पैर के फ्रैक्चर से शुरू हुआ इलाज, ICU और ₹16 लाख के बिल के बाद मौत; राज अस्पताल रांची पर उठे सवाल

रांची के राज अस्पताल में 18 वर्षीय युवक की मौत के बाद विवाद गहरा गया है। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और 16 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल वसूलने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पैर के फ्रैक्चर से शुरू हुआ इलाज, ICU और ₹16 लाख के बिल के बाद मौत; राज अस्पताल रांची पर उठे सवाल
अस्पताल में बिलखते परिजन।

     HighLights:

  • पैर में चोट के इलाज के लिए भर्ती युवक की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा
  • परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और 16 लाख रुपये का बिल थमाने का आरोप लगाया
  • मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की
  • जांच टीम अस्पताल के इलाज, दस्तावेजों और बिलिंग प्रक्रिया की जांच करेगी
  • विधायक सीता सोरेन ने अस्पताल को "लूट का अड्डा" बताते हुए लाइसेंस रद्द करने की मांग की

रांची (Threesocieties.com Desk): राजधानी रांची के मेन रोड स्थित राज अस्पताल में भर्ती एक युवक की मौत के बाद विवाद गहरा गया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही तथा लाखों रुपये का बिल थोपने का आरोप लगाया है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है और मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है।

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उपायुक्त के निर्देश पर सिविल सर्जन कार्यालय ने चिकित्सकीय जांच के लिए दो चिकित्सकों को नामित किया है। इनमें डॉ. एस अली और डॉ. राजीव रंजन शामिल हैं। वहीं जिला प्रशासन की ओर से दो अधिकारियों को भी जांच दल में शामिल किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि जांच टीम ने शनिवार से मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच दल अस्पताल में मरीज के उपचार से जुड़े दस्तावेज, इलाज की प्रक्रिया, अस्पताल प्रबंधन की भूमिका और परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच करेगा। जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट सीधे उपायुक्त को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

16 लाख के बिल पर भड़का विवाद

गौरतलब है कि दो दिन पहले अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था। परिजनों का आरोप है कि युवक को पैर में चोट लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसके पैर में संक्रमण फैल गया और हालत लगातार बिगड़ती चली गई। परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर करीब 16 लाख रुपये का बिल थमा दिया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत

वहीं अस्पताल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज राजू कुमार रंजन को 24 मई को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। उसके सिर में गंभीर चोट, रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर और दोनों फेफड़ों में गंभीर चोटें थीं।अस्पताल के अनुसार मरीज की जान बचाने के लिए चिकित्सकों ने पिछले चार दिनों से परिजनों को पैर काटने यानी एम्प्यूटेशन की सलाह दी थी, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। अस्पताल प्रबंधन ने यह भी कहा कि सरकारी जांच टीम को इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं और जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है।

सीता सोरेन ने कहा- यह इलाज नहीं, डकैती है

मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। भाजपा विधायक सीता सोरेन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अस्पताल प्रबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, "रांची का राज अस्पताल या लूट का अड्डा? पैर के मामूली फ्रैक्चर के इलाज के नाम पर 16 से 22 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल और अंत में 18 साल के मासूम राजू की मौत। यह इलाज नहीं बल्कि सीधे तौर पर डकैती है।" उन्होंने आगे कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी और संवेदनहीनता चरम पर पहुंच चुकी है। सिर्फ जांच के दिखावे से काम नहीं चलेगा, बल्कि अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की कार्रवाई

फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की जांच शुरू हो चुकी है और अब सभी की निगाहें जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि मरीज के इलाज में कहीं कोई लापरवाही हुई थी या नहीं और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जाएगी या नहीं।