'वो शादी जो कभी नहीं होगी'... सिया का वायरल मैसेज बना नया सबूत? केतन हत्याकांड में सामने आई सीक्रेट चैट
पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सिया गोयल की कथित स्नैपचैट चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें 'शादी के टिकट' के लिए आधार कार्ड मांगने की बात कही गई है। पुलिस को दूसरा मोबाइल फोन भी मिला है और अब कोडवर्ड्स व इमोजी वाली चैट्स की फोरेंसिक जांच जारी है।
HighLights:
- सिया गोयल की कथित स्नैपचैट चैट सोशल मीडिया पर वायरल।
- चैट में दोस्त से आधार कार्ड की फोटो मांगने का दावा किया जा रहा है।
- केतन अग्रवाल हत्याकांड में सिया गोयल और चेतन चौधरी न्यायिक हिरासत में।
- पुलिस को मिला सिया का दूसरा मोबाइल फोन, फोरेंसिक जांच जारी।
- कोडवर्ड्स, निकनेम और इमोजी वाली चैट को डिकोड करने में जुटी जांच एजेंसियां।
पुणे (Threesocieties.com Desk): रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक नया और चर्चित मोड़ सामने आया है। मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर सिया की कथित स्नैपचैट चैट का स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस चैट की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों या पुलिस की ओर से नहीं की गई है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर सिया अपने एक दोस्त से आधार कार्ड के आगे और पीछे की तस्वीर भेजने को कहती दिखाई दे रही है। मैसेज में लिखा है, "आधार कार्ड का आगे और पीछे का फोटो भेज दे। शादी के टिकट के लिए, जो होने वाली नहीं है पर फिर भी भेज दे।" इस कथित बातचीत ने सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाओं और अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि पुलिस ने इस वायरल चैट को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
शुक्रवार को पुणे की अदालत ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने 18 जून को पुणे जिले के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले पर केतन अग्रवाल को चट्टान से धक्का देकर उसकी हत्या कर दी थी।पुलिस के अनुसार, केतन और सिया की सगाई हो चुकी थी और नवंबर में दोनों की शादी प्रस्तावित थी। जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन के बीच कथित रूप से करीबी संबंध थे और इसी वजह से हत्या की साजिश रची गई।
कोडवर्ड्स और इमोजी में छिपे हैं कई राज
सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से बरामद चैट्स में कोडेड भाषा, निकनेम और इमोजी का इस्तेमाल किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन चैट्स में हत्या की योजना से जुड़े अहम सुराग छिपे हो सकते हैं।सहायक लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि फोरेंसिक जांच में कई ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं जिनकी व्याख्या केवल आरोपी ही कर सकते हैं। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की मांग की थी ताकि उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा सके। हालांकि अदालत ने पुलिस की इस मांग को अस्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सिया का दूसरा मोबाइल भी बरामद
जांच के दौरान पुलिस को सिया गोयल का एक और मोबाइल फोन मिला है, जिसे फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है। इससे पहले जब्त किए गए मोबाइल से भी डेटा रिकवर किया जा चुका है और उसकी फोरेंसिक रिपोर्ट पुलिस को मिल चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि दूसरे मोबाइल से मिली जानकारी मामले की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
पासपोर्ट फेंकने और कथित प्लानिंग स्पॉट का पंचनामा
पुलिस ने अदालत को बताया कि मुंबई जाते समय सिया द्वारा कथित तौर पर केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फेंके जाने वाली जगह का पंचनामा किया गया है। इसके अलावा उस स्थान का भी निरीक्षण किया गया है जहां कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई थी।
गवाहों के बयान और पैसों के लेन-देन की जांच
पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार, घटना स्थल के आसपास मौजूद कई महत्वपूर्ण गवाह अब सामने आए हैं और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही जांच एजेंसियां केतन और सिया के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केतन द्वारा सिया को दिए गए पैसों और अन्य आर्थिक लेन-देन से जुड़े तथ्यों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा।
जांच के केंद्र में डिजिटल सबूत
फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच एजेंसियों का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल डेटा और कथित वायरल चैट्स पर है। आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों की जांच इस केस की दिशा और दशा तय कर सकती है। पुलिस का दावा है कि उसके पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि यह एक सुनियोजित हत्या थी, जबकि बचाव पक्ष अब भी आरोपों को परिस्थितिजन्य और अधूरी जांच पर आधारित बता रहा है।






