राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 79.85 लाख की बरामदगी, 8 आरोपी जेल, SBI के कई कर्मचारी SIT के रडार पर
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं और 8 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। SIT की जांच में SBI के कई कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
अयोध्या (Threesocieties.com Desk): राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। अब तक इस मामले में कुल 79.85 लाख रुपये की बरामदगी की गई है, जबकि आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस बीच जांच का दायरा बढ़ाते हुए विशेष जांच दल (SIT) ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कई कर्मचारियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में माना है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर केसी वर्मा के अनुसार, गिरफ्तार सभी आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। सोमवार को उन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत में फिर पेश किया जाएगा।
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ट्रस्ट सदस्य की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज की गई। प्राथमिकी में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और मनीष कुमार यादव सहित अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।इन पर चढ़ावे की रकम में गबन, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति रखने, षड्यंत्र रचने और अपराध में सहयोग करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा लोक सेवकों पर लागू भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
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SBI कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
एफआईआर और SIT की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मंदिर परिसर के गणना कक्ष में ट्रस्ट और बैंक के पर्यवेक्षीय कर्मचारियों की मौजूदगी रहती थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान की रकम की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियां हुईं। सूत्रों के मुताबिक, SBI के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने पर उनसे पूछताछ की जा रही है। हालांकि अब तक किसी बैंक अधिकारी के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।
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सीसीटीवी फुटेज और 150 से अधिक लोगों से पूछताछ
SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज, दान गिनने की प्रक्रिया और 150 से अधिक लोगों से हुई पूछताछ को शामिल किया है। लगभग 21 पन्नों की रिपोर्ट में चढ़ावे की नगद राशि, आभूषण, रत्न और अन्य सामग्री के भौतिक ऑडिट की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दानपात्रों की चाबी कथित तौर पर टिन्नू यादव के पास रहती थी और दानपात्र बैंक कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में खोले जाते थे।
चंपत राय के पूर्व चालक रहे हैं टिन्नू यादव
प्राथमिकी में नामजद रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के बारे में बताया गया है कि वह पहले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के वाहन चालक के रूप में काम कर चुका है। हालांकि टिन्नू यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है और आरोपों के पीछे कुछ लोगों की व्यक्तिगत दुश्मनी और साजिश का दावा किया है।
SIT रिपोर्ट के बाद बढ़ी कार्रवाई
राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT ने छह दिनों तक अयोध्या में रहकर जांच की और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच और तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
उधर, विश्व हिंदू परिषद ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाने की मांग की है।राम मंदिर जैसे देश की आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल में चढ़ावे की कथित चोरी के इस मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अब सबकी नजर SIT की विस्तृत जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।






