झारखंड में 10 करोड़ का वेतन घोटाला! बोकारो से ASI गिरफ्तार, AG ऑडिट की ‘क्लीन चिट’ पर भी उठे सवाल

झारखंड में 10 करोड़ के अवैध वेतन निकासी घोटाले में बोकारो से ASI अशोक कुमार भंडारी गिरफ्तार। CID की SIT जांच में AG ऑडिट टीम की ‘क्लीन चिट’ पर भी सवाल, चाईबासा में भी 26 लाख की फर्जी निकासी उजागर।

झारखंड में 10 करोड़ का वेतन घोटाला! बोकारो से ASI गिरफ्तार, AG ऑडिट की ‘क्लीन चिट’ पर भी उठे सवाल
एएसआई अशोक कुमार भंडारी गिरफ्तार ।
  • झारखंड में 10 करोड़ का वेतन घोटाला!
  • CID की SIT ने अवैध वेतन निकासी मामले में तीसरी गिरफ्तारी की
  • महिला ऑडिट सदस्य की शिकायत से खुला करोड़ों का फर्जीवाड़ा

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में अवैध वेतन निकासी और सरकारी राशि के बड़े घोटाले की परतें अब तेजी से खुल रही हैं। CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने बोकारो एसपी कार्यालय के अकाउंट सेक्शन में प्रतिनियुक्त एएसआई अशोक कुमार भंडारी को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि उसके खाते के जरिए 1.11 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की गई।

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सीआईडी ने आरोपी को रांची स्थित विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया। यह गिरफ्तारी पूरे मामले में अब तक की तीसरी बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है।

लेखापाल कौशल पांडेय का करीबी था ASI अशोक भंडारी

जांच में पता चला है कि एएसआई अशोक कुमार भंडारी, पहले से गिरफ्तार मुख्य लेखापाल कौशल कुमार पांडेय का करीबी सहयोगी था। सीआईडी को जांच में दोनों के बीच लगभग 50 लाख रुपये के ट्रांसफर का सबूत मिला है। भंडारी पर आरोप है कि उसने गलत तरीके से कमान निर्गत कर टीए बिल की फर्जी निकासी की। वर्ष 2020 से अब तक उसके बैंक खाते के माध्यम से 1.11 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निकाली गई।

अब तक तीन गिरफ्तारियां, 10 करोड़ की अवैध निकासी का खुलासा

बोकारो में 7 अप्रैल को दर्ज प्राथमिकी के बाद CID ने केस टेकओवर कर जांच शुरू की थी। जांच में अब तक करीब 10 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हुई है। इस मामले में अब तक— मुख्य लेखापाल कौशल कुमार पांडेय, गृह रक्षा वाहिनी के जवान सतीश कुमार सिंह व  एएसआई अशोक कुमार भंडारी की गिरफ्तारी हो चुकी है। सतीश कुमार सिंह के खाते में भी 1.06 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन मिले थे, जिनमें से 43 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं।

AG ऑडिट टीम ने दी थी क्लीन चिट, महिला सदस्य ने कर दिया भंडाफोड़

इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू महालेखाकार (AG) कार्यालय की भूमिका पर उठ रहे सवाल हैं। फरवरी 2026 में AG की एक ऑडिट टीम बोकारो एसपी कार्यालय का ऑडिट करने पहुंची थी। टीम में शामिल एक महिला सदस्य ने वित्तीय अनियमितता पकड़ ली थी, लेकिन पूरी टीम ने कार्यालय को ‘क्लीन चिट’ दे दी। हालांकि रांची लौटने के बाद उसी महिला ऑडिटर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को गड़बड़ी की शिकायत कर दी। इसी शिकायत के बाद पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ। अब सवाल उठ रहे हैं कि वर्षों से चल रहे इस फर्जीवाड़े को पहले क्यों नहीं पकड़ा गया।

चाईबासा में भी खुला 26 लाख का फर्जी भुगतान

CID ने पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा में दर्ज अवैध वेतन निकासी के केस को भी टेकओवर कर लिया है। यहां एसपी कार्यालय के DDO कोड के माध्यम से कई खातों में 26 लाख 21 हजार 717 रुपये की अवैध निकासी सामने आई है। जांच में सिपाही देवनारायण मुर्मू की संलिप्तता पाई गई है। आरोप है कि उसने सरकारी दस्तावेजों और कंप्यूटर डेटा में छेड़छाड़ कर फर्जी भुगतान कराया।

चार बैंक खातों के जरिए हुआ फर्जी लेन-देन

जांच में जिन खातों का खुलासा हुआ है, उनमें शामिल हैं— SBI पोटका, पूर्वी सिंहभूम, SBI टैगोर हिल, मोरहाबादी, SBI चाईबासाव 
SBI बहालाडा, मयूरभंज (ओडिशा)। इन खातों के माध्यम से 26 लाख से अधिक की सरकारी राशि का गबन किया गया।

SIT का बड़ा दावा—“एक रुपया भी गलत गया तो कार्रवाई होगी”

आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में गठित SIT अब हर बैंक ट्रांजेक्शन, कैश निकासी, ट्रांसफर और लाभार्थियों की गहन जांच कर रही है।

SIT का साफ कहना है— “अगर एक रुपया भी किसी को अवैध तरीके से मिला है, तो जांच वहां तक पहुंचेगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”