14 GPF नंबर, SP का एक खाता और 16 करोड़ की निकासी! बोकारो में मास्टर डेटा से हुआ बड़ा खेल

झारखंड के बोकारो में बड़ा ट्रेजरी घोटाला सामने आया है। SP के खाते से 15.98 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी, 14 GPF नंबरों का इस्तेमाल और 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि बदलकर सेवा अवधि बढ़ाने का खुलासा महालेखाकार की जांच में हुआ है।

14 GPF नंबर, SP का एक खाता और 16 करोड़ की निकासी! बोकारो में मास्टर डेटा से हुआ बड़ा खेल
डिलीट किया गया मास्टर डेटा।
  • बोकारो ट्रेजरी में 16 करोड़ का घोटाला
  • SP के खाते से फर्जी निकासी
  • 2100+ कर्मियों की जन्मतिथि बदली

बोकारो (Threesocieties.com Desk): झारखंड के बोकारो जिले से सरकारी सिस्टम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और डेटा हेरफेर का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी कर्मचारियों के संवेदनशील ‘इंप्लाइज मास्टर डेटा’ में छेड़छाड़ कर न केवल करीब 16 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई, बल्कि 2100 से अधिक कर्मचारियों की जन्मतिथि बदलकर उनकी सेवानिवृत्ति की अवधि भी बढ़ा दी गई।

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महालेखाकार (AG) की जांच रिपोर्ट ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। रिपोर्ट में इसे “अत्यंत गंभीर” और “असाधारण घटना” बताते हुए राज्य सरकार से उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की गई है।

SP के खाते से 15.98 करोड़ का ‘वित्तीय खेल’

जांच के अनुसार, बोकारो एसपी के नाम से संचालित एक बैंक खाते का अवैध रूप से इस्तेमाल कर 15.98 करोड़ रुपये की निकासी की गई। यह निकासी मई 2017 से नवंबर 2025 के बीच कुल 271 ट्रांजेक्शन के माध्यम से की गई। इन ट्रांजेक्शन में—

यात्रा भत्ता (TA) के नाम पर: 12.48 करोड़ रुपये
GST भुगतान के नाम पर: 2.71 करोड़ रुपये
वन कार्य (Forest Work) के नाम पर: 63 लाख रुपये

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस एक खाते को 14 अलग-अलग GPF नंबरों से जोड़ दिया गया था, जिनमें से 13 नंबर अन्य कर्मचारियों के थे। सुराग मिटाने के लिए जनवरी 2026 में इस खाते को मास्टर डेटा बेस से ही डिलीट कर दिया गया। 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि बदली गई। महालेखाकार ने जनवरी 2023 और जनवरी 2026 के डेटा की तुलना की, जिसमें बड़ा खुलासा हुआ।

कुल 2175 कर्मचारियों की जन्मतिथि बदली गई। इनमें— 1072 मामलों में उम्र को 1 दिन से लेकर 40 साल तक पीछे कर दिया गया, ताकि कर्मचारी लंबे समय तक सेवा में बने रह सकें। वहीं, 1103 मामलों में जन्मतिथि को आगे बढ़ाया गया। यह हेरफेर सीधे तौर पर सरकारी सेवा अवधि बढ़ाने और सेवानिवृत्ति टालने की मंशा को दर्शाता है। ज्वाइनिंग डेट में भी 5037 मामलों में छेड़छाड़ की गयी।  जांच केवल जन्मतिथि तक सीमित नहीं रही।

रिपोर्ट के अनुसार— 5037 कर्मचारियों की नौकरी ज्वाइन करने की तारीख में बदलाव किया गया। 2215 मामलों में योगदान तिथि को 1 दिन से लेकर 38 साल तक पीछे कर दिया गया। इसके अलावा, 572 कर्मचारियों के मामले ऐसे मिले जिनमें जन्मतिथि और योगदान तिथि—दोनों में बदलाव किया गया। यह दर्शाता है कि यह गड़बड़ी संगठित तरीके से लंबे समय से चल रही थी।

IFMS सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) में सुरक्षित रखा जाता है। इसमें शामिल होते हैं— जन्मतिथि, नियुक्ति तिथि, प्रोन्नति, वेतन, सेवा रिकॉर्ड व GPF विवरण। इतने बड़े पैमाने पर डेटा में बदलाव यह साबित करता है कि सिस्टम के भीतर से ही गंभीर स्तर पर छेड़छाड़ की गई है। इससे न केवल भ्रष्टाचार की पोल खुलती है, बल्कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े होते हैं।

उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

महालेखाकार ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए राज्य सरकार को पत्र भेजा है। अब इस मामले में उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान और कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो यह झारखंड के सबसे बड़े ट्रेजरी घोटालों में से एक साबित हो सकता है।