रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। ताजा मामले में साइबर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर गढ़वा के एक सेवानिवृत्त सरकारी डॉक्टर से 38 लाख 62 हजार 982 रुपये की बड़ी ठगी कर ली। हालांकि मामले में कार्रवाई करते हुए झारखंड सीआईडी की साइबर अपराध पुलिस ने पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला और कदमा इलाके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
डॉक्टर को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर बनाया शिकार
पुलिस के अनुसार, गढ़वा के एक सेवानिवृत्त सरकारी चिकित्सक ने 27 फरवरी को साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।शिकायत में उन्होंने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें फोन कर खुद को केंद्रीय प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताया। इसके बाद उन्होंने डॉक्टर को गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी और कहा कि उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। डर और दबाव में आकर डॉक्टर ने साइबर अपराधियों के बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में 38,62,982 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
मोबाइल और बैंक खातों के विश्लेषण से पुलिस पहुंची आरोपियों तक
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड सीआईडी के साइबर अपराध थाने ने जांच शुरू की। पुलिस ने मोबाइल फोन डेटा, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस टीम ने पूर्वी सिंहभूम जिले में छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
रोहित कुमार जैन – निवासी घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम
संजीव कुमार मिश्रा – निवासी कदमा, जमशेदपुर
लोकेश महतो – पूर्वी सिंहभूम
पुलिस ने इनके पास से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया गया था।
गिरोह के अन्य सदस्य भी रडार पर
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह साइबर ठगी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर रही है, जिनमें शामिल हैं: बैंक म्यूल खाते उपलब्ध कराने वाले लोग, ठगी की रकम के लाभार्थी व गिरोह के हैंडलर। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
पुलिस की आम लोगों से अपील
झारखंड पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि: कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती। किसी को “डिजिटल अरेस्ट” करने का अधिकार भी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर डराता या पैसे मांगता है तो तुरंत सावधान हो जाएं। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।