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  • दुलारचंद हत्याकांड में तीन FIR दर्ज
  • अनंत सिंह समेत पांच पर नामजद FIR
  • जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी पर भी दर्ज हुई प्राथमिकी
  • मोकामा में गोलीबारी और हत्या के बाद फैला तनाव

पटनाा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले मोकामा विधानसभा क्षेत्र में सियासी हिंसा ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। गुरुवार शाम हुई गोलीबारी और हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव फैला दिया है। जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के बाद मोकामा को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है।

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मृतक के परिवार ने जदयू प्रत्याशी और बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाते हुए FIR दर्ज कराई है, जबकि अनंत सिंह के समर्थकों ने भी जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी पर हत्या और हमले का आरोप लगाया है।

पहली प्राथमिकी मृतक दुलारचंद यादव के पौत्र नीरज कुमार के लिखित आवेदन पर दर्ज की गई है। इसमें मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह, कर्मवीर सिंह, राजवीर सिंह, कंजय सिंह और छोटन सिंह को नामजद आरोपित बनाया गया है। प्राथमिकी में जसुपा प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार अभियान के दौरान हत्या का आरोप लगाया गया है।

दूसरी प्राथमिकी नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के पुआरी गांव निवासी बलराम सिंह के बेटे जितेंद्र कुमार की लिखित शिकायत पर की गई है। प्राथमिकी में जसुपा उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी, लखन महतो, बाजो महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो, अजय महतो समेत सौ से अधिक अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कराया गया है। इसमें आरोपितों पर हत्या की नीयत से पिस्तौल से गोली चलाने, लाठी, राड से हमला करने और गाड़ियों के शीशे तोड़ने का आरोप है।

भदौर थानाध्यक्ष रविरंजन चौहान ने तीसरी प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें दोनों उम्मीदवारों के अज्ञात समर्थकों को आरोपित किया गया है। सार्वजनिक स्थल पर फायरिंग करने, पत्थर चलाने और वाहनों में तोड़फोड़ करने का आरोप है। भदौर थानाध्यक्ष रविरंजन चौहान ने दहशत पैदा करने और विधि व्यवस्था भंग करने के आरोप में अज्ञात समर्थकों पर प्राथमिकी दर्ज की है।

मोकामा से लेकर बाढ़ तक हुआ भारी बवाल
दुलारचंद यादव की हत्या के बाद उनके समर्थकों ने मोकामा से लेकर बाढ़ तक बवाल मचाया। गुरुवार को साढ़े तीन बजे बाहुबली नेता की हुई हत्या के बाद ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए शव उठाने में पुलिस असमर्थ रही। ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग समेत बाढ़ अनुमंडल के तमाम पुलिस अधिकारियों के अनुरोध के बावजूद ग्रामीणों ने शव उठाने से रोक दिया। शुक्रवार की सुबह मृतक के स्वजनों और ग्रामीणों की सहमति के बाद करीब सोलह घंटे बाद पुलिस शव उठाने में कामयाब रही। ट्रैक्टर-ट्राली पर शव को रखा गया, जिस पर राजद प्रत्याशी वीणा देवी, जसुपा उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी और दुलारचंद यादव के स्वजन सवार हुए।

मोर चौक पर पहुंचते ही वीणा देवी अपनी गाड़ी पर सवार हो गयी। मोर चौक के बाद रास्ते भर समर्थकों का जमकर उत्पात शुरू हुआ। मोर और सुल्तानपुर गांव में अनंत सिंह के प्रचार वाहनों में लगे पोस्टर और बैनर को दुलारचंद के समर्थकों ने फाड़ दिये। रास्ते भर आक्रोशित लोग नारेबाजी भी करते रहे। कन्हाईपुर गांव पहुंचते ही लोगों का गुस्सा भड़क उठा और शव लदे ट्रैक्टर को रोक कर दस मिनट तक जमकर हंगामा किया। हालांकि अर्ध सैनिक बलों की भारी संख्या में मौजूदगी और पुलिस अधिकारियों की तत्परता से मोकामा प्रखंड की सीमा में दुलारचंद समर्थकों को नियंत्रण में रखने में सफलता मिली।

पंडारक की सीमा में पहुंचते ही राजद उम्मीदवार की गाड़ी पर पथराव
पंडारक की सीमा में पहुंचते ही रोड़ेबाजी शुरू हो गई। राजद उम्मीदवार वीणा देवी की गाड़ी पर पत्थरबाजी की गयी। इस हमले में वीणा देवी की गाड़ी के शीशे टूट गये। पंडारक में जमकर हुए बवाल के बाद करीब छह घंटे बाद दुलारचंद यादव का शव बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया।दुलारचंद की हत्या के बाद पुलिस को भी बवाल की आशंका हो गयी थी। तारतर से लेकर बाढ़ तक पुलिस ने सुरक्षा की ऐसी व्यवस्था कर रखी थी कि समर्थकों के हंगामे का कोई खास असर नहीं रहा। इस दौरान मोकामा से लेकर बाढ़ तक परिचालन व्यवस्था अस्त-व्यस्त रही।

दुलारचंद की हत्या के बाद राजद उम्मीदवार वीणा देवी और सांसद पप्पू यादव भी तारतर गांव पहुंचे थे। घटना की निंदा करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की।फिलहाल, चुनावी रंजिश में दुलारचंद यादव की हुई हत्या के बाद तनाव बना हुआ है। इलाके अर्ध सैनिक बलों की गश्ती बढ़ा दी गयी है।

हत्या के बाद सियासी बवाल

घटना पंडारक प्रखंड के भदौर थाना क्षेत्र के बसावनचक गांव के पास गुरुवार शाम करीब 4:30 बजे हुई। जानकारी के मुताबिक, जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी का काफिला और जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह का काफिला आमने-सामने आ गया। दोनों पक्षों के समर्थकों में कहासुनी और पथराव हुआ, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गयी। इसी दौरान 70 वर्षीय दुलारचंद यादव को पहले पैर में गोली मारी गई, फिर चारपहिया वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गयी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के बाद टाल क्षेत्र में दहशत और अफरातफरी का माहौल बन गया।

 दोनों पक्षों में FIR दर्ज

दुलारचंद के पोते के बयान पर पुलिस ने देर रात FIR दर्ज की है, जिसमें अनंत सिंह, उनके दो भतीजे रणवीर सिंह और कर्मवीर सिंह,
सहित कुल पांच लोगों को नामजद किया गया है। आरोप है कि अनंत समर्थकों ने गोली चलाई और फिर वाहन से कुचलकर दुलारचंद की हत्या कर दी। दूसरी ओर, अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार ने जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी, लखन महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो, और अजय महतो समेत अन्य पर हमले और हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए अलग प्राथमिकी दर्ज करायी है।

पुलिस छावनी में बदला मोकामा

घटना के बाद पूरे टाल क्षेत्र में पुलिस और अर्धसैनिक बल की तैनाती की गई है। बाढ़ एएसपी अभिषेक कुमार के अनुसार, “प्रारंभिक जांच में गोली मारने और वाहन से कुचलने की बात सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा।” पटना पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि “मौत संदिग्ध प्रतीत हो रही है, फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट होगी।” शव उठाने के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच कई बार तनाव और नोकझोंक हुई। देर रात तक बॉडी तारतर गांव में रखा गया, जहां ग्रामीणों का जमावड़ा लगा रहा।

अनंत सिंह ने साजिश बतायी

अनंत सिंह ने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि “राजद समर्थक सूरजभान सिंह के लोगों ने मेरे काफिले पर हमला किया। इसमें कई लोग घायल हुए और दस गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं।” वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि हत्या के लिए सीधे तौर पर अनंत सिंह और उनके समर्थक जिम्मेदार हैं।

चुनावी रंजिश का ताजा अध्याय

मोकामा की राजनीति में हमेशा से सियासी वर्चस्व की लड़ाई हावी रही है। दुलारचंद यादव 1990 में लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ चुके थे और उनका भी लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। अब उनके समर्थक की हत्या और अनंत सिंह पर दर्ज FIR ने चुनावी समीकरण को और उलझा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना मोकामा सीट को हॉटस्पॉट बना देगी और प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
उल्लेखनीय है  कि घटना गुरुवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे की है। पंडारक प्रखंड के बसावनचक गांव के समीप दुलारचंद यादव पर पहले गोली चलाई गई और फिर चारपहिया वाहन से कुचल कर हत्या कर दी गयी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाशों ने पहले दुलारचंद के पैर में गोली मारी, जिससे वह गिर पड़े, इसके बाद वाहन से रौंद दिया गया।

इस जघन्य वारदात के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गयी और टाल इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया। दुलारचंद यादव का आपराधिक रिकार्ड भी रहा है। 1990 में उन्होंने मोकामा विधानसभा से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वर्षों से वह सक्रिय रूप से राजनीति में रहे और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाते थे। हत्या के बाद उनके समर्थक शव को तारतर स्थित पैतृक गांव ले गए, जहां देर रात तक लोग जुटे रहे।

आक्रोशित समर्थकों ने पुलिस को शव उठाने नहीं दिया, जिसके चलते प्रशासन को भारी दबाव का सामना करना पड़ा।घटना की गंभीरता को देखते हुए बाढ़ एएसपी टू अभिषेक कुमार, कई थानाध्यक्ष और बल की अतिरिक्त कंपनियां मोकामा में कैंप कर रही हैं। पटना से भी पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। एएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में गोली मारने और वाहन से कुचलने की बात सामने आई है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा कि मौत किस कारण हुई।

ग्रामीणों ने हत्या के लिए अनंत सिंह और उनके समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं अनंत सिंह का कहना है कि यह सब उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजद समर्थक सूरजभान के समूह ने उनके काफिले पर हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हुए और दस गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं।