- खट्टर दूसरी बार हरियाणा के सीएम बने
- दुष्यंत पहली बार स्टेट कैबिनेट में
चंडीगढ़:बीजेपी के मनोहर लाल खट्टर दिवाली के दिन राजधानी चंडीगढ़ में हरियणा के सीएम पद की शपथ ली.जननायक जनता पार्टी के दुष्यंत चौटाला ने डेप्युटी सीएम की शपथ ली.करनाल के एमएलए खट्टर दूसरी बार राज्य के सीएम बने हैं. गवर्नर सत्यनारायण आर्य ने मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला को राज्यपाल पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई.
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डिप्टी सीएम पद की शपथ लेते दुष्यंत चौटाला.[/caption]
पीएम नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री और डेप्युटी सीएम को शुभकामनाएं दी हैं.पीएम ने ट्वीट किया, 'मनोहर लाल खट्टर और दुष्यंत चौटाला को हरियाणा के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई. दोनों को हरियाणा के लोगों की आकांक्षाओंं को पूरा करने के लिए शुभकामनाएं.'शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा,हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पंजाब के एक्स सीएम प्रकाश सिंह बादल व में दुष्यंत के पिता अजय चौटाला के अलावा एक्स सीएम सह कांग्रेस लीडर सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा भी मौजूद थे.
बीजेपी को मिली 40 सीटें
90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा विधानसभा में बीजेपी को सिर्फ 40 सीटों पर ही जीत हासिल हुई है. बीजेपी को बहुमत के लिएछह एमएलए की कमी थी. बीजेपी 10 सीटोे जीतने वाली जेजेपी के समर्थन के बाद गठबंधन की सरकार बनायी है. इससे पहले हरियाणा जनहित कांग्रेस चीफ व एमएलए गोपाल कांडा ने सात अन्य निर्दलीय एमएलए के साथ बीजेपी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का ऐलान किया था. गीतिका शर्मा सुसाइड केस के आरोपों का सामना कर रहे कांडा के समर्थन लेने को लेकर बीजेपी की किरकिरी होने लगी. बीजेपी ने कांडा को किनारा कर जेजेपी के समर्थन के सरकार बनाने का फैसला किया.
उल्लेखनीय है कि चुनाव से पहले 10 माह पुरानी दुष्यंत की जननायक जनता पार्टी को पार्टी को विपक्षी दलों ने हल्के में लिया था., जननायक जनता पार्टी को लोग 'बच्चा पार्टी' कहते थे. उल्लेखनीय है कि इंडिनयन नेशनल लोकदल से अलग होकर दुष्यंत चौटला ने जननायक जनता पार्टी बनायी थी. वह जेजेपी के अध्यक्ष है. दुष्यंत ने विधानसभा चुनाव में जोरदार प्रचार किया और 10 सीटें हासिल करने में सफल ररहे. सूबे में दुष्यंत चौटाला को जाट राजनीति के नये नायक लीडर के तौर पर देखा जाने लगा है. दुष्यंत की तुलना उनके परदादा ताऊ देवीलाल से भी की जाने लही है. दुष्यंत 10 माह पुरानी अपनी पार्टी जेजेपी के बदौलत देवीलाल की विरासत के वारिस बनते नजर आ रहे हैं.
एक पिता के लिए इससे बेहतर क्या होगा: अजय चौटाला
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक सवाल के जवाब में उपस्थित दुष्यंत के पिता अजय चौटाला ने मीडिया के एक सवाल के जबाव में कहा कि एक पिता के लिए इससे अच्छा अवसर क्या होगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस कुछ भी कह सकती है, लेकिन यह सरकार पूरे पांच साल स्थिरता से हरियाणा के विकास के लिए काम करेगी. इससे अच्छी कोई दिवाली नहीं हो सकती.
