बिहार: नीतीश कुमार से मिले आरसीपी सिंह, समर्थकों के दावों से बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया विवाद सामने आया है। भाई चंदन तिवारी ने भोजपुर एसपी पर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाने और धमकाने का आरोप लगाया है। परिजनों ने CBI जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बिहार: नीतीश कुमार से मिले आरसीपी सिंह, समर्थकों के दावों से बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
'आत्मीय बातचीत' की तस्वीर शेयर करते ही बढ़ीं चर्चाएं।

      HighLights:

  • करीब 20 मिनट तक पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह के बीच बातचीत हुई
  • आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीर साझा कर इसकी पुष्टि की
  • समर्थकों ने आरोप लगाया कि संजय गांधी और ललन सर्राफ ने मुलाकात में बाधा डालने की कोशिश की
  • इस मुलाकात के बाद जदयू में आरसीपी सिंह की वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके 7, सर्कुलर रोड स्थित आवास पहुंचे। लगभग 20 मिनट तक चली इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।

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मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से "आत्मीय बातचीत" हुई। तस्वीर सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय बाद सीधी बातचीत हुई है।

चार साल बाद नीतीश कुमार से मिले RCP, बोले पूरी तरह मजबूत हैं एक्स सीएम

नीतीश से मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्‍होंने कहा कि नीतीश जी को कोई कमजोर समझने की भूल नहीं करे। वे कल भी मजबूत थे और आज भी पूरी तरह मजबूत हैं। मीडिया से बातचीत में आरसीपी ने मुलाकात पर कहा कि, करीब चार वर्ष बाद उनसे भेंट हुई। बातचीत क्‍या हुई, यह पूछने पर कहा क‍ि कम्‍यूनिकेशन का सबसे बड़ा माध्‍यम चेहरा होता है। उनके चेहरे का भाव बहुत बेहतर था।  नीतीश कुमार से उनका संबंध आज का नहीं है। 25 वर्षों तक उनके साथ रहे हैं। उनके साथ पदाधिकारी से लेकर सहयोगी तक के रूप में काम किया। उसे कोई नहीं बदल सकता। हमारे संबंध दूसरों से अलग रहे हैं। 

हमेशा मेरे नेता रहे हैं नीतीश कुमार : आरसीपी
आरसीपी सिंहने कहा कि वे हमेशा बोलते आए हैं कि वे हमारे नेता हैं। नीतीश कुमार किसी के कहने से कमजोर हो जाएंगे क्‍या? इनका व्‍यक्‍त‍ित्‍व सबसे अलग रहा है। वे कमजोर नहीं हो सकते। जो थे, आज हैं और आगे भी रहेंगे। गलतफहमी में कोई न रहे कि वे कमजोर हैं। आरसीपी ने कहा कि वे खुद को हमेशा घर (जदयू) में समझते हैं। जो बाहर समझते हैं, वे जानें।   हमारा घर का संबंध है। निशांत को देखकर काफी खुशी होती है। वे बेहतर करेंगे। निशांत का अपना कोई इंटरेस्‍ट नहीं है। वे केवल बिहार के लोगों को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं देने के लक्ष्‍य पर काम कर रहे हैं।  

समर्थकों के दावों से आया नया मोड़

हालांकि, यह मामला तब और दिलचस्प हो गया जब आरसीपी सिंह के कुछ समर्थकों ने दावा किया कि उनकी मुलाकात को रोकने की कोशिश की गई। समर्थकों का आरोप है कि विधान परिषद सदस्य संजय गांधी और ललन सर्राफ ने दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं होने दी। समर्थकों ने इसको लेकर नाराजगी जताई और दोनों नेताओं के खिलाफ नारेबाजी भी की। हालांकि, आरसीपी सिंह ने इस आरोप पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही जदयू की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

कभी नीतीश के सबसे करीबी थे आरसीपी

आरसीपी सिंह को एक समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे विश्वसनीय सहयोगी माना जाता था। संगठन से लेकर सरकार तक, जदयू के भीतर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। बाद में केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं के संबंधों में दूरी बढ़ने लगी।राजनीतिक मतभेद बढ़ने के बाद आरसीपी सिंह को जदयू छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने की कोशिश की, लेकिन बिहार की राजनीति में वह कोई बड़ा प्रभाव स्थापित नहीं कर सके।

पिछले कुछ महीनों से बढ़ी नजदीकियां

पिछले कुछ महीनों के दौरान आरसीपी सिंह लगातार सार्वजनिक मंचों पर यह कहते रहे हैं कि नीतीश कुमार और उनके परिवार के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते कभी खत्म नहीं हुए। वह कई मौकों पर मुख्यमंत्री के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करते रहे हैं।हाल ही में वह नीतीश कुमार के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भी दिखाई दिए थे, जिसके बाद से ही राजनीतिक विश्लेषक दोनों नेताओं के बीच बढ़ती नजदीकियों के संकेत तलाश रहे थे।

क्या जदयू में वापसी की तैयारी?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं हो सकती। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जदयू अपने पुराने नेताओं और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में आरसीपी सिंह की संभावित वापसी की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।हालांकि, जदयू नेतृत्व अब तक कई बार स्पष्ट कर चुका है कि आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी को लेकर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। वहीं, आरसीपी सिंह ने भी इस दिशा में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

बिहार की राजनीति में अभी खत्म नहीं हुआ आरसीपी अध्याय

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मुलाकात का राजनीतिक परिणाम क्या होगा, लेकिन इतना तय है कि नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की यह मुलाकात बिहार की राजनीति में नए समीकरणों और संभावनाओं की चर्चा को फिर से हवा दे गई है। आने वाले दिनों में जदयू और आरसीपी सिंह की ओर से आने वाले संकेत इस मुलाकात के वास्तविक मायनों को और स्पष्ट करेंगे।