई जिंदगी
18 दिन के बच्चे और मां की चमत्कारी वापसी।

    HighLights:

  • वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भीषण भूकंपों ने मचाई भारी तबाही
  • अब तक 920 लोगों की मौत और 3,000 से अधिक घायल होने की पुष्टि
  • 8 मंजिला इमारत के मलबे में 24 घंटे तक दबे रहे 18 दिन का नवजात और उसकी मां
  • बच्चे के रोने की आवाज सुनकर रेस्क्यू टीम ने मां-बेटे को सुरक्षित बाहर निकाला
  • भारी मलबे के बावजूद मां और बच्चे को एक भी फ्रैक्चर नहीं हुआ
  • एक अन्य घटना में 4 साल के बच्चे समेत पूरा परिवार मलबे से जिंदा निकाला गया

कराकस, वेनेजुएला ( Threesocieties.com Desk): वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में बुधवार को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हजारों इमारतें धराशायी हो गईं, सड़कें टूट गईं और कई शहरों में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया। इस विनाशकारी आपदा में अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 3,000 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में मलबे के ढेर के बीच भटक रहे हैं।

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लेकिन इस भयावह तबाही के बीच कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया है और यह साबित किया है कि उम्मीद की आखिरी किरण कभी खत्म नहीं होती।

18 दिन के नवजात की आवाज बनी जिंदगी की पहचान

लागुआरा शहर में स्थित एक आठ मंजिला इमारत भूकंप के झटकों के बाद देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गई। इसी इमारत के नीचे दयाना पटिनो और उनका महज 18 दिन का नवजात बेटा दब गए। मलबे का दबाव इतना अधिक था कि दयाना अपने शरीर को हिला तक नहीं पा रही थीं। उन्होंने अपने बेटे को सीने से लगाकर घंटों तक संभाले रखा, लेकिन हालत ऐसी थी कि वे उसे दूध भी नहीं पिला सकती थीं।

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रेस्क्यू टीम और स्वयंसेवक लगातार उनकी तलाश कर रहे थे। करीब 12 घंटे की खोज के बाद बचावकर्मियों ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी कि शायद अब वहां कोई जीवित नहीं बचा होगा। तभी गुरुवार सुबह अचानक मलबे के भीतर से एक बच्चे के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। बचावकर्मियों ने ध्यान से सुनना शुरू किया और फिर उन्हें एक महिला की कमजोर आवाज भी सुनाई दी। यही आवाज रेस्क्यू टीम को उस स्थान तक ले गई जहां मां और बेटा जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे।

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शुक्रवार तड़के सुरक्षित बाहर निकाले गए मां-बेटे

रेस्क्यू टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद शुक्रवार तड़के करीब एक बजे मलबे को सावधानी से हटाया और मां-बेटे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि भारी-भरकम कंक्रीट और लोहे के ढांचे के नीचे दबे रहने के बावजूद मां और बच्चे के शरीर में एक भी फ्रैक्चर नहीं पाया गया। दोनों को तुरंत राजधानी काराकास के एक क्लिनिक में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर बताया। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को यह कहावत याद दिला दी— "जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई।"

4 साल का बच्चा भी मलबे से निकला जिंदा

ला गुआरा में ही एक सात मंजिला अपार्टमेंट के ढह जाने के बाद जोस अल्बर्टो गैलीपोली अपने बेटे, बहू और चार साल के पोते की तलाश में लगातार जुटे रहे। भूकंप के समय वे राजधानी काराकास में थे, लेकिन जैसे ही उन्हें हादसे की जानकारी मिली, वे टूटे रास्तों और मलबे को पार करते हुए पैदल ही घटनास्थल पहुंच गए। उन्होंने मलबे के पास खड़े होकर अपने बेटे का नाम पुकारना शुरू किया। कुछ देर बाद उन्हें नीचे से बेहद धीमी आवाज सुनाई दी। यह उनके बेटे की आवाज थी, जिसने बचावकर्मियों को नई उम्मीद दे दी। रेस्क्यू टीम ने मलबे के बीच एक संकरा रास्ता बनाया और सबसे पहले चार साल के बच्चे को बाहर निकाला। बाहर आते ही बच्चे ने कहा, "मैं ठीक हूं।" इसके बाद उसके माता-पिता को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और परिवार एक-दूसरे से गले लगकर रो पड़ा।

तबाही के बीच इंसानियत और उम्मीद की जीत

वेनेजुएला के इस भूकंप ने हजारों परिवारों को गहरा जख्म दिया है, लेकिन मलबे के नीचे से निकली इन जिंदगी की कहानियों ने दुनिया को यह संदेश भी दिया है कि उम्मीद और हौसला सबसे बड़ी ताकत होती है। बचावकर्मी अब भी दिन-रात मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं और हर आवाज को ध्यान से सुन रहे हैं, क्योंकि कई बार जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद एक मासूम की सिसकी बनकर सामने आती है।