झारखंड: जमशेदपुर को मिली बड़ी राहत: 14 दिनों के खौफ का अंत, सुरक्षित घर लौटे उद्योगपति कैरव गांधी
जमशेदपुर के युवा उद्योगपति कैरव गांधी 14 दिन बाद अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सुरक्षित मुक्त। पुलिस ने तड़के 4:30 बजे घर पहुंचाया। 5 करोड़ की फिरौती, बिहार कनेक्शन और हनी ट्रैप एंगल की जांच जारी।
जमशेदपुर।(Threesocieties.com Desk)। लौहनगरी जमशेदपुर के लिए मंगलवार की सुबह राहत और सुकून की खबर लेकर आई। पिछले 14 दिनों से अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसे युवा उद्योगपति कैरव गांधी (24 वर्ष) को पुलिस ने सुरक्षित मुक्त करा लिया है। मंगलवार तड़के करीब 4:30 बजे पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें सर्किट हाउस एरिया स्थित उनके आवास पहुंचाया गया।
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कैरव की सुरक्षित वापसी के साथ ही उनके परिवार, रिश्तेदारों और शहर के व्यापारी वर्ग ने राहत की सांस ली। पूरे शहर में पिछले दो हफ्तों से फैले डर और अनिश्चितता का माहौल खत्म हो गया।

परिवार से मिलते ही छलक पड़े जज़्बात
पुलिस की कड़ी सुरक्षा में जब कैरव गांधी घर पहुंचे, तो पिता देवांग गांधी और परिजनों ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। भावुक क्षणों में घर का माहौल बेहद संवेदनशील रहा। सूत्रों के अनुसार, कैरव शारीरिक रूप से सुरक्षित हैं, लेकिन मानसिक रूप से अभी भी सहमे हुए हैं।
13 जनवरी को हुआ था रहस्यमय अपहरण
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी। कैरव गांधी सुबह करीब 11:30 बजे अपने घर से बिष्टुपुर स्थित एसबीआई बैंक और फिर आदित्यपुर की फैक्ट्री जाने के लिए निकले थे। लेकिन वे न बैंक पहुंचे और न ही फैक्ट्री।दोपहर बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। शाम होते-होते पुलिस को उनकी क्रेटा कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा (NH-33) के किनारे लावारिस हालत में मिली।
कार की चाबी इग्निशन में लगी थी और मोबाइल फोन जमीन पर पड़ा था—यहीं से अपहरण की पुष्टि हो गई।
इंडोनेशियाई नंबर से मांगी गई थी पांच करोड़ की फिरौती
जांच में बड़ा खुलासा तब हुआ, जब कैरव के पिता देवांग गांधी को व्हाट्सएप कॉल के जरिए 5 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई।
यह कॉल इंडोनेशिया के कंट्री कोड (+62) वाले नंबर से की गई थी, जिससे पुलिस की चुनौती और बढ़ गई। अपहरणकर्ताओं ने परिवार को पुलिस को सूचना न देने की धमकी भी दी थी।
पुलिस की सात विशेष टीमों ने दिन-रात की मेहनत
इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी।
डीजीपी तदाशा मिश्रा और एसएसपी के निर्देश पर 7 विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए।
जांच का दायरा झारखंड से निकलकर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैला।
सीसीटीवी फुटेज में एक सफेद स्कॉर्पियो, जिस पर ‘पुलिस’ लिखा स्टिकर लगा था, संदिग्ध रूप से नजर आई।
इसके अलावा बिहार के वैशाली से एक संदिग्ध हैचबैक कार भी बरामद की गई।
हनी ट्रैप और बिहार कनेक्शन की जांच
पुलिस जांच में हनी ट्रैप एंगल भी सामने आया। सूत्रों के मुताबिक, अपहरण की साजिश कई स्तरों पर रची गई थी और इसमें बिहार कनेक्शन की भूमिका अहम मानी जा रही है।
राजनीतिक दबाव और व्यापारी संगठनों का आक्रोश
कैरव की सुरक्षित बरामदगी में देरी से शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा था।
भाजपा नेताओं और विधायक सरयू राय ने पुलिस प्रशासन पर कड़ा दबाव बनाया।
व्यापारी संगठनों ने शहर बंद और उग्र आंदोलन की चेतावनी तक दे दी थी।
माना जा रहा है कि लगातार छापेमारी और इंटर-स्टेट दबिश के चलते अपहरणकर्ता घबरा गए और आखिरकार झुकना पड़ा।
पुलिस ने अब तक नहीं खोले पत्ते
हालांकि पुलिस ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि—
अपहरणकर्ता कहां से पकड़े गये
फिरौती दी गई या नहीं
कितने लोग इस साजिश में शामिल थे
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जल्द ही विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
कैरव गांधी अपहरण मामला: एक नजर में
13 जनवरी (मंगलवार): सुबह लगभग 11:30 बजे कैरव गांधी (24 वर्ष) अपने घर (बिष्टुपुर, सीएच एरिया) से निकले। दोपहर तक न घर लौटे और न फैक्ट्री पहुंचे। उनका मोबाइल बंद हो गया। शाम को उनकी क्रेटा कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा (एनएच-33 के किनारे) में लावारिस मिली। इग्निशन में चाबी लगी थी और मोबाइल पास में जमीन पर पड़ा था। पुलिस ने अपहरण की आशंका जताई।
13 जनवरी (दोपहर/शाम): अपहरणकर्ताओं ने परिवार को व्हाट्सएप कॉल (इंडोनेशियाई नंबर +62 से) कर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। पुलिस को सूचना न देने की धमकी दी गई। पुलिस ने बिष्टुपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज की, बाद में अपहरण की FIR दर्ज की गई।
14 जनवरी (बुधवार): फिरौती की कॉल की पुष्टि हुई। पुलिस ने जांच शुरू की, सीसीटीवी फुटेज खंगाला। अंतिम मोबाइल लोकेशन सोनारी क्षेत्र में मिली। व्यापारिक संगठनों (एएसआईए, सिंहभूम चैंबर आदि) ने चिंता जताई।
15 जनवरी (गुरुवार): फिरौती की मांग की खबर सार्वजनिक हुई। पुलिस ने 7 विशेष जांच दल गठित किए। जांच झारखंड से बाहर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैली। सीसीटीवी में 'पुलिस' स्टीकर वाली सफेद स्कॉर्पियो दिखी (पाटा टोल प्लाजा पर दोपहर 1:29 बजे रिकॉर्ड)। 22 मिनट का गैप (टर्निंग पॉइंट) जांच में आया।
16 जनवरी (शुक्रवार): 96 घंटे बीतने पर भी कोई सुराग नहीं। बिहार के किडनैपर किंग (चंदन सोनार) का नाम उभरा। 7 संदिग्ध हिरासत में लिए गए। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ घर पहुंचे, पुलिस पर दबाव बढ़ाया।
17-21 जनवरी 2026: जांच जारी रही। हनी ट्रैप एंगल सामने आया। SIT गठित, इंटर-स्टेट रेड बढ़ीं। 8-9 दिन बीतने पर भी ब्रेकथ्रू नहीं। राजनीतिक दबाव: विधायक सरयू राय ने डीजीपी से बात की, आंदोलन की चेतावनी दी।
-22 जनवरी के आसपास: स्कॉर्पियो मालिक फरार। जांच बिहार कनेक्शन पर केंद्रित।
25 जनवरी (रविवार): बड़ा खुलासा: कदमा से स्विफ्ट कार बरामद, बिहार कनेक्शन पुख्ता। पुलिस ने 48 घंटे में साजिश बेनकाब करने का दावा किया। डीजीपी तदाशा मिश्रा जमशेदपुर पहुंचीं, अपहरण स्थल का निरीक्षण किया।
27 जनवरी (मंगलवार): 14 दिन पूरे होने पर सुबह करीब 4:30 बजे पुलिस ने कैरव गांधी को सुरक्षित उनके सर्किट हाउस एरिया स्थित घर पहुंचाया।
Threesocieties.com इस केस से जुड़े हर नए अपडेट पर नजर बनाए रखेगा।






