धनबाद नगर निगम चुनाव-2026: भाजपा में सियासी उबाल, मेयर कैंडिडेट को ले महामंथन आज

धनबाद मेयर चुनाव-2026 को लेकर भाजपा में महामंथन तेज। 26 जनवरी को रायशुमारी, एक दर्जन दावेदार मैदान में। पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल की सक्रिय सदस्यता पर सस्पेंस, गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती।

धनबाद नगर निगम चुनाव-2026: भाजपा में सियासी उबाल, मेयर कैंडिडेट को ले महामंथन आज
रायशुमारी, रेस में एक दर्जन चेहरे।
  • एक दर्जन चेहरे रेस में
  • पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल की सदस्यता पर सस्पेंस**

धनबाद।(Threesocieties.com Desk)। धनबाद नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। मेयर पद की ‘जंग’ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर मंथन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इसी कड़ी में 26 जनवरी की शाम जिला भाजपा कार्यालय में मेयर पद के संभावित उम्मीदवारों के लिए रायशुमारी का आयोजन किया गया है।

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इस अहम बैठक में  पार्टी कार्यकर्ताओं की राय, दावेदारों का जनाधार और जातीय–स्थानीय समीकरणों का गहन आकलन किया जायेगा। रायशुमारी के बाद रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जायेगी, जिसके आधार पर अंतिम नाम पर मुहर लगेगी।रायशुमारी के बाद रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाएगी और अंतिम फैसला वहीं से होगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा इस बार एकजुट होकर मैदान में उतरेगी या फिर अंदरूनी कलह इतिहास दोहरायेगी?

कद्दावर नेताओं की मौजूदगी, हर दावेदार की होगी परख

भाजपा सूत्रों के मुताबिक रायशुमारी के दौरान पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी, धनबाद विधायक राज सिन्हा, पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रवींद्र राय और पूर्व बोकारो विधायक विरांची नारायण एक-एक कर सभी दावेदारों के बायोडाटा, संगठनात्मक पकड़ और जमीनी प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे।

 इन नामों पर टिकी हैं सबकी निगाहें

मेयर की कुर्सी के लिए भाजपा में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त सामने आ चुकी है। संभावित नामों में—

सावित्री देवी

संजीव अग्रवाल

रूपेश सिन्हा

प्रवीर प्रियदर्शी

शांतनु चंद्रा उर्फ बबलू पासवान

मुकेश पांडेय

राजकुमार अग्रवाल

भृगुनाथ भगत

रमेश राही

अरुण राय

नित्यानंद मंडल

शामिल बताये जा रहे हैं। पार्टी इन सभी नामों पर जातीय संतुलन, संगठनात्मक अनुभव और चुनावी क्षमता के आधार पर गंभीरता से विचार कर रही है।

पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल पर सबसे ज्यादा सस्पेंस, खुद चुनाव लड़ने का किया एलान

इस पूरी कवायद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को लेकर है। अंदरखाने खबर है कि उनका नाम फिलहाल भाजपा की सक्रिय सदस्य सूची में नहीं है। पार्टी के संगठनात्मक नियमों के अनुसार, सक्रिय सदस्य न होने की स्थिति में दावेदारी पेश करना तकनीकी रूप से मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है— क्या चंद्रशेखर अग्रवाल इस बार रेस से बाहर होंगे?  या फिर पार्टी उनके लिए कोई विशेष रास्ता निकालेगी? श्री अग्रवाल ने रविवार को प्रेस कांफ्रेस कर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है।

भाजपा में गुटबाजी बनी बड़ी चुनौती

भले ही नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय हों, लेकिन भाजपा के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ चुकी है।

भाजपा में गुटबाजी, सहमति बनाना बड़ी चुनौती

धनबाद भाजपा में इस समय गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है।

विधायक राज सिन्हा और चंद्रशेखर अग्रवाल के बीच टकराव जगजाहिर है।

सांसद ढुलू महतो अपनी पत्नी सावित्री देवी के नाम पर विचार चाहते हैं।

पूर्व सांसद पीएन सिंह अपने बेटे प्रवीर प्रियदर्शी को आगे बढ़ाने के प्रयास में हैं।

इन समीकरणों के बीच पार्टी के लिए एक नाम पर सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं दिख रहा।

पुराना अनुभव, नई चुनौती

2015 के नगर निगम चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार चयन में एक राय नहीं बना पाई थी, जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा था। अब 2026 में फिर वही स्थिति बनती दिख रही है।

पूर्व सांसद पीएन सिंह के बेटे प्रवीर प्रियर्दशी तैयार
धनबाद में भाजपा के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल का चुनाव लड़ने की घोषणा करचुके हैं। सवाल यह है कि क्या पार्टी उनके नाम पर एकजुट हो पायेगी। वहीं, धनबाद के पूर्व सांसद पीएन सिंह अपने छोटे बेटे प्रवीर प्रियदर्शी को मेयर पद के लिए आगे बढ़ाना चाहते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पीएन सिंह का टिकट काटकर ढुलू महतो को उम्मीदवार बनाया था, जिसे पीएन सिंह ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया। अब वे चाहते हैं कि पार्टी के फैसले का सम्मान करने के बदले उनके बेटे के नाम पर विचार किया जाना चाहिए।

राज सिन्हा से ढुलू महतो व शेखर अग्रवाल राजनीतिक मतभेद?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस समय धनबाद भाजपा में एकजुटता का घोर अभाव दिख रहा है। गुटबाजी और आपसी कटुता इस कदर बढ़ चुकी है कि कई नेता एक-दूसरे के साथ सहज नहीं हैं। विधायक राज सिन्हा और चंद्रशेखर अग्रवाल के बीच का टकराव जगजाहिर है। राज सिन्हा और सांसद ढुलू महतो के रिश्ते भी तनावपूर्ण बताए जाते हैं। वहीं, झरिया की विधायक रागिनी सिंह के भी राज सिन्हा और ढुलू महतो से संबंध सहज नहीं है।