Advertisement

               HighLights

  • पूर्व मंत्री Yogendra Sao और पूर्व विधायक Nirmala Devi पुलिस हिरासत में
  • भूमि अधिग्रहण मुआवजे की मांग को लेकर 50 दिनों से चल रहा था आंदोलन
  • चट्टी बरियातू कोल माइंस 30 दिन तक ठप, ट्रांसपोर्टिंग भी रही प्रभावित
  • कांग्रेस ने प्रशासन पर लगाया गलत कार्रवाई का आरोप
  • केरेडारी में 50 दिनों से चल रहे आंदोलन पर प्रशासन की सख्ती

रांची (Threesocieties.com Desk)। झारखंड के Hazaribagh जिले के केरेडारी प्रखंड में चल रहे भूमि अधिग्रहण मुआवजा आंदोलन के बीच गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। पूर्व मंत्री Yogendra Sao और उनकी पत्नी, पूर्व विधायक Nirmala Devi को पुलिस ने धरना स्थल से हिरासत में ले लिया।

ADVERTISEMENT

यह भी पढ़ें: पूरे देश में SIR की तैयारी! अप्रैल 2026 से 22 राज्यों में मतदाता सूची का महाअभियान शुरू

दोनों नेता ऋत्विक कोल माइंस कार्यालय के समीप कर्बला स्थित धरनास्थल पर बैठे थे। पुलिस ने करीब साढ़े तीन बजे कार्रवाई करते हुए उन्हें केरेडारी थाना ले जाया। उनके साथ तीन महिलाओं और एक पुरुष को भी हिरासत में लिया गया।

2013 भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग

जानकारी के अनुसार, योगेंद्र साव 1 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे थे। उनका आरोप है कि उनकी जमीन और फैक्ट्री का अधिग्रहण किया गया, लेकिन 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत निर्धारित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं दिया गया।इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज हुआ और चट्टी बरियातू कोल माइंस का संचालन लगभग 30 दिनों तक बाधित रहा। कोयला ट्रांसपोर्टिंग भी करीब 20 दिनों तक बंद रही, जिससे उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ा।

माइंस चालू कराने पर उठाए सवाल

19 फरवरी को प्रशासनिक बल की मौजूदगी में माइंस और ट्रांसपोर्टिंग कार्य फिर से शुरू कराया गया। गुरुवार को दिल्ली से लौटकर धरना स्थल पहुंचे योगेंद्र साव ने माइंस दोबारा चालू कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त दंडाधिकारी के आदेश पर पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया। थाना परिसर में समर्थकों की भारी भीड़ जुटी रही। क्षेत्र में एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

कांग्रेस ने खोला मोर्चा, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए आरोप

इस घटनाक्रम के बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Keshav Mahto Kamlesh ने आरोप लगाया कि दोनों पूर्व विधायकों को गलत तरीके से हिरासत में लिया गया है। उन्होंने तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि ग्रामीणों को 2013 भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत मुआवजा और पुनर्वास सुविधा दी जानी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष Bandhu Tirkey ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया। वहीं, हाल ही में योगेंद्र साव और अंबा प्रसाद द्वारा दिल्ली में कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से मुलाकात कर केरेडारी क्षेत्र की कोल कंपनियों से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात भी सामने आई है।

कई दौर की वार्ता बेनतीजा

धरना के दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच कई बार वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। फिलहाल पुलिस कानूनी प्रक्रिया में जुटी है और पूरे इलाके की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस गिरफ्तारी के बाद हजारीबाग और आसपास के कोल बेल्ट इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य स्तर पर बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।