तीन तलाक बिल पर विपक्षी दल ने गिनाई खामियां

नई दिल्ली. लोकसभा में पास हो चुका तीन तलाक बिल. कांग्रेस ने लोकसभा में इस बिल का समर्थन तो किया, लेकिन उसमें कुछ खामियां भी गिनाई थीं. कांग्रेस चाहती थी कि बिल में एक बार में तीन तलाक कहने को 'अपराध' बताने वाले क्लॉज को हटा दिया जाए, दरअसल इस विधेयक में एक बार में तीन तलाक को अवैध करार दिया गया है और इसे दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखते हुए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. साथ ही इसे गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है. कांग्रेस का मानना है कि शौहर का जेल जाना तय होगा और ऐसे में इसका असर पीड़ित महिला को मिलने वाले मुआवजे पर पड़ सकता है. सुलह की कोशिशों को भी इससे झटका लग सकता है. पढ़ें: बोकारो में एसबीआइ की लॉकर काट करोड़ों की चोरी में साहेबगंज के हसन चिकना गैग का हाथ पिछले सप्ताह लोकसभा में पारित हुए तीन तलाक बिल में 'अपराध' वाले क्लॉज का कांग्रेस ने विरोध करते हुए इसे संसदीय समिति के पास भेजे जाने की मांग की थी. हालांकि जब बिल के लिए वोटिंग करने की बारी आई, तो उसने किसी सांसद या धर्मनिरपेक्ष संगठनों द्वारा सुझाए गए संशोधनों का समर्थन नहीं किया. मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है. ऐसे में अन्य विपक्षी दल बिल के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं. विपक्षी दलों के स्टैंड देखते हुए पार्टी का फैसला प्रभावित हो सकता है. अगर समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या लेफ्ट पार्टियां सरकार पर इस बिल को संसदीय समिति के पास भेजने का दबाव डालते हैं तो विपक्षी एकता के नाम पर कांग्रेस उनके साथ आ सकती है.