धनबाद : ‘डांडिया डांस’ पर बवाल: महिला थानेदार पर एक्शन पर सवाल—अनुशासन या कम्युनिटी पुलिसिंग पर चोट?

धनबाद के राजगंज थाना प्रभारी अलीशा कुमारी के डांडिया नाइट में वर्दी में नृत्य करने पर कार्रवाई के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। क्या यह अनुशासन का मामला है या कम्युनिटी पुलिसिंग की भावना पर चोट?

धनबाद : ‘डांडिया डांस’ पर बवाल: महिला थानेदार पर एक्शन पर सवाल—अनुशासन या कम्युनिटी पुलिसिंग पर चोट?
एसआइ अलीशा कुमारी (फाइल फोटो)

(दीपक कुमार पांडेय)

धनबाद: धनबाद में पुलिस महकमे का एक मामला इन दिनों चर्चा के केंद्र में है, जहां राजगंज की तत्कालीन थाना प्रभारी अलीशा कुमारी को एक वायरल वीडियो के बाद लाइन हाजिर कर दिया गया। यह वीडियो एक ‘डांडिया नाइट’ कार्यक्रम का है, जिसमें वह वर्दी में कुछ क्षणों के लिए स्थानीय महिलाओं के साथ नृत्य करती नजर आईं।

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हालांकि यह घटना अब  सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन बनाम सामुदायिक जुड़ाव की बहस को तेज कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, अलीशा कुमारी उस कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, स्थानीय महिलाओं और युवतियों के आग्रह पर उन्होंने कुछ पल उनके साथ डांडिया किया। इसी दौरान किसी ने वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में कोई अमर्यादित हरकत या वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा दृश्य सामने नहीं आया, लेकिन कुछ सेकेंड के क्लिप को बार-बार चलाकर विवाद खड़ा कर दिया गया।

गाने के बोल पर विवाद, लेकिन परंपरा भी सवाल में

विवाद का एक कारण वीडियो में बज रहे गाने के बोल भी बताए जा रहे हैं। हालांकि झारखंड और बिहार में ऐसे गाने सामूहिक आयोजनों का सामान्य हिस्सा होते हैं और हर वर्ग के लोग इन्हें पसंद करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या इस आधार पर इतनी बड़ी कार्रवाई उचित है?

एक ‘मामूली चूक’ और बड़ी सजा, चर्चा में आईं एसअइा अलिसा कुमारी

धनबाद जिला बल में महज दो वर्ष पहले आई 2018 बैच की अवर निरीक्षक (दारोगा) अलिसा कुमारी इन दिनों एक वायरल वीडियो के कारण चर्चा में हैं। राजगंज थाना प्रभारी के रूप में उनकी पहचान एक पब्लिक फ्रेंडली और संवेदनशील अधिकारी की रही है, लेकिन एक छोटी सी घटना ने उनके करियर को अचानक झटका दे दिया। करीब डेढ़ वर्ष पहले अगस्त में उन्हें राजगंज का थानेदार बनाया गया था। फरियादियों के लिए सुलभ और व्यवहारिक पुलिसिंग के कारण वे स्थानीय लोगों, खासकर महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय थीं।

क्या थी ‘गलती’?

दो दिन पहले रामनवमी और चैती दुर्गापूजा के दौरान आयोजित डांडिया कार्यक्रम में, ड्यूटी पर तैनात रहते हुए अलिसा कुमारी कुछ क्षणों के लिए भोजपुरी गाने पर थिरकती नजर आईं।  वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया और एसएसपी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल लाइन क्लोज (लाइन हाजिर) कर दिया।

महिलाओं ने कहा—“कसूर हमारा था”

इस कार्रवाई से राजगंज की सैकड़ों महिलाएं आहत हो गईं। स्थानीय महिलाओं का कहना है: “हमारे बार-बार आग्रह पर मैडम ने डांस किया”, “अगर गलती है तो हमारी है, थानेदार की नहीं”। इतना ही नहीं, कार्रवाई के बाद कई महिलाओं ने ऑटो, टोटो और कार बुक कर एसएसपी से मिलने की योजना बनाई थी, लेकिन अलिसा कुमारी ने खुद उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया।

धार्मिक आयोजन और पुलिस की भूमिका

राजगंज में वर्षों से रामनवमी और चैती दुर्गापूजा के अवसर पर भव्य आयोजन होता है, जिसमें आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोग शामिल होते हैं। सप्ताहभर चलने वाले इस मेले और कार्यक्रमों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थानेदार और पुलिस बल की होती है। इसी दौरान डांडिया कार्यक्रम में दर्जनों महिलाएं नृत्य कर रही थीं, जहां अलिसा कुमारी भी पहुंचीं और फिर यह घटना घटी।

‘ना’ कहतीं तो शायद बच जातीं…

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अलिसा कुमारी ने पहले वर्दी में होने का हवाला देकर मना किया, लेकिन महिलाओं के बार-बार आग्रह पर उन्होंने कुछ क्षण के लिए हिस्सा लिया। आज के सोशल मीडिया दौर में जहां हर पल कैमरे में कैद हो जाता है, वही कुछ सेकेंड का वीडियो उनके लिए भारी पड़ गया।

अनुशासन के नियम क्या कहते हैं?

झारखंड पुलिस मुख्यालय ने पहले ही सोशल मीडिया और वर्दी के इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू कर रखे हैं। तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता द्वारा जारी निर्देश (742/2025) के तहत:

वर्दी में रील या वीडियो बनाना प्रतिबंधित
ड्यूटी के दौरान फिल्मी गानों पर डांस वर्जित
हथियारों के साथ फोटो/वीडियो पोस्ट करना गंभीर अनुशासनहीनता
पुलिस छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर सख्त रोक

इन नियमों के तहत पहले भी कई कार्रवाई हो चुकी हैं:

हुसैनाबाद में थाना प्रभारी को रील बनाने पर लाइन क्लोज किया गया
गोड्डा में पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया
महुदा (2019) में अश्लील डांस के आरोप में कार्रवाई हुई

लेकिन राजगंज का मामला इन सबसे अलग बताया जा रहा है।

अनुशासन बनाम कम्युनिटी पुलिसिंग: असली बहस

राजगंज की घटना के बाद पुलिस विभाग के भीतर ही यह चर्चा तेज है कि: क्या हर स्थिति में नियमों को कठोर रूप से लागू करना सही है?
क्या जनता से जुड़ाव की कोशिश को भी अनुशासनहीनता माना जाएगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि कम्युनिटी पुलिसिंग का उद्देश्य ही जनता और पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाना है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी सामाजिक कार्यक्रम में सीमित रूप से शामिल होता है, तो इसे सकारात्मक नजरिए से भी देखा जा सकता है।

सख्ती से लाभ किसे?

मूल रूप से गिरिडीह की रहने वाली अलीशा कुमारी 2018 बैच की सब-इंस्पेक्टर हैं। राजगंज जैसे अहम थाने की जिम्मेदारी मिलने के कारण वह पहले से ही चर्चा में थीं। सूत्रों के मुताबिक, इस घटना के बाद विभाग के अंदर यह भी चर्चा है कि “क्या व्यक्तिगत विरोध और आंतरिक राजनीति ने इस कार्रवाई को तेज किया?”

मुख्यालय सख्त, सभी जिलों को निर्देश

पलामू और धनबाद की घटनाओं के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मियों को नियमों के प्रति फिर से जागरूक करें। इससे खासकर 2018 बैच के अधिकारियों में चिंता बढ़ गई है।

भविष्य का संकेत: ‘खौफ’ या ‘विश्वास’ की खाकी?

राजगंज का यह मामला अब एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—

 क्या पुलिस सिर्फ कानून और डर का प्रतीक बनेगी?
 या समाज के उत्सवों में शामिल होकर भरोसे की नई मिसाल बनाएगी?

स्पष्ट है कि अनुशासन पुलिस की रीढ़ है, लेकिन बदलते समय में मानवीय जुड़ाव भी उतना ही जरूरी होता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में पुलिस विभाग इस संतुलन को कैसे साधता है।

(यह लेख कोयलांचल के सीनीयर युवा पत्रकार दीपक पांडेय के निजी विचार हैं। दीपक पांडेय जिले के कई बड़े अखबारों में काम कर चुके हैं। )