अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला: राष्ट्रपति मादुरो और पत्नी गिरफ्तार, बेडरूम से घसीटकर निकाले जाने का दावा

अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी का दावा किया है। राजधानी काराकस समेत कई शहरों में धमाके, पूरे देश में इमरजेंसी।

अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला: राष्ट्रपति मादुरो और पत्नी गिरफ्तार, बेडरूम से घसीटकर निकाले जाने का दावा
काराकास बंदरगाह में विस्फोट से लगी आग।
  • वेनेजुएला की राजधानी काराकस समेत चार शहरों में अमेरिकी हमले
  • एक रात में कम से कम 7 धमाके, फाइटर जेट्स की आवाज से दहशत
  • डोनाल्ड ट्रम्प का दावा– राष्ट्रपति मादुरो और पत्नी गिरफ्तार
  • पूरे वेनेजुएला में इमरजेंसी लागू
  • रूस, क्यूबा समेत कई देशों ने हमले की निंदा की

वॉशिंगटन/काराकस। वेनेजुएला में शनिवार रात हालात पूरी तरह युद्ध जैसे हो गए, जब राजधानी काराकस समेत देश के चार बड़े शहरों में जोरदार धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। इन धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गयी। 

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हमले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सनसनीखेज दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी सेना ने पकड़ लिया है। उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा,“यह एक शानदार और सफल ऑपरेशन था। मादुरो और उनकी पत्नी अब हमारे कब्जे में हैं।”

 रात दो बजे शुरू हुआ अमेरिकी हमला

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे, अमेरिका ने वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला किया। इस दौरान मिलिट्री बेस, बंदरगाहों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।काराकस, ला ग्वाइरा समेत कई इलाकों में मिसाइल हमले किए गए, जिससे बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आये।

बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाले गये मादुरो!

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि स्पेशल डेल्टा फोर्स ने इस मिशन को अंजाम दिया। रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो और उनकी पत्नी को राष्ट्रपति आवास के बेडरूम से घसीटकर बाहर निकाला गया। बिना किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत हुए ऑपरेशन पूरा किया गया। दोनों को तुरंत वेनेजुएला से बाहर ले जाया गया। हालांकि, वेनेजुएला सरकार ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’ की मांग की है।

 पूरे देश में इमरजेंसी

अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला में राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया गया। सरकारी टीवी चैनलों पर लगातार जनता से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। रक्षा मंत्री व्लादिमीर पाद्रिनो लोपेज ने कहा, “यह देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है, सेना पूरी तरह सतर्क है।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

रूस: अमेरिकी कार्रवाई को “सशस्त्र हमला” बताया

क्यूबा: अमेरिका पर “स्टेट टेररिज्म” का आरोप

ब्रिटेन: पीएम कीर स्टार्मर बोले– हम हमले में शामिल नहीं

चीन: अपने नागरिकों को वेनेजुएला न जाने की सलाह

तेल बना हमले की सबसे बड़ी वजह?

विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला पर हमले के पीछे दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार एक अहम कारण है। मादुरो पहले ही आरोप लगा चुके थे कि अमेरिका उन्हें सत्ता से हटाना चाहता है, ताकि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल किया जा सके।

आगे क्या होगा वेनेजुएला में?

संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज कार्यभार संभाल सकती हैं

30 दिनों के भीतर नए चुनाव की संभावना

विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो और एडमंडो गोंजालेज फिर चर्चा में

हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अमेरिकी दखल से देश में गृहयुद्ध जैसे हालात भी बन सकते हैं।

वेनेजुएला में ये धमाके ऐसे समय हुए हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार, 29 दिसंबर को वेनेजुएला के खिलाफ जमीनी हमले की आशंका जताई। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला की ड्रग नौकाओं के डॉकिंग क्षेत्र पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दावे के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सोमवार के हमले की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। लेकिन गुरुवार, 1 जनवरी को निकोलस मादुरो ने कहा कि अमेरिकी सैन्य दबाव के हफ्तों बाद वे वॉशिंगटन के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

वेनेजुएला के पास तेल का भंडार
वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने दावा किया कि वॉशिंगटन से उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि वेनेजुएला के पास पृथ्वी पर तेल का सबसे बड़ा ज्ञात भंडार है। डोनल्ड ट्रंप बीते कई हफ्तों से वेनेजुएला में मादक पदार्थों के गिरोहों पर जमीनी हमले की धमकी दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ये हमले जल्द ही शुरू होंगे, जिसका पहला स्पष्ट उदाहरण सोमवार को देखने को मिला। अमेरिकी सेना ने सितंबर से कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में नौकाओं पर एक के बाद एक कई हमले किए हैं, जिनका निशाना वे लोग बने, जिन्हें अमेरिका मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले बता रहा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया है कि वह नौकाएं मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थीं, जिससे इस अभियान की वैधता पर बहस छिड़ गई है।

वेनेजुएला पर हमले के कारण

1. अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की सरकार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही थी और वहां से अमेरिका के खिलाफ साजिशें हो रही थीं।

2. अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक वेनेजुएला में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा था।

3. अमेरिका यह भी दावा करता है कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अवैध गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे।

अमेरिका ने तीसरी बार किसी राष्ट्रपति को पकड़ा
अमेरिका ने तीसरी बार किसी देश पर सैन्य कार्रवाई करके वहां के राष्ट्रपति या तानाशाह को पकड़ा है। इसके पहले 2003 में इराक और 1989 में पनामा में भी कुछ ऐसे ही ऑपरेशन चलाये गये थे। पनामा, 1989: अमेरिका ने लैटिन अमेरिकी देश पनामा पर हमला किया था। अमेरिका ने पनामा के तानाशाह मैनुअल नोरिएगा को सत्ता से हटाया था, जिन पर ड्रग तस्करी और अमेरीकी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। इस हमले में अमेरिकी सेना ने पनामा सिटी समेत कई इलाकों पर बमबारी की थी, जिसमें करीब 2 हजार लोगों की मौत हुई थी और नोरिएगा को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया था। 1992 में अमेरिकी अदालत ने नोरिएगा को 40 साल की सजा सुनाई।
इराक, 2003: अमेरिका ने इराक पर हमला किया। इसका मकसद इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाना था, जिन पर अमेरिका ने इराक के कई समुदायों पर हिंसा करने अल-कायदा का समर्थन करने और परमाणु हथियार रखने के आरोप लगाये थे। अमेरिकी सेना ने बगदाद समेत कई शहरों पर बमबारी की और सद्दाम की सरकार गिरा दी गई। कुछ महीनों बाद सद्दाम हुसैन को पकड़ लिया गया। इसके बाद सद्दाम पर इराक की अदालत में मुकदमा चलाया गया। इस दौरान इराक पर अमेरिकी सेना का कंट्रोल था। 2006 में इराकी अदालत ने सद्दाम हुसैन को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई।

1811 में वेनेजुएला ने स्पेन से स्वतंत्रता घोषित की

वेनेजुएला पर हुआ अमेरिका का यह हमला देश के इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक मोड़ बन गया है। वेनेजुएला के इतिहास की तो यहां हजारों सालों से कबीलाई लोग रह रहे थे। 1498 में क्रिस्टोफर कोलंबस ने वेनेजुएला तट की खोज की और 1522 में स्पेन ने यहां उपनिवेश शुरू किया। 1810 तक यहां स्पेनिश शासन चला। 18वीं सदी के अंत में यहां आजादी के लिए संघर्ष की शुरुआत हुई। 1811 में वेनेजुएला ने स्पेन से स्वतंत्रता घोषित की। इसके बाद 1821 में सिमोन बोलिवर के नेतृत्व में वेनेजुएला, कोलंबिया, पनामा और इक्वाडोर ने मिलकर पूर्ण स्वतंत्रता हासिल की। वहीं, 1830 में यह ग्रैन कोलंबिया से अलग होकर स्वतंत्र गणराज्य बना। 19वीं सदी में कैडिलो (सैन्य तानाशाहों) का शासन चला।

ऐसे कमजोर हुई अर्थव्यवस्था
20वीं सदी की शुरुआत में तेल की खोज ने वेनेजुएला को दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक बनाया। इससे वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया। यहां 1958 से लोकतंत्र की शुरुआत हुई, लेकिन 1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता में आने से 'बोलीवेरियन क्रांति' शुरू हो गई। सत्ता में आने के बाद ह्यूगो शावेज ने समाजवादी नीतियां अपनाईं, जिससे शुरुआत में गरीबी घटी। लेकिन तेल की गिरती कीमतों से यहां अर्थव्यवस्था चरमरा गई। साल 2013 में शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो सत्ता में आए। वेनेजुएला की बर्बादी ह्यूगो शावेज के शासन काल में ही शुरू हो गई। तेल की ऊंची कीमतों पर अत्यधिक खर्च, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण और कीमत नियंत्रण से अर्थव्यवस्था कमजोर हुई। अमेरिकी प्रतिबंधों ने तेल निर्यात को रोक दिया। इससे यहां की अर्थव्यवस्था और चरमरा गई और लाखों लोग पलायन कर गए।

जब शुरू हुई भुखमरी
निकोलस मादुरो के शासन काल में भुखमरी और लाखों लोगों का पलायन हुआ। 2018 और 2024 के विवादित चुनावों में मादुरो की जीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध माना गया। अमेरिका ने निकोलस मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए।

वेनेजुएला का इतिहास
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित एक देश है। वेनेज़ुएला बोलिवेरियन गणराज्य एक संघीय गणराज्य है। इसमें 23 राज्य, दो संघीय क्षेत्र, एक राजधानी है। इसमें महाद्वीपीय भूभाग और कैरेबियन सागर में कई द्वीप और छोटे द्वीप शामिल हैं । वेनेजुएला का कुल क्षेत्रफल लगभग 916,445 वर्ग किलोमीटर (353,841 वर्ग मील) है। इसकी राजधानी और सबसे बड़ा शहर कराकस है। वेनेजुएला की आबादी लगभग 28 से 29 मिलियन (2.8 से 2.9 करोड़) के बीच है।

अमेरिका और वेनेजुएला में दुश्मनी के कारण
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच दुश्मनी ह्यूगो शावेज के समाजवादी शासन से शुरू हुईं, जब अमेरिका ने इसे साम्राज्यवाद-विरोधी माना। ह्यूगो शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो के शासन काल में तनाव और बढ़ गया। अमेरिका ने मादूरो पर मानवाधिकार उल्लंघन, भ्रष्टाचार, विवादित चुनाव (2018, 2024) और नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सैंक्शंस लगाए, तेल निर्यात रोका और मादुरो को अवैध घोषित किया। वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तक सबके शासन काल में अमेरिका वेनेजुएला पर दबाव बनाता रहा है। यही वजह है कि वेनेजुएला अमेरिका के सामने कभी भी दोस्ती का हाथ नहीं बढ़ाया और उसके सामने हमेशा डट कर खड़ा रहा। जो अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप को खटकती है और वह वेनेजुएला पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए।