झारखंड: जमशेदपुर में सनसनी,आठ दिन बाद भी कैरव गांधी सुराग नहीं, VIP स्टाइल किडनैपिंग से हड़कंप
जमशेदपुर के प्रतिष्ठित कारोबारी देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण को 8 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को VIP स्टाइल किडनैपिंग और बिहार के कुख्यात अपराधी अजय सिंह गिरोह की भूमिका का शक।
- जमशेदपुर में दहशत, कारोबारी परिवार सदमे में
जमशेदपुर। झारखंड में जमशेदपुर के प्रतिष्ठित कारोबारी देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। इस हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड ने न सिर्फ कारोबारी जगत, बल्कि आम लोगों में भी गहरी चिंता और दहशत पैदा कर दी है।
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जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस को आशंका है कि यह मामला VIP स्टाइल किडनैपिंग का है, जिसमें अपराधियों ने खुद को पुलिस बताकर बेहद योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया।
जेल से गिरोह चला रहा है कुख्यात अजय सिंह?
सूत्रों के अनुसार, इस अपहरण के पीछे बिहार के औरंगाबाद के कुख्यात अपराधी अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिंह के गिरोह की भूमिका हो सकती है। अजय सिंह फिलहाल गया के चर्चित डॉक्टर दंपती (डॉ. पंकज गुप्ता और डॉ. शुभ्रा गुप्ता) अपहरण कांड में जेल में सजा काट रहा है। हालांकि, पुलिस को आशंका है कि वह जेल के भीतर से ही अपने नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है। जमशेदपुर पुलिस उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में जुटी है, ताकि इस अपहरण से जुड़े अहम राज़ खोले जा सकें।
पुलिस वर्दी, लाल-नीली बत्ती और नशीले इंजेक्शन—गिरोह का पुराना तरीका
अजय सिंह गिरोह का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है।
गिरोह के सदस्य अक्सर पुलिस की वर्दी पहनते हैं
नीली-लाल बत्ती लगी गाड़ियां इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते हैं
अपहरण के बाद पीड़ित को नशीला इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया जाता है
इससे पीड़ित को यह पता नहीं चल पाता कि उसे कहां रखा गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह गिरोह आमतौर पर 8 से 10 दिन बाद फिरौती के लिए संपर्क करता है और 5 करोड़ से 20 करोड़ रुपये तक की मांग करता है।
इन हाई-प्रोफाइल मामलों में आ चुका है नाम
2003: जयपुर में सुमेधा दुर्लभजी अपहरण कांड
2015: गया के डॉक्टर दंपती का सनसनीखेज अपहरण
इन मामलों ने देशभर में भारी सुर्खियां बटोरी थीं।
बुंडू टोल प्लाजा के बाद गायब हुई स्कॉर्पियो
पुलिस को सीसीटीवी फुटेज से अहम सुराग मिला है। अपहरण में इस्तेमाल की गई ‘पुलिस’ लिखी सफेद स्कॉर्पियो को आखिरी बार बुंडू टोल प्लाजा पर देखा गया था। इसके बाद से गाड़ी का कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस का अनुमान है कि अपराधी कैरव गांधी को लेकर लोहरदगा–गढ़वा रूट से होते हुए उत्तर प्रदेश या औरंगाबाद (बिहार) की ओर निकल गए होंगे।
जानिए पूरा घटनाक्रम
13 जनवरी: कदमा–सोनारी लिंक रोड से कैरव गांधी का अपहरण
कुछ देर बाद सरायकेला के कांदरबेड़ा इलाके में उनकी कार लावारिस हालत में बरामद
इसके बाद पिता देवांग गांधी को फिरौती के लिए कॉल आने की पुष्टि
STF और पुलिस की कई टीमें तैनात
फिलहाल जमशेदपुर पुलिस और एसटीएफ की कई टीमें इस केस में लगी हुई हैं। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन व तकनीकी साक्ष्यके आधार पर अजय सिंह गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गयी है।
सवाल यही है:
क्या पुलिस समय रहते कैरव गांधी को सुरक्षित बरामद कर पाएगी, या यह मामला देश के बड़े अपहरण कांडों में शामिल हो जाएगा?
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