धनबाद में जुबानी जंग तेज: अरूप चटर्जी के निशाने पर सांसद ढुलू महतो, लगाए गंभीर आरोप

धनबाद की राजनीति में सांसद ढुलू महतो और विधायक अरूप चटर्जी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अरूप चटर्जी ने सांसद पर बेटियों के अपमान, गलत बयानव रंगदारी समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

धनबाद में जुबानी जंग तेज: अरूप चटर्जी के निशाने पर सांसद ढुलू महतो, लगाए गंभीर आरोप
सांसद की भाषा और राजनीतिक शैली पर भी विधायक ने साधा निशाना।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। अरूप चटर्जी और ढुलू महतो के बीच चल रही जुबानी जंग अब व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर पहुंच गई है। बुधवार को धनबाद परिसदन में आयोजित प्रेस वार्ता में विधायक अरूप चटर्जी ने सांसद ढुलू महतो पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनकी भाषा न केवल राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ है बल्कि देश की बेटियों का भी अपमान करती है।

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अरूप चटर्जी ने कहा कि सांसद द्वारा उन्हें "टकला" और "कछुआ छाप" कहकर संबोधित किया जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि देश और राजनीति में ऐसे कई बड़े नेता हैं जिनके सिर पर बाल नहीं हैं और वे सर्वोच्च पदों पर आसीन रहे हैं। ऐसे में किसी की शारीरिक बनावट या व्यक्तिगत विशेषताओं पर टिप्पणी करना राजनीतिक संस्कृति को कमजोर करता है।

"बेटे-बेटियों में फर्क करना छोटी मानसिकता"

विधायक ने सांसद के उस कथित बयान पर भी आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने कहा था कि "जिसका बेटा नहीं है, वह बेटे का दर्द क्या जाने"। अरूप चटर्जी ने कहा कि उन्हें अपनी दो बेटियों पर गर्व है और बेटा-बेटी में अंतर करना संकीर्ण सोच का परिचायक है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसके जनप्रतिनिधियों के बयान उस भावना के विपरीत दिखाई देते हैं।

हार्डकोक कंपनी के दस्तावेज दिखाने का दावा

प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने दावा किया कि उन्होंने सांसद के पुत्र के नाम से संचालित एक हार्डकोक इकाई से जुड़े दस्तावेज भी मीडिया के सामने रखे। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियां सम्मान और गौरव का प्रतीक हैं और उन्हें किसी भी तरह कमतर नहीं आंका जा सकता।

गोविंदपुर की जमीन को लेकर भी लगाए आरोप

अरूप चटर्जी ने गोविंदपुर की 43 एकड़ जमीन से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इस जमीन की घेराबंदी कर इसे ऊंची कीमत पर बेचने की तैयारी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में मामला उठने के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच हुई और मामला न्यायालय तक पहुंचा।

कोयला चोरी की जांच की मांग

विधायक ने कहा कि यदि सांसद स्वयं को पूरी तरह ईमानदार मानते हैं तो उन्हें कोयला चोरी के मामलों की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच होती है तो इसकी शुरुआत उनके विधानसभा क्षेत्र निरसा से ही की जाए और वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सांसद की दोहरी राजनीति का आरोप

अरूप चटर्जी ने आरोप लगाया कि सांसद एक ओर भाजपा की राजनीति करते हैं और दूसरी ओर मजदूर राजनीति के लिए अलग विचारधारा वाले संगठनों से जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वैचारिक प्रतिबद्धता स्पष्ट है तो उसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।

पुराने संबंधों का भी किया जिक्र

प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने यह भी कहा कि अतीत में उन्होंने सांसद और उनके परिवार की मदद की थी। उन्होंने दावा किया कि एक मामले में सांसद के आग्रह पर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर उनके भाई को राहत दिलाने का प्रयास किया था।

धनबाद की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच बढ़ती तल्खी अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसके असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

(नोट: समाचार में शामिल कई आरोप विधायक अरूप चटर्जी द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)