बिहार टेंडर घोटाला: ठेकेदार रिशुश्री गिरफ्तार, 68 करोड़ की संपत्ति जब्त; IAS कनेक्शन से मचा हड़कंप

बिहार में सरकारी टेंडर घोटाले में ठेकेदार रिशुश्री गिरफ्तार। छापेमारी में करोड़ों के जेवर, 61 जमीन के डीड, नकदी और डिजिटल सबूत मिले। IAS कनेक्शन और 68 करोड़ की संपत्ति जांच के केंद्र में।

बिहार टेंडर घोटाला: ठेकेदार रिशुश्री गिरफ्तार, 68 करोड़ की संपत्ति जब्त; IAS कनेक्शन से मचा हड़कंप
चर्चित ठेकेदार रिशुश्री (फाइल फोटो)।

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार में सरकारी टेंडर घोटाले की जांच अब बड़े खुलासों की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी, कमीशनखोरी और प्रभावशाली नेटवर्क के आरोपों के बीच चर्चित ठेकेदार रिशुश्री को Special Vigilance Unit (SVU) ने गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद गुरुवार तड़के उसकी गिरफ्तारी की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई।

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इससे पहले बुधवार को पटना के मीठापुर स्थित उसके आवास पर हुई छापेमारी में जांच एजेंसियों को करीब दो करोड़ रुपये के जेवरात, 61 जमीन के डीड, नकदी, डिजिटल दस्तावेज और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक ठेकेदार तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी विभागों में फैले एक बड़े नेटवर्क की ओर संकेत कर रहा है।

सरकारी टेंडरों में ‘कमीशन नेटवर्क’ का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार रिशुश्री पर आरोप है कि वह सरकारी विभागों में टेंडर मैनेज करने के लिए अफसरों और कर्मचारियों को कमीशन देता था। जांच के दायरे में नगर विकास विभाग, बुडको, भवन निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मनचाही कंपनियों को टेंडर दिलाने के बदले आठ से नौ प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था और यह रकम नीचे से ऊपर तक कई स्तरों पर पहुंचाई जाती थी।

अपनी कंपनियों के जरिए भी लेता था सरकारी काम

जांच में सामने आया है कि रिशुश्री की छह से सात कंपनियां सक्रिय थीं, जिनके माध्यम से वह खुद भी सरकारी परियोजनाओं के ठेके हासिल करता था। आरोप यह भी है कि कई परियोजनाओं में फर्जी बिल, बढ़ी हुई लागत और भुगतान में हेराफेरी कर सरकारी राशि निकालने का खेल चल रहा था। अधिकारियों का दावा है कि पूरे सिस्टम को संचालित करने के लिए छोटे कर्मचारियों से लेकर उच्च स्तर तक संपर्क और नेटवर्क तैयार किया गया था।

IAS अधिकारियों की विदेश यात्रा का एंगल जांच में

इस केस का सबसे सनसनीखेज पहलू कुछ IAS अधिकारियों और उनके परिवारों की कथित विदेश यात्राओं से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी टेंडरों के बदले कुछ अधिकारियों को विदेश यात्राएं, होटल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।रिपोर्टों के अनुसार यूरोप और ऑस्ट्रेलिया यात्राओं के खर्च उठाने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेनदेन और ट्रैवल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।

ED पहले ही कर चुकी है बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले से इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। जून और नवंबर में ED ने अहमदाबाद, सूरत, दिल्ली और गुरुग्राम सहित कई शहरों में एक साथ छापेमारी की थी। इन छापों के दौरान नकदी, संपत्ति दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और टेंडर से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए गए थे।

68 करोड़ की संपत्ति पहले ही हो चुकी अटैच

ED ने अगस्त में बड़ी कार्रवाई करते हुए रिशुश्री और उसके परिवार से जुड़ी लगभग 68.09 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इतनी बड़ी संपत्ति का स्रोत क्या था और किन-किन परियोजनाओं से धन जुटाया गया।

आगे और बड़े नाम आने की संभावना

जांच एजेंसियां फिलहाल डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग रिकॉर्ड, विदेशी यात्राओं और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।सरकारी टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार का यह मामला अब केवल एक ठेकेदार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके तार कई प्रभावशाली लोगों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।