दुष्यंत ने प्रकाश सिंह बादल के पैर छूये

ष्यंत चौटाला ने शपथ लेने से पहले मंच पर मौजूद अकाली दल चीफ व पंजाब के पूर्व एक्स सीएम प्रकाश सिंह के बादल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. बादल ने दुष्यंत को गले लगा लिया. मंच पर पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा और दुष्यंत के पिता अजय चौटाला भी मौजूद थे.उल्लेखनीय है कि प्रकाश सिंह बादल और दुष्यंत चौटाला के दादा ओमप्रकाश चौटाला की गहरी दोस्ती रही है. कहा जा रहा है कि प्रकाश सिंह बादल की दुष्यंत की पार्टी जेजेपी को बीजेपी के खेमे में लाने में अहम भूमिका रही है.
मनोहर लाल खट्टर की दूसरी पारी

वर्ष 2014 में 26 अक्टूबर को मनोहरलाल खट्टर ने हरियाणा के 10वें सीएम के रूप में शपथ लिया था. खट्टर गैर जाट समुदाय से आने वाले खट्टरहरियाणा के पहले सीएम हैं. संघ से जुड़े मनोहर लाल खट्टर वर्ष 1994 में बीजेपी में शामिल हुए थे. खट्टर को हरियाणा बीजेपी में संगठन महामंत्री बनाया गया था. खट्टर ने धीरे-धीरे हरियाणा की राजनीति में अपनी पकड़ बनाई व वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को को बहुमत मिली को उन्हें सीएम बनाया गया मनोहर लाल खट्टर वर्ष 2014 में करनाल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में थे और जीत हासिल की थी.मनोहर लाल खट्टर ने पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज, रोहतक से अपना हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण की है. वह दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री पूरी करने के लिए दिल्ली चले गये.खट्टर अपने कॉलेज के दिनों में दिल्ली के सदर बाजार के पास एक दुकान भी चलाया करते थे.
मनोहर लाल खट्टर का जन्म निंदाना गांव में 1954 में हुआ था. उनके दादा भगवानदास खट्टर बंटवारे के वक्त पाकिस्तान से आये थे. भारत आने के बाद उनके दादा और पिता हरबंसलाल खट्टर शुरूआती दिनों में मजदूरी करनी पड़ी. बाद में उन्होंने गांव में ही दुकान खोली. इसके बाद उनके पिता पड़ोस के बनियानी गांव में आकर जमीन ली और खेती करने लगे. मनोहर लाल ने यहां से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की.
सब्जी बेचते थे खट्टर
खट्टर जब 10वीं क्लासमें थे तो सुबह खेत से सब्जी तोड़ने का जिम्मा संभाल लिया था. वह रोजाना साइकिल पर सब्जी लादकर रोहतक मंडी आते और फिर वहां से गांव लौटकर स्कूल जाते. हाईस्कूल के बाद खट्टर डॉक्टरी की पढ़ाई करना चाहते थे, पर पिता चाहते थे कि वे खेती या बिजनेस करें. वे नहीं माने और दिल्ली अपने रिश्तेदारों के यहां चले गये. यहां रहते-रहते उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई का मोह छोड़ दिया.दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर ग्रेजुएशन किया.
कपड़े की दुकान भी चलाई, इमरजेंसी में संघ से जुड़े
खट्टर आजीविका के लिए रिश्तेदारों की कपड़े की दुकान पर काम सीखा और खुद की दुकान खोल ली.खट्टर नेअपनी दुकान की कमाई से बहन की शादी की और दो भाइयों को अपने पास बुला लिया. वह वर्ष 1976 में इमरजेंसी के दौरान संघ से जुड़े व स्वयंसेवक बन गये. खट्टर वे अटल बिहारी वाजपेयी से इतने प्रभावित थे कि शादी न करने का मन बना लिया. वह 1980 में संघ के प्रचारक बन गये. संघ से 1994 में खट्टर को बीजेपी में भेजा गया. बीजेपी ने 2014 के चुनाव में करनाल विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए खट्टर को उतारा. खट्टर 80 हजार से भी अदिक वोटों से जीते व बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गये व सीएम बने.
'किंगमेकर' दुष्यंत चौटाला,पिता-दादा के जेल जाने के बाद राजनीतिक विरासत संभाली

दुष्यंत चौटाला वर्ष1988 की तीन अप्रैल को देवीलाल परिवार में जन्में. ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला और पुत्रवधु नैना चौटाला के बेटे दुष्यंत की प्रारंभिक शिक्षा हिसार के हाई स्कूल से हुई. दुष्यंत ने हिमाचल प्रदेश से 10वीं की पढ़ाई पूरी की. वह आगे की पढ़ाई करने के लिए यूएसए चले गये. वहं से 2011 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में बीएससी किया. कोर्ट ने वर्ष 2013 में दुष्यंत के दादा ओमप्रकाश चौटाला और पिता अजय चौटाला को शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा सुनाई. सजा के बाद पिता और दादा का जेल जाने के बाद दुष्यंत का राजनीतिक सफर शुरू हुआ.
लोकसभा में 2014 में थे सबसे युवा एमपी, चाचा से विवाद के बाद जेजेपी बनाई
इनेलो ने दुष्यंत को 2014 लोकसभा चुनाव में हिसार लोकसभा सीट से उतारा. दुष्यंत को कुलदीप बिश्नोई को हराकर 26 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के एमपी बनकर लोकसभा पहुंचे. दुष्यंत ने साल 2017 में 18 अप्रैल को आईजी परमजीत अहलावत की बेटी मेघना से शादी की. चौटाला फैमिली में वर्ष 2018 में की इतनी कलह बढ़ी कि इनेलो ने दुष्यंत, दिग्विजय और अजय चौटाला को पार्टी से निकाल दिया. दुष्यंत ने 2018 की नौ दिसंबर को जननायक जनता पार्टी की स्थापना की. दुष्यंत 2019 लोकसभा चुनाव में हिसार से मैदान में उतरे लेकिन पराजित हो गये. जेजेपी गठन के 10 माह बाद हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में वह 10 सीटें जीतने में सफल रहे.
'किंगमेकर' दुष्यंत चौटाला को हरियाणा में ताऊ देवीलाल की विरासत के संभावित उत्तराधिकारी माने जाने लगा है. जेजेपी ने दुष्यंत चौटाला के दादा ओमप्रकाश चौटाला और चाचा अभय चौटाला के नेतृत्व वाली मूल पार्टी इनेलो को विघानसभा चुनाव में कड़ी पटखनी दी है. इनेलो ने विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट पर जीती है. दुष्यंत जाट समुदाय में लीडर बनकर उभरे हैं. पिछले साल इनेलो में दुष्यंत के पिता अजय चौटाला और चाचा अभय चौटाला के बीच विवदा के बाद पार्टी टूट गयी थी. अजय और अभय एक्स सीएम ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र हैं. अजय और उनके पिता इनेलो के कार्यकाल में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में सजा काट रहे हैं. लोग दुष्यंत को जोखिम उठाने वाला व्यक्ति मानते हैं. दुष्यंत ने इनेलो के उत्तराधिकार को लेकर अपने चाचा अभय के साथ कानूनी लड़ाई में पड़ने की जगह नई पार्टी बनाने का विकल्प चुना था.
जेजेपी ने किया जनादेश का अपमान: हुड्डा
चंडीगढ़:हरियाणा के एक्स सीएम सीनीयर कांग्रेस लीडर भूपिंदर सिंह हुड्डा ने बीजेपी को जेजेपी के समर्थन कर गर्वमेंटमें शामिल होने को को जनादेश का अपमान बताया है. हुड्डा ने कहा है कि यह गठबंधन 'वोट किसी का, सपॉर्ट किसी को' के आधार पर बना है. यह सरकार स्वार्थ पर आधारित है. जेजेपी ने जनादेश का अपमान किया है. हमारी पार्टी में हुए बदलावों के बाद हमारे पास कम समय बचा था. अगर ये बदलाव पहले हो गये होते तो नतीजे इनसे अलग होते.