उत्तर प्रदेश: देवरिया जेल से रिहा हुए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, पुलिस को भनक तक नहीं… कहां गये, रहस्य बरकरार!
देवरिया जेल से पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की देर रात रिहाई, लखनऊ पुलिस को भनक तक नहीं लगी। सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी के खिलाफ जनहित याचिका दर्ज, CBI जांच की मांग तेज।
- देवरिया से आधी रात रिहाई, पुलिस रह गई देखती!
लखनऊ (Threesocieties.com Desk)। धोखाधड़ी के मामले में करीब दो महीने से देवरिया जिला कारागार में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को बुधवार देर रात अचानक रिहा कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनकी रिहाई की भनक न तो देवरिया पुलिस को लगी और न ही कई दिनों से डेरा डाले बैठी लखनऊ पुलिस को।
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जेल से बाहर निकलते समय अमिताभ ठाकुर अकेले थे। सूत्रों के अनुसार वे जेल गेट से मुख्य सड़क तक पैदल गए और फिर एक कार में बैठकर कहीं रवाना हो गए। वे कहां गए, इसकी आधिकारिक जानकारी किसी के पास नहीं है।
चलती ट्रेन से हुई थी गिरफ्तारी
अमिताभ ठाकुर को 10 दिसंबर 2025 को चलती ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था। उन पर औद्योगिक प्लॉट आवंटन में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद से वे देवरिया जेल में निरुद्ध थे। 19 जनवरी को देवरिया कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन उस समय बेल बॉन्ड जमा नहीं हो सका था। बाद में वाराणसी मामले में भी जमानत आदेश मिलने और जमानतदारों के सत्यापन के बाद रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक-एक लाख रुपये के दो जमानतदार और व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत किए गए। सत्यापन पूरा होने के बाद देर शाम जेल रिहाई का आदेश पहुंचा और रात में उन्हें रिहा कर दिया गया।
लखनऊ पुलिस ने डाला था डेरा
अमिताभ ठाकुर के खिलाफ लखनऊ में भी धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज है। इसी कारण लखनऊ की अदालत से वारंट बी जारी हुआ था, लेकिन 30 जनवरी को उसे तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया।इसके बावजूद लखनऊ पुलिस देवरिया में लगातार नजर रखे हुए थी। कैदी वाहन भी तैनात था ताकि रिहाई के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में लिया जा सके। लेकिन रिहाई इतनी गोपनीय तरीके से हुई कि पुलिस टीम मौके तक नहीं पहुंच सकी।
मेडिकल कॉलेज से छुट्टी के बाद रिहाई
रिहाई से पहले अमिताभ ठाकुर को पेट में दर्द की शिकायत पर महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। तीन दिन इलाज और दवाओं के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CBI जांच की मांग
इस पूरे प्रकरण ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी और कथित मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दर्ज की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि:
गिरफ्तारी असंवैधानिक थी
हिरासत में शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना हुई
जेल में निजता का उल्लंघन हुआ
मीडिया से संवाद पर अवैध रोक लगाई गई
जान को खतरा है
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मामले की CBI या SIT से न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल
अमिताभ ठाकुर की रिहाई और उनके अचानक गायब होने की खबर ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। समर्थक इसे न्याय की जीत बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि:
क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करेगा?
क्या CBI जांच के आदेश होंगे?
और सबसे बड़ा सवाल — अमिताभ ठाकुर फिलहाल कहां हैं?
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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