- लोगों से बात कर वर्तमान व्यवस्था को बदलने का तैयार करेंगे खाका
पटना। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर जन सुराज यात्रा के तहत महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पदयात्रा की शुरुआत की है। बिहार के पश्चिमी चंपारण का महात्मा गांधी से जुड़ा भितिहरवा गांधी आश्रम से पदयात्रा शुरु की गयी है। लगभग सवा साल तक चलने वाली 3500 किमी की अपनी इस पदयात्रा की शुरुआत उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद की। पदयात्रा के दौरान वे पटना या दिल्ली नहीं आयेंगे।
यह भी पढ़ें:बिहार: कृषि मंत्री सुधाकर सिंह का इस्तीफा, जगदानंद ने की पुष्टि
और भी पढ़ें
- धनबाद-शकूर बस्ती समेत 20 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, दिवाली-छठ पर वेटिंग से राहत
- बिहार MLC चुनाव: BJP को 3 सीटें, पटना में 30 साल बाद हारी, RJD ने मारी बाजी
- धनबाद: झरिया में अग्रसेन जयंती पर निकली भव्य शोभायात्रा, झांकियों ने मोहा मन
- 1 घंटे खड़े रहकर धनबाद DC ने सुनी फरियाद, बुजुर्ग को 2 महीने बाद मिला राशन
व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की कोशिश
अपनी यात्रा को लेकर प्रशांत किशोर कहते हैं कि आजादी के इतने सालों बाद तक बिहार की तस्वीर नहीं बदली है। 50 के दशक में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल बिहार आज सबसे पिछड़े राज्यों की लिस्ट में है। इस यात्रा का उद्देश्य बिहार को इस हाल से बाहर निकालने, लोगों के जीवन की बेहतरी तथा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की कोशिश है। यात्रा के माध्ण्यम से यह जाना है कि वर्तमान व्यवस्था को कैसे बदला जा सकता है।
सही लोगों को जोड़ेंगे, करेंगे सामूहिक प्रयास
यात्रा का उद्देश्य आने वाले एक दशक में बिहार को देश के अग्रणी राज्यो में शामिल करने की कोशिश है। इसके लिए अभियान के तहत सही लोगों को जोड़कर सही सोच के साथ सामूहिक प्रयास करना है। समाज की मदद से जमीनी स्तर पर सही लोगों की सहायता से एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाने के लिए उनको एक लोकतांत्रिक मंच पर लाने की कोशिश की जानी है। साथ ही स्थानीय समस्याओं और संभावनाओं को समझकर शहरों और पंचायतों की प्राथमिकताओं को एकत्र कर उनके विकास का ब्लू प्रिंट तैयार करना है। समग्र विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ, राजगार, आर्थिक विकास, कृषि, उद्योग एवं सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञों और आम लोगों के सुझाव के आधार पर अगले 15 साल का विजन डाक्यूमेंट बनाना है।
जन सुराज संवाद के तहत गांव-गांव भ्रमण करेंगे
प्रशांत किशोर की जन सुराज पदयात्रा में 12 से 15 महीने तक बिहार की 3500 किलोमीटर की दूरी तय कर जनता की नब्ज टटोलेंगे। वे गांव-गांव भ्रमण करने के साथ जन सुराज संवाद स्थापित करेंगे। शाम में सांझ चौपाल करेंगे। सांझ चौपाल जहां खत्म होगा, वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। फिर, अगले दिन आगे बढ़ चलेंगे।