धनबाद में बाउंड्री वॉल बना ‘टकराव की दीवार’! वकीलों के पेन डाउन के खिलाफ स्वास्थ्यकर्मी सड़क पर

धनबाद सदर अस्पताल में बाउंड्री वॉल विवाद गहराया। वकीलों की पेन डाउन हड़ताल के विरोध में स्वास्थ्यकर्मी भी धरने पर उतरे। ओपीडी बंद, कोर्ट और अस्पताल दोनों ठप, मरीज परेशान।

धनबाद में बाउंड्री वॉल बना ‘टकराव की दीवार’! वकीलों के पेन डाउन के खिलाफ स्वास्थ्यकर्मी सड़क पर
आमने-सामने स्वास्थ्यकर्मी व अधिवक्ता।
  • कोर्ट से अस्पताल तक कामकाज ठप
  • अधिवक्ता और स्वास्थ्यकर्मियों में हिंसक झड़प, पथराव 

धनबाद (Threesocieties.com Desk)। कोयला राजधानी धनबाद के सदर अस्पताल परिसर में बाउंड्री वॉल निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर टकराव में तब्दील हो गया है। एक ओर जहां बाउंड्री वॉल तोड़ने की मांग को लेकर धनबाद बार एसोसिएशन के अधिवक्ता पिछले तीन दिनों से अनिश्चितकालीन पेन डाउन हड़ताल पर हैं, वहीं दूसरी ओर वकीलों के इस आंदोलन के विरोध में स्वास्थ्यकर्मी, डॉक्टर और कर्मचारी भी धरने पर बैठ गये हैं।

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ओपीडी रहा बंद, मरीज परेशान

इस दोहरे आंदोलन का सीधा असर आम जनता पर पड़ा है। धनबाद सिविल कोर्ट और सदर अस्पताल—दोनों ही संस्थान लगभग ठप हो चुके हैं।स्वास्थ्यकर्मियों के आंदोलन के कारण शनिवार को सदर अस्पताल की ओपीडी पूरी तरह बंद रही। सुबह से ही अस्पताल परिसर में कामकाज ठप नजर आया। जांच, परामर्श और दवा वितरण सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे सैकड़ों मरीज बिना इलाज के लौटने को मजबूर हो गये।हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों ने यह स्पष्ट किया कि आपातकालीन सेवाएं बाधित नहीं की गईं, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। इसके बावजूद ओपीडी बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों में भारी असमंजस की स्थिति बनी रही।हीरापुर से इलाज कराने पहुंचे विकास कुमार ने बताया कि पैर में तेज दर्द के बावजूद ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं मिला, मजबूरी में उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा।

 वकील बनाम स्वास्थ्यकर्मी: आमने-सामने

विवाद की जड़ सदर अस्पताल परिसर स्थित पंचकर्म भवन के समीप बनाई गई बाउंड्री वॉल है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस दीवार से उनका वर्षों पुराना पारंपरिक आवागमन मार्ग बंद हो गया है, जिससे कोर्ट आने-जाने में परेशानी हो रही है। वहीं स्वास्थ्यकर्मियों का तर्क है कि बाउंड्री वॉल अस्पताल की सुरक्षा, मरीजों की निजता और कार्यस्थल की गरिमा के लिए बेहद जरूरी है। स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि अधिवक्ताओं को पहले ही छह फीट जमीन आवंटित की जा चुकी है, इसके बावजूद दीवार तोड़कर रास्ता मांगना सुरक्षा मानकों के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

झारखंड राज्य चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन, ऑल झारखंड मेडिकल एसोसिएशन, झांसा और आईएमए (IMA) समेत कई संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया है। स्वास्थ्यकर्मियों ने कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज कांड के बाद अस्पताल सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अस्पताल परिसरों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था कमजोर की जाती है, तो अस्पताल संचालन पर ही सवाल खड़े होंगे।

 मौन जुलूस, लेकिन संदेश साफ

स्वास्थ्यकर्मियों ने अनोखे और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराते हुए सदर अस्पताल से रणधीर वर्मा चौक तक मौन जुलूस निकाला।बड़ी संख्या में डॉक्टर, नर्स, सहिया और कर्मचारी इसमें शामिल हुए। धरना स्थल पर सिविल सर्जन, अस्पताल उपाधीक्षक और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।

पुलिस तैनात, स्थिति तनावपूर्ण

विवादित स्थल के आसपास भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन के अनुसार स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन तनाव बना हुआ है। शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार द्वारा अस्थायी रास्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, पर स्वास्थ्यकर्मियों के तीखे विरोध के बाद यह समाधान अधर में लटक गया है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

एक ओर कानून के रखवाले अधिवक्ता, दूसरी ओर जीवन रक्षक स्वास्थ्यकर्मी—दोनों ही अपने-अपने तर्कों पर अड़े हुए हैं। अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अस्पताल की सुरक्षा से समझौता किए बिना आवागमन की समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए। यदि जल्द सहमति नहीं बनी, तो यह विवाद और गहरा सकता है, जिसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

बाउंड्री वॉल के समीप स्वास्थ्य विभाग बना रहा छज्जा

विवादित स्थल के पास एव स्वास्थ्य विभाग की ओर से सजा का निर्माण कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि यहां पर उनके कई रिकॉर्ड है, इसलिए यहां शेड की जरूरत है। दोनों जगह पर पुलिस बल की तैनाती है।

 पारंपरिक रास्ता बहाल हो: अधिवक्ता

वहीं धनबाद बार एसोसिएशन भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। अधिवक्ताओं का कहना है कि बाउंड्री वॉल बनने से उनका वर्षों पुराना आवागमन मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में भारी दिक्कतें हो रही हैं।रास्ता देना उनका अधिकार है और प्रशासन को इसका समाधान निकालना चाहिए। बार एसोसिएशन का धरना प्रदर्शन भी लगातार जारी है।

एसएसपी के आश्वासन पर भी नहीं बनी बात

 एसएसपी प्रभात कुमार के साथ अधिवक्ताओं की शुक्रवार को हुई वार्ता में अस्थायी रास्ता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद हड़ताल खत्म होने की उम्मीद जगी थी। हालांकि स्वास्थ्यकर्मियों के तीखे विरोध के बाद यह समाधान फिलहाल अधर में लटक गया है। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती वर्तमान में सदर अस्पताल परिसर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। एक तरफ कानून के रखवाले अधिवक्ता हैं तो दूसरी ओर जीवन रक्षक स्वास्थ्यकर्मी, दोनों ही अपने-अपने तर्कों के साथ डटे हुए हैं।

अधिवक्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों का बढ़ा विवाद:  एक-दूसरे पर की पत्थरबाजी, तीन अधिवक्ता घायल

धनबाद बार एसोसिएशन व पंचकर्म भवन के बीच रातों रात स्वास्थ्य विभाग द्वारा पक्की दीवार खड़ी कर दिए जाने तथा अधिवक्ताओं के वाहन पार्किंग की व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं द्वारा किए जा रहे कार्य बहिष्कार के आंदोलन ने शनिवार को हिंसक रूप ले लिया। अधिवक्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी एवं महासचिव जितेंद्र कुमार ने बताया कि दोपहर करीब ढाई से तीन बजे के बीच अस्पताल परिसर की ओर से अधिवक्ताओं के ऊपर ईंट पत्थर चलाए गए जिसमें तीन अधिवक्ता घायल हुए। सूचना पाकर तुरंत थानेदार दल बल के साथ बार परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया अधिवक्ताओं ने पत्थरबाजी की फुटेज भी पुलिस को उपलब्ध कराई है। उन्होंने अधिवक्ताओं को भरोसा दिया कि अराजक तत्वों पर कार्रवाई की जायेगी। दूसरी तरफ से एक वीडियों में अधिवक्ता भी दिवार तोड़ने की कोशिश करते और पत्थर चलाते हुए देखे जा रहे हैं। दोनों तरफ से एक-दूसरे खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। 

बीसीसीआइ व जेएसबीसी के मेंबर धनबाद पहुंचे
अधिवक्ताओं का हड़ताल तीसरे दिन लगातार जारी रहा, जिस कारण लोक अदालत समेत न्यायिक कार्यवाही पर व्यापक असर पड़ा. अधिवक्ताओं के समर्थन में एडिशनल डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य प्रशांत कुमार सिंह , झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य मनोज कुमार सिंह, मृत्युंजय सिंह,परमेश्वर मंडल ,रसीदी धनबाद पहुंचे और कहा कि अगर अस्पताल प्रबंधन व प्रशासन जल्द अधिवक्ताओं की मांग को पूरा नहीं करता तो यह आंदोलन राज्यस्तरीय आंदोलन का रूप लेगा।

एसोसिएशन परिसर में गुरुवार को अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी एवं महासचिव जितेन्द्र कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।अस्पताल प्रशासन तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर कई सवाल खड़े किए।  एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी व महासचिव जितेंद्र कुमार ने कहा कि सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा डॉ संजीव कुमार तथा लिपिक संजूद कुमार सहाय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों के द्वारा सहिया साथियों को डरा धमकाकर धरना प्रदर्शन के लिए बुलाया गया।

एसडीओ, डीएसपी के आश्वासन पर नहीं हुआ अमल
पेन डाउन रखने के कारण गुरुवार व शुक्रवार को धनबाद एसडीओ, डीएसपी सीसीआर व मजिस्ट्रेट आर एन ठाकुर, धनबाद थाना प्रभारी अधिवक्ताओं के बीच पहुंचकर आश्वासन दिया था कि शुक्रवार, शनिवाार के सुबह दीवाल हटाकर वहां गेट बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा तथा उपायुक्त के वापस लौटने के बाद पार्किंग की समस्या का भी जल्द समाधान कर दिया जाएगा। जिसके बाद अध्यक्ष व महासचिव ने घोषणा की थी कि जिला प्रशासन अपने आश्वासन को पूरा करते हुए शुक्रवार को दीवाल तोड़ देगा तो अधिवक्ता भी काम पर वापस लौट जाएंगे परंतु जिला प्रशासन अपने आश्वासन से पलट गया और दीवाल नहीं हटाई। अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी एवं महासचिव जितेंद्र कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब तक अधिवक्ताओं की मांग पूरी नहीं होती तब तक यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।