झारखंड कैबिनेट के 27 बड़े फैसले: रिम्स-2 को ₹4189 करोड़ की मंजूरी, मनरेगा की जगह अब 'जी-राम-जी' योजना
झारखंड कैबिनेट ने गुरुवार को 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। 4189 करोड़ रुपये की लागत से रिम्स-2 का निर्माण होगा, मनरेगा की जगह जी-राम-जी योजना लागू की जाएगी और 107 छोटे प्रखंड-अंचलों में एकल प्रशासनिक व्यवस्था लागू होगी।
HighLights:
- रिम्स-2 परियोजना के लिए 4189.41 करोड़ रुपये की मंजूरी।
- मनरेगा व्यवस्था की जगह अब 'जी-राम-जी' योजना लागू होगी।
- 53 अंचलों और 54 प्रखंडों में एक ही अधिकारी की व्यवस्था।
- श्रावणी मेले के लिए 47 अस्थायी पुलिस चौकियों के गठन को मंजूरी।
- 8-9 जुलाई को दिल्ली में राष्ट्रीय निवेश और विकास सम्मेलन आयोजित होगा।
रांची(Threesocieties.com Desk): मुख्यमंत्री Hemant Soren की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 27 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, प्रशासनिक सुधार, कानून-व्यवस्था और निवेश को बढ़ावा देने वाले इन फैसलों को राज्य सरकार के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक माना जा रहा है।
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रिम्स-2 के निर्माण को मिली मंजूरी, 4189 करोड़ रुपये होंगे खर्च
राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने रिम्स-2 परियोजना के निर्माण को मंजूरी देते हुए इसके लिए 4189.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परियोजना के प्रबंधन और मॉनिटरिंग के लिए "जागृति पीएमयू" का गठन किया जाएगा। इसके अलावा Indian Institute of Management Ranchi को इस परियोजना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका दी गई है, जबकि सामाजिक और आर्थिक प्रभाव के मूल्यांकन की जिम्मेदारी Xavier Institute of Social Service को सौंपी गई है।
मनरेगा की जगह लागू होगी 'जी-राम-जी' योजना
ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए राज्य में 'विकसित भारत-जी-राम-जी' योजना लागू करने को मंजूरी दे दी है। नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ विशेष रूप से आदिम जनजातीय समूहों (PVTG) के लिए अतिरिक्त कार्य और रोजगार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
107 छोटे प्रखंड-अंचलों में लागू होगी एकल प्रशासनिक व्यवस्था
प्रशासनिक कामकाज को तेज और सरल बनाने के लिए सरकार ने छोटे प्रखंडों और अंचलों में एकल प्रशासनिक पदाधिकारी की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत जिन क्षेत्रों में 12 से कम पंचायतें हैं, वहां एक ही अधिकारी दोहरी जिम्मेदारी निभाएगा। 53 अंचलों में सीईओ सह बीडीओ की नियुक्ति होगी। 54 प्रखंडों में बीडीओ सह सीओ की तैनाती की जाएगी। राज्य के 164 बड़े प्रखंडों में वर्तमान व्यवस्था की तरह बीडीओ और सीओ अलग-अलग कार्य करते रहेंगे। सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक खर्च कम होगा और आम लोगों के काम तेजी से पूरे होंगे।
श्रावणी मेले के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत
विश्व प्रसिद्ध Shravani Mela के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए कैबिनेट ने 47 अस्थायी पुलिस चौकियों के गठन को मंजूरी दी है। इनमें 28 सामान्य ओपी और 19 ट्रैफिक ओपी शामिल हैं। ये चौकियां 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक सक्रिय रहेंगी और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।
दिल्ली में होगा राष्ट्रीय निवेश सम्मेलन
राज्य में निवेश आकर्षित करने और विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में "नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन 2026" का आयोजन किया जाएगा। इस राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे। सम्मेलन में उद्योग, निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।
राज्य के भविष्य को दिशा देने वाले फैसले
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, रोजगार के नए अवसर, प्रशासनिक सुधार और निवेश को प्रोत्साहन देने वाले ये फैसले आने वाले वर्षों में झारखंड के विकास मॉडल को नई दिशा देंगे। रिम्स-2 जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना और ग्रामीण रोजगार के नए मॉडल राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।






