- GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से नौकरी लेने का आरोप
अयोध्या/लखनऊ।( Threesocieties.com Desk): शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच उपजे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में हलचल तेज हो गई है। अयोध्या में तैनात GST विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में दिया गया इस्तीफा अब गंभीर विवादों में घिर गया है।
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जहां एक ओर प्रशांत सिंह ने इसे आत्मसम्मान और सिद्धांतों पर लिया गया निर्णय बताया, वहीं दूसरी ओर उनके ही भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने इस इस्तीफे को नैतिकता नहीं बल्कि मजबूरी का नाटक करार दिया है।
भाई का बड़ा आरोप: फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से पाई नौकरी
डॉ. विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग (Disability) प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी। उनका दावा है कि इस फर्जीवाड़े की शिकायत वर्ष 2021 से लंबित है और अब जांच तेज होने के डर से प्रशांत सिंह ने इस्तीफा देकर खुद को कानूनी कार्रवाई, सैलरी रिकवरी और संभावित जेल से बचाने की कोशिश की है। विश्वजीत सिंह के अनुसार, “इस्तीफा कोई नैतिक कदम नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जांच से पहले मामला ठंडे बस्ते में चला जाए।”
2021 से चल रही शिकायत, मेडिकल बोर्ड के सामने नहीं हुए पेश
भाई ने बताया कि अगस्त और अक्टूबर 2021 में मंडलीय चिकित्सा परिषद द्वारा प्रशांत सिंह को मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के लिए दो बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वे दोनों ही बार गैरहाजिर रहे।आरोप है कि जिस आंखों की बीमारी के आधार पर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया गया, वह 50 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति में चिकित्सकीय रूप से लगभग असंभव मानी जाती है।
CMO मऊ ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मऊ ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार गुप्ता के अनुसार, शिकायत के आधार पर पूरी रिपोर्ट अयोध्या मंडलायुक्त को भेज दी गई है। यदि प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो:
कानूनी कार्रवाई
अब तक मिली सैलरी और लाभ की वसूली
विभागीय दंड
जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
इस्तीफे की पृष्ठभूमि: शंकराचार्य विवाद
प्रशांत कुमार सिंह ने अपने दो पन्नों के इस्तीफे में कहा था कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी से वे मानसिक रूप से आहत हैं। उन्होंने कहा था, “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं, जिस प्रदेश से वेतन मिलता है, उसके मुख्यमंत्री का अपमान मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने इस्तीफे को पूरी तरह स्वेच्छिक बताया और भविष्य में सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।इस दौरान डिप्टी कमिश्नर ने अपनी पत्नी को फोन किया और फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने अपनी पत्नी से रोते हुए कहा कि मैने इस्तीफा दे दिया है।
पहले PCS अधिकारी, अब GST डिप्टी कमिश्नर
इससे पहले बरेली के PCS अधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी शंकराचार्य विवाद और UGC नियमों को लेकर इस्तीफा दिया था, जिन्हें बाद में निलंबित कर दिया गया। इन लगातार इस्तीफों ने यूपी की नौकरशाही और राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।