- मोदी ने कहा भारत के लिए गौरव की बात,हर संभव मदद देगा भारत
- पीएम नरेंद्र मोदी को मालदीव के सर्वोच्च सम्मान निशान इज्जुद्दीन से सम्मानित किया गया
- पीएम मोदी ने इसे भारत के लिए गौरव की बात बताया, कहा- कहा, हमने मालदीव के नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया
- कहा- हमला हो, सुनामी या पानी की कमी हो हमेशा भारत मालदीव के साथ खड़ा दिखा
माले : पीएम नरेंद्र मोदी को पड़ोसी देश मालदीव ने शनिवार को देश के सबसे बड़े सम्मान 'निशान इज्जुद्दीन' से सम्मानित किया. पीएम ने मौके पर कहा कि राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह के पद ग्रहण करने के बाद द्विपक्षीय सहयोग की गति और दिशा में मौलिक बदलाव आया है
पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे खुशी है कि मेरे दूसरे कार्यकाल के पहले विदेश दौरे पर आपके सुंदर देश मालदीव में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है.हमारे देशों ने कुछ दिन पहले ही ईद का त्योहार हर्ष और उल्लास के साथ मनाया है. मेरी शुभकामनाएं हैं कि इस पर्व का प्रकाश हमारे नागरिकों के जीवन को हमेशा आलोकित करता रहे.
पूरे भारत को नया गौरव दिया
पीएम ने कहा कि आज मुझे मालदीव के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करके आपने मुझे ही नहीं बल्कि पूरे भारत को एक नया गौरव दिया है. निशान इज्जुदीन का सम्मान मेरे लिए हर्ष और गर्व का विषय है. यह मेरा ही नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और घनिष्ठ संबंधों का सम्मान है. मैं इसे बड़ी विनम्रता के साथ सभी भारतीयों की ओर से स्वीकार करता हूं. उन्होंने कहा कि हिंद महासागर की लहरों ने हजारों साल से हमें घनिष्ठ संबंधों में बांधा है. 1988 का बाहरी हमला हो या सुनामी जैसी कुदरती आपदा या हाल में पीने के पानी की कमी, भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा रहा है और मदद के लिए हमेशा आगे आया है.भारत में संसदीय और मालदीव में राष्ट्रपति और मजलिस के चुनावों के जनादेश से साफ है कि दोनों देशों के लोग स्थिरता और विकास चाहते हैं. ऐसे में लोगों पर केंद्रित और समावेशी विकास तथा सुशासन की हमारी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. पीएम ने कहा मैने अभी राष्ट्रपति सोