बिहार कांग्रेस में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का नया फॉर्मूला! ब्राह्मण-यादव टॉप पर, भूमिहार ने राजपूतों को पछाड़ा
बिहार कांग्रेस की नई जिला अध्यक्ष सूची में ब्राह्मण और यादव का दबदबा, भूमिहार राजपूतों पर भारी। 53 जिलाध्यक्षों में जातीय संतुलन और चुनावी रणनीति का बड़ा संदेश।
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। प्रदेश अध्यक्ष Rajesh Ram ने 53 जिलाध्यक्षों की नई सूची जारी की है, जिसमें 43 नए चेहरों को मौका दिया गया है। यह बदलाव सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि साफ तौर पर जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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बिहार कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की सूची
कांग्रेस संगठन जिला जिलाध्यक्ष
अररिया मासूम रजा
अरवल मोहम्मद कैफ
औरंगाबाद आनंद शंकर सिंह
बांका जितेंद्र सिंह
बेगूसराय शिव प्रकाश गरीब दास
भागलपुर प्रवीण कुशवाहा
भोजपुर श्रीधर तिवारी
बक्सर पंकज उपाध्याय
दरभंगा ग्रामीण मिथिलेश चौधरी
दरभंगा शहरी जमाल हसन
शेरघाटी बोधगया संतोष कुमार
गया रजनीश कुमार
गोपालगंज ओमप्रकाश गर्ग
जहानाबाद संजीव कुमार
जमुई धर्मेंद्र गौतम
कैमूर राधेश्याम कुशवाहा
कटिहार ग्रामीण सुनील यादव
कटिहार शहरी संजय सिंह
खगड़िया चंदन यादव
किशनगंज शहाबुल अख्तर
लखीसराय अमरेश अनीष
मधेपुरा संतोष सौरभ
मधुबनी पूर्वी नलिनी रंजन झा
मधुबनी पश्चिमी मीना कुशवाहा
मुंगेर राजेश मिश्रा
कांटी कृपाशंकर शाही
मुजफ्फरपुर अरविंद कुमार मुकुल
बिहारशरीफ ओमैर खान
नालंदा विवेक सिन्हा
नवादा प्रभाकर झा
बेतिया राकेश यादव
बगहा नरेश राम
पटना ग्रामीण 01 चंदन कुमार
पटना ग्रामीण 02 गुरजीत सिंह
पटना शहरी कुमार आशीष
पूर्णिया शहरी कुमार आदित्य
पूर्णिया ग्रामीण अफरोज आलम
मोतिहारी अखिलेश दयाल
गोविंदगंज शशि भूषण राय
रोहतास जयप्रकाश पांडे
सहरसा मुकेश झा
समस्तीपुर ग्रामीण सिद्धार्थ क्षत्रिय
समस्तीपुर शहरी अनिता राम
छपरा शंकर चौधरी
सोनपुर सुधीर राय
शेखपुरा आनंदी कुमार
शिवहर अफरोज आलम
सीतामढ़ी अमित टुन्ना
सिवान सुशील कुमार
महाराजगंज जवाहर भाई
सुपौल अनुपम सिंह
वैशाली ग्रामीण रंजीत पंडित
वैशाली शहरी संजय मिश्रा
किस जाति का कितना दबदबा?
नई सूची में सबसे ज्यादा ब्राह्मण और यादव (10-10) जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा—
ब्राह्मण – 10
यादव – 10
मुस्लिम – 7
दलित – 7
भूमिहार – 7
राजपूत – 5
कुशवाहा – 3
कायस्थ – 2
सिख – 1
अन्य – 1
साफ है कि कांग्रेस ने सवर्ण + OBC + अल्पसंख्यक का संतुलन बनाने की कोशिश की है।
भूमिहार बनाम राजपूत: बदला समीकरण
इस बार की सूची में भूमिहार (7) ने राजपूत (5) पर बढ़त बना ली है। इसे पार्टी के अंदर सवर्ण समीकरण में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब नए सामाजिक गठजोड़ के जरिए खुद को फिर से खड़ा करना चाहती है।
यादव फैक्टर क्यों अहम?
2023 की जातीय गणना के अनुसार बिहार में यादवों की आबादी सबसे अधिक (14.26%) है। अब तक Lalu Prasad Yadav की पार्टी RJD इस वर्ग की राजनीति का केंद्र रही है। ऐसे में कांग्रेस का 10 यादव जिलाध्यक्ष बनाना, RJD के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश माना जा रहा है।
दलित-मुस्लिम पर भी फोकस
7 दलित जिलाध्यक्ष
7 मुस्लिम जिलाध्यक्ष
यह संकेत देता है कि कांग्रेस अपने पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) + दलित समीकरण को मजबूत करना चाहती है।
EBC की अनदेखी?
जहां एक तरफ कई वर्गों को प्रतिनिधित्व मिला, वहीं अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को अपेक्षाकृत कम जगह मिली है। जबकि बिहार में EBC की आबादी करीब 36% है, ऐसे में यह कांग्रेस के लिए एक कमजोर कड़ी बन सकती है।
40 से बढ़ाकर 53 जिले: बड़ा संगठनात्मक बदलाव
कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर— संगठनात्मक जिलों की संख्या 40 से बढ़ाकर 53 की गई है। 43 नए चेहरे शामिल किये गये हैं।10 पुराने नेताओं को दोबारा मौका मिला है। यह दिखाता है कि पार्टी ग्राउंड लेवल पर नई टीम के साथ रीबूट मोड में है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
यह पूरी सूची साफ संकेत देती है कि कांग्रेस— जातीय संतुलन साध रही है। नए चेहरों को आगे ला रही है। आगामी चुनावों के लिए सामाजिक इंजीनियरिंग पर काम कर रही है लेकिन बड़ा सवाल यही है— क्या यह नई रणनीति बिहार में कांग्रेस को फिर से मजबूत बना पाएगी?






