शादी की प्लानिंग कर रहे हैं? सिर्फ 9 शुभ मुहूर्त बाकी, फिर 4 महीने तक थम जाएंगी शहनाइयां
अगर आप शादी, गृहप्रवेश, मुंडन या अन्य मांगलिक कार्य की योजना बना रहे हैं तो जल्दी करें। 12 जुलाई 2026 तक ही शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने के बाद चार महीने तक विवाह और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। जानिए जून-जुलाई के सभी शुभ मुहूर्त और चातुर्मास का महत्व।
HighLights:
- 12 जुलाई तक ही उपलब्ध हैं विवाह के शुभ मुहूर्त
- 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, चार महीने तक रुकेंगे मांगलिक कार्य
- 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के बाद फिर शुरू होंगे विवाह
- जून और जुलाई में कुल 9 शुभ लग्न शेष
- विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे संस्कार भी रहेंगे स्थगित
पटना (Threesocieties.com Desk): अगर आप शादी-विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जनेऊ या भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्यों की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 12 जुलाई तक ही शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इसके बाद 25 जुलाई से शुरू होने वाले चातुर्मास के कारण अगले चार महीनों तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी 25 जुलाई को देवशयन एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत होती है। यह अवधि चार महीने तक चलती है और इसका समापन 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के दिन होता है। भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह और अन्य शुभ संस्कारों की शुरुआत दोबारा होती है।
जून और जुलाई में बचे हैं ये शुभ मुहूर्त
बनारसी पंचांग के अनुसार जून महीने में 28 और 29 जून को विवाह के लिए शुभ लग्न उपलब्ध हैं। वहीं जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 जुलाई को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। वहीं मिथिला पंचांग के अनुसार जुलाई में 1, 2, 3, 6, 9 और 12 जुलाई को शुभ लग्न उपलब्ध रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि चातुर्मास समाप्त होने के बाद नवंबर और दिसंबर में कुल 19 शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध होंगे।
25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवशयन एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि के दौरान सृष्टि संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव के हाथों में मानी जाती है। इसी कारण इस समय विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जनेऊ और अन्य शुभ संस्कारों को टालने की परंपरा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अवधि में सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में भी बदलाव होता है, जिसके कारण इसे शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त समय नहीं माना जाता।
20 नवंबर के बाद फिर गूंजेगी शहनाई
20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ फिर से होगा। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में शंख, घंटी, मृदंग और डमरू बजाकर भगवान विष्णु का जागरण किया जाता है।इसके बाद नवंबर और दिसंबर में विवाह समारोहों की धूम एक बार फिर देखने को मिलेगी और शादी के बाजार में भी रौनक लौट आएगी।
मिथिला पंचांग के अनुसार विवाह के शुभ मुहूर्त
जून
28 जून
29 जून
जुलाई
1 जुलाई
2 जुलाई
3 जुलाई
6 जुलाई
9 जुलाई
12 जुलाई
बनारसी पंचांग के अनुसार विवाह के शुभ मुहूर्त
जून
28 जून
29 जून
जुलाई
1 जुलाई
2 जुलाई
6 जुलाई
7 जुलाई
8 जुलाई
11 जुलाई
12 जुलाई






