Mamata Banerjee का बड़ा पतन: ‘स्ट्रीट फाइटर’ दीदी को BJP ने दी ऐतिहासिक मात, बंगाल की सत्ता हाथ से फिसली

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में ममता बनर्जी की करारी हार, BJP की ऐतिहासिक जीत। जानिए कैसे ‘स्ट्रीट फाइटर’ दीदी का सियासी ग्राफ गिरा और किन वजहों से TMC को बड़ा झटका लगा।

Mamata Banerjee का बड़ा पतन: ‘स्ट्रीट फाइटर’ दीदी को BJP ने दी ऐतिहासिक मात, बंगाल की सत्ता हाथ से फिसली
ममता बनर्जी(फाइल फोटो)।

नई दिल्ली/कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों से ‘सड़क की लड़ाई’ यानी जनआंदोलन ही सत्ता का रास्ता तय करता रहा है। इसी परंपरा से उभरकर सत्ता तक पहुंचीं Mamata Banerjee अब अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट का सामना कर रही हैं।

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2026 के विधानसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party (BJP) ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने बंगाल की राजनीति की तस्वीर ही बदल दी है। रुझानों में BJP ने बहुमत के आंकड़े को पार करते हुए 207 सीटों पर जीता हासिल की है।, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) 80 में सिमट गयी है।

पहली बार ‘डबल इंजन’ का रास्ता साफ

यह पहली बार होगा जब दिल्ली और कोलकाता में एक ही पार्टी की सरकार बनने की स्थिति बनी है। इससे केंद्र-राज्य राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।

 नंदीग्राम से झटका, Suvendu Adhikari की जीत

इस चुनाव में सबसे बड़ा प्रतीकात्मक झटका नंदीग्राम से लगा, जहां ममता बनर्जी को उनके पूर्व सहयोगी और अब BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने मात दी। नंदीग्राम, सिंगूर और भंगार जैसे TMC के गढ़ भी इस बार ढह गए।

दिल्ली तक होगा असर,ममता बनर्जी का कद भी घटेगा

पश्चिम बंगाल में हार का असर दिल्ली तक होगा और ममता बनर्जी का कद भी घटेगा। 2024 से पहले और उसके बाद तक बीच-बीच ऐसी मांग उठती थी कि ममता बनर्जी को ही INDIA अलायंस की कमान सौंप सौं दी जाए। अब इस पर लगाम लगेगी। यदि वह अपने ही राज्य की सत्ता खो चुकी हैं तो फिर INDIA अलायंस का नेता बनने का ख्वाब भी पूरा होना मुश्किल है। यही नहीं उन हीं के लिए पार्टी को पहले की तरह मजबूत बनाए रखना भी मुश्किल होगा।

बंगाल की जैसी राजनीति है, उसमें संभावना है कि टीएमसी के कुछ जीते हुए विधायक और अन्य नेता भी पलटी मारते हुए भाजपा में ही चले जाएं। इन चुनाव नतीजों से राज्यसभा के समीकरण में भी बदलाव हो जाएगा और भाजपा की सीटों में इजाफा होगा। इ तरह विधानसभा इलेक्शन का रिजल्ट सीधे तौर पर संसद में भी असर डालेगा। यही नहीं 2029 हीं के आम चुनाव में टीएमसी कितनी मजबूत रहेगी, यह भी देखना होगा। बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद उसका तीसरा नंबर है। ऐसे में यदि उत्तर प्रदेश या अन्य किसी बड़े राज्य में भाजपा की ताकत कम होती है तो उसे बंगाल से बैलेंस करने का मौका मिलेगा।

ममता बनर्जी की इस हार से विपक्ष सामूहिक तौर पर भले ही कमजोर हुआ है, लेकिन कांग्रेस को इससे ज्यादा परेशानी नहीं होगी। वजह यह कि ममता बनर्जी अकसर कांग्रेस की लीडरशिप को ही टारगेट करती रही हैं। ऐसे में कांग्रेस ने केरल में जीत कर अपनी ताकत बढ़ाई है। अब उसका विपक्षी INDIA अलायंस में अपरहैंड रहेगा। वहीं अहीं धीर रंजन चौधरी जैसे नेता फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

 हार की बड़ी वजहें: क्यों टूटा ‘दीदी’ का किला

 भ्रष्टाचार के आरोप
Saradha chit fund scam
Narada sting operation
शिक्षक भर्ती घोटाले में 25,000 से ज्यादा नियुक्तियां रद्द

इन मामलों ने सरकार की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया।

 बेरोजगारी और पलायन

राज्य में उद्योगों की कमी और रोजगार संकट बड़ा मुद्दा बना। युवा वर्ग, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय, बड़े पैमाने पर बाहर काम करने को मजबूर हुआ।

वोटर लिस्ट विवाद (SIR)

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम हटाए गए। ममता ने आरोप लगाया कि यह उनके वोटबैंक को कमजोर करने की साजिश थी।

महिलाओं का बदला मूड

‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाओं के बावजूद BJP के 3000 रुपये/माह के वादे ने असर डाला। जो महिला वोट TMC की ताकत था, वही कमजोर कड़ी बन गया।

 ध्रुवीकरण और राजनीतिक बदलाव

2012 के बाद BJP ने तेजी से बंगाल में पकड़ बनाई। धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर राजनीति तेज हुई, जिससे वोटों का ध्रुवीकरण हुआ।

उदय से पतन तक: 2011 से 2026 का सफर

ममता बनर्जी का उभार 2000 के दशक में शुरू हुआ, जब उन्होंने पश्चिम मिदनापुर के केशपुर और गढ़बेटा में CPI(M) के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। "केशपुर होबे CPM-एर शेषपुर'' का नारा दिया। हालांकि, असली मोड़ नंदीग्राम और सिंगूर आंदोलनों से आया, जहां जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उनकी लड़ाई ने वाम मोर्चा के खिलाफ जनाक्रोश को हवा दी। 2011 में उन्होंने 34 साल पुरानी वाम सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। ममता ने तीन बार लगातार सत्ता सत्ता हासिल की। अब 2026 में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका

दिल्ली तक असर: INDIA गठबंधन पर भी चोट

TMC की हार का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखेगा। Indian National Congress को INDIA गठबंधन में बढ़त मिल सकती है, जबकि ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को बड़ा झटका लगा है।

 पार्टी के अंदर भी बढ़ेगी कलह

Abhishek Banerjee की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं। संभावना है कि TMC के कुछ नेता BJP का रुख कर सकते हैं।

आगे क्या? 2029 की तैयारी शुरू

बंगाल की 42 लोकसभा सीटें राष्ट्रीय राजनीति में अहम हैं। अगर BJP यहां मजबूत रहती है, तो 2029 के चुनाव में इसका बड़ा असर पड़ सकता है।