धनबाद: रांची हाईकोर्ट ने बहुचर्चित विनोद सिंह मर्डर केस में सजायाफ्ता झरिया के बीजेपी एमएलए संजीव सिंह के चाचा व बाहुबली रामधीर सिंह की बेल पिटीशन बुधवार को खारिज कर दी है. हाइकोर्ट ने रांची होटवार जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे रामधीर सिंह को बड़ा झटका दिया है. हाइकोर्ट में जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व कैलाश प्रसाद देव की डबल बेंच में मामले की सुनवाई थी. अभियोजन पक्ष से एडवोकेट एसके मुरारी व बचाव पक्ष से अनिल कुमार सिन्हा ने पैरवी.
बचा पक्ष की ओर से हाइकोर्ट में कहा गया कि रामधीर सिनीयर सिटीजन हो गये हैं. लोअर कोर्ट से जल्बाजी में सजा सुना दी गयी. रामधीर कई रोग से पीड़ित हैं. सीआइडी के अफसरों को गवाही नहीं करायी गयी. अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि 17 साल बाद लोअर कोर्ट ने केस में फैसला सुनाया. आरोपी के खिलाफ पहले से भी अन्य आपराधिक मामले चल रहे हैं. आरोपी पहले भी कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे.सजा के समय भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे. सीआइडी ने पुलिस जांच को सही ठहराया था. सीआइडी ने मामले में अलग से चार्जशीट दाखिल नहीं की थी. मामले में पहले से भी कोर्ट का निर्णय है. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद हाइकोर्ट ने रामधीर की बेल पिटीशन खारिज कर दी.हाइकोर्ट से बेल पिटीशन खारिज होने के बाद रामधीर को बड़ा झटका लगा है.
रामधीर के भतीजे झरिया के बीजेपी एमएलए संजीव सिंह खुद अपने चचेरे भाई एक्स डिप्टी मेयर नीरज समेत चार लोगों की मर्डर केस में 26 माह से धनबाद जेल में हैं.
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संजीव सिंह (फाइल फोटो).[/caption]
रामधीर के पुत्र शशि सिंह भी कोल किंग सुरेश सिंह मर्डर केस में लगभग आठ साल से फरार चल रहे हैं. सुरेश सिंह मर्डर केस का भी ट्रायल चल रहा है.
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शशि सिंह (फाइल फोटो).[/caption]
सुरेश सिंह की मर्डर के बाद सिंह मैंशन के खिलाफ कानून लड़ाई में रामायण निवास काफी एक्टिव है. सुरेश सिंह के बेटे अजय सिंह उर्फ पिंटू कोर्ट पक्ष रखने के लिए फेमस एडवोकेट व सभी सबूत उपलब्ध करा रहे हैं. सुरेश सिंह की मर्डर के बाद कानूनी लड़ाई का जिम्मा पिंटू ने ही संभाल रखा है. पहले यह जिम्मा सुरेश सिंह के पास था. सुरेश सिंह की मर्डर के बाद उनके बड़े बेटे अजय सिंह ने अपनी जिम्मेवारी बखूबी निभायी और कानूनी लड़ाई में अपने पारिवारिक दुशमन सिंह मैंशन को मात दी.पिंटू ने अपनी सक्रियता से अपने मामा विनोद सिंह मर्डर केस में रामधीर सिंह को सजा दिलवाने मेंसफल रहे.
पहली बार किसी केस में मैंशन के मेंबर को सजा हुई तो वह बिनोद मर्डर केस ही था. अजय उर्फ पिंटू मीडिया व चर्चा से दूर रहकर अपना बिजनस संभालने के साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं. अपने पिता की मर्डर केस में वह काफी टेक्नीकल तरीके से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.लंदन से ग्रेजुेशन पास आउट पिंटू को कानून में भी बेहतर पकड़ है. पिंटू की एक्टिविटी से सिंह मैंशन को बड़ा झटका तब लगा था जब बिनोद मर्डर केस में रामधीर को उम्र कैद की सजा हुई थी. रामधीर को बड़ी उम्मीद थी कि हाइकोर्ट से बेल मिल जायेगी. पिंटू ने अपना कानूनी पक्ष एडवोकेट के माध्यम से मजबूत तरीके से हाइकोर्ट में रखवाकर मैंशन को दूसरा झटका दिया है. पिंटू अभी अपने पिता सुरेश सिंह मर्डर केस में भी बेहतर ढ़ंग से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं.
फ्लैश बैक
कोल कारोबारी बिनोद सिंह को कतरास बाजार में वर्ष 1998 में गोलियों से भून दिया गया था. बिनोद सिंह के बड़े भाई सकलदेव सिंह व जीजा कोल किंग सुरेश सिंह थे. बिनोद मर्डर केस में बच्चा सिंह, रामधीर व राजीव रंजन समेत अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करायी गयी थी. धनबाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए वर्ष 2015 की 18 अप्रैल को यूपी के बलिया जिला परिषद अध्यक्ष रामधीर सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनायी. रामधीर सिंह कोर्ट में सजा सुनाये जाने के समय हाजिर नहीं थे. कोर्ट ने मामले में रामधीर के अग्रज एक्स मिनिस्टर बच्चा सिंह को बरी कर दिया था. सजा सुनाया जाने के 22 महीने रामधीर ने वर्ष 2017 की 20 फरवरी को धनबाद कोर्ट में सरेंडर किया. धनबाद कोर्ट से रामधीर को हजारीबाग सेंट्रल जेल फिर रांची होटवार सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया.