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धनबाद। कोल इंडिया ने 2025-26 में एक अरब टन प्रोडक्शन का टारेगाट हासिल करने की योजना बनाई है। कोल मिनिस्टरी ने ग्रीन फील्ड योजना के तहत कोयला कंपनियों को काम करने का निर्देश ने जारी किया है।

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कोल माइनिंग से को लेकर डीजल और विस्फोटकों के दाम समेत लागत में हर तरह की मूल्य वृद्धि से दिक्कतें आ रही हैं। कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल का मानना है कि कोल इंडिया अभी तक बढ़िया मुनाफा हासिल करने में सफल रही है, लेकिन कंपनी की कुछ इकाइयां ही मुनाफा कमा रही हैं। इस्टर्न और WCL व BCCL आदि को वित्तीय चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
कोल प्रोडक्शन को बढ़ाने के टारगेट जोर
सीआएल की ओर से मौजूदा माइंस का विस्तार करने और नई प्रोजेक्ट शुरू कर क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। 52 माइनिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। इससे फेजवाइज तरीके से प्रोडक्शन में हर साल 37.8 करोड़ टन का बढ़ोतरी होगा। इस योजना पर बीसीसीएल, सीसीएल, इसीएल सहित अन्य कोयला उत्पादन करने वाली कंपनी विचार कर रही है। इस पर कोल इंडिया चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल अपने निदेशक मंडल के साथ निगरानी कर रहे हैं ताकि तय समय सीमा के अंदर खनन काम काम शुरू हो सके।

एक अरब टन का टारगेट हासिल करना चुनौतीपूर्ण
52 में 13 नई प्रोजेक्ट है। अन्य मौजूदा परियोजनाओं का विस्तार किया गया है। इन प्रोजेक्ट से वित्त वर्ष 2025-26 में 102 करोड़ टन प्रोडक्शन करने में मदद मिलेगी। एक अरब टन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य हासिल करने में सबसे अहम महानदी, साउथ इस्टर्न और सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड का उल्लेखनीय योगदान होगा।

स्टीाल सेक्टर में कोयले की मांग बढ़ी
बीसीसीएल, सीसीएल, इसीएल पर कोयला मंत्रालय की विशेष नजर है। बीसीसीएल कोकिंग कोल उत्पादन करने वाली कंपनी है। उच्च कोटि का कोल प्रोडक्शन करती है। इस कोयले की मांग स्टील सेक्टर में अधिक है। इस लिहाज से आने वाले समय में स्टील सेक्टर में कोकिंग कोल की मांग बढ़ते देख कोल मिनिस्टरी इसके प्रोडक्शन पर जोर दे रही है।