बिहार में इतिहास रचा गया: विराट रामायण मंदिर में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग

बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर में 33 फीट ऊंचे और 210 टन वजनी दुनिया के सबसे बड़े अखंड शिवलिंग की स्थापना हुई। तमिलनाडु से 2565 किमी की यात्रा कर आए इस सहस्रलिंगम की प्राण-प्रतिष्ठा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए।

बिहार में इतिहास रचा गया: विराट रामायण मंदिर में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग
33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी शिवलिंग।
  • पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (जानकी नगर) मंदिर में 33 फीट ऊंचा शिवलिंग बना आस्था का केंद्र
  • 33 फीट ऊंचा, 210 टन वजनी, ब्लैक ग्रेनाइट से किया गया है निर्मित

  • तमिलनाडु से 2565 किमी की यात्रा कर बिहार पहुंचा शिवलिंग

पटना। बिहार ने सनातन संस्कृति के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया (जानकी नगर) स्थित निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में शुक्रवार, 17 जनवरी 2026 को दुनिया के सबसे बड़े अखंड शिवलिंग (सहस्रलिंगम) की भव्य स्थापना की गयी।

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इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं मंदिर परिसर पहुंचे और स्थापना प्रक्रिया का साक्षी बने। 33 फीट ऊंचा यह शिवलिंग अब न केवल बिहार, बल्कि पूरे विश्व के लिए आस्था और आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।

कहां स्थित है दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग?

विश्व का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत कैथवलिया (जानकी नगर) स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। इसे World Biggest Shivling Sahasra Shivlingam के नाम से जाना जा रहा है। शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम के पट्टीकाडू गांव में बीते दस साल से हो रहा था। 33 फीट का शिवलिंग एक ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से निर्मित है। कलाकारों के 10 साल के अथक परिश्रम से यह शिवलिंग बनकर तैयार हुआ है। शिवलिंग का वजन 210 मीट्रिक टन है। इस पर 1008 सहस्त्रलिंगम तैयार किया गया है। शिवलिंग निर्माण की पूरी प्रक्रिया शिल्पकार हेमलता देवी की निगरानी में किया गया है। इसमें शिल्पकारों के एक पूरे दल का श्रम लगा है। उसमें हेमलता के पुत्र विनायक बैकट रमण भी प्रमुख हैं। पीठ पूजा में सभी शिल्पकारों को बुलाया गया है। उन्हें भी मंदिर निर्माण समिति की ओर से सम्मानित किया गया है।

 कितना विशाल है यह शिवलिंग?

विराट रामायण मंदिर में स्थापित शिवलिंग की विशेषताएं इसे दुनिया में अद्वितीय बनाती हैं—

ऊंचाई: 33 फीट

वजन: 210 मीट्रिक टन

निर्माण: एक ही ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से

विशेषता: शिवलिंग पर 1008 सहस्रलिंगम उकेरे गये हैं

यह दुनिया का सबसे बड़ा अखंड (Monolithic) शिवलिंग है।

क्यों खास है बिहार का यह शिवलिंग?

इस शिवलिंग को एक ही पत्थर से तराशा गया है, जो तकनीकी और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से अद्भुत है।1008 लघु शिवलिंगों से सुसज्जित यह सहस्रलिंगम शिवभक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

 किसने बनवाया और किसने बनाया?

निर्माणकर्ता संस्था: बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद

शिल्प निर्देशन: प्रसिद्ध शिल्पकार हेमलता देवी

प्रमुख शिल्पकार: उनके पुत्र विनायक बैकट रमण सहित शिल्पकारों की टीम

करीब 10 वर्षों की मेहनत के बाद यह अद्भुत कृति तैयार हो सकी।

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुआ निर्माण, 2565 किमी की ऐतिहासिक यात्रा

इस भव्य शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडू गांव में किया गया, जो प्राचीन शिल्पकला के लिए विश्वप्रसिद्ध है।शिवलिंग 21 नवंबर 2025 को महाबलीपुरम से रवाना हुआ और तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 2565 किलोमीटर की दूरी तय कर 46 दिनों बाद 5 जनवरी 2026 को कैथवलिया पहुंचा।

कितना खर्च आया?

निर्माण अवधि: लगभग 10 वर्ष

कुल लागत: करीब 3 करोड़ रुपये

विराट रामायण मंदिर की भव्यता

विराट रामायण मंदिर स्वयं विश्व के सबसे विशाल मंदिरों में शामिल होगा—

क्षेत्रफल: 120 एकड़

लंबाई: 1080 फीट, चौड़ाई: 540 फीट

कुल शिखर: 18

मुख्य शिखर ऊंचाई: 270 फीट

कुल मंदिर: 22

सांसद शांभवी चौधरी और सायण कुणाल बने यजमान

सहस्र शिवलिंगम की स्थापना से पूर्व आयोजित पीठ पूजा में समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी और उनके पति, महावीर मंदिर न्यास पटना के सचिव सायण कुणाल यजमान के रूप में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंदिर परिसर पहुंचकर सहस्र शिवलिंगम स्थापना प्रक्रिया का अवलोकन किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उन्होंने अनुष्ठानों की जानकारी ली और बाद में मोतिहारी में आयोजित कार्यक्रम के लिए रवाना हुए।

 शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब

पीठ पूजा और स्थापना समारोह को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल रहा। हजारों श्रद्धालु राम जानकी पथ से पैदल चलकर मंदिर पहुंचे। चारों ओर “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे।

विराट रामायण मंदिर की खासियत 
सहस्त्र लिंगम को विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया गया है। यह मंदिर 120 एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट, चार शिखर की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, आठ शिखर की ऊंचाई 108 फीट और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। विराट रामायण मंदिर का निर्माण 20 जून 2023 से चल रहा है, अभी निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। 20 जून, 2023 को विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए शिलापूजन का कार्य धार्मिक न्यास परिषद पटना के तत्कालीन अध्यक्ष आर्चाय किशोर कुणाल के नेतृत्व में की गयी थी। तब से लगातार डेढ़ वर्षों तक प्रतिदिन ढाई सौ मजदूरों ने काम किया और जमीन के अंदर सौ फीट से कुल 3102 स्तंभ खड़े किए।

46 दिनों की यात्रा तय कर पांच जनवरी को रामायण मंदिर परिसर पहुंचा शिवलिंग
विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से पूर्वी चंपारण के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर लाने में कुल 46 दिनों का समय लगा। महाबलीपुरम से 21 नवंबर को शिवलिंग चला। तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश,उत्तर प्रदेश होते हुए करीब 2565 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर 46 दिन में कैथवलिया विराट रामायण मंदिर परिसर में 05 जनवरी 2026 को पहुंचा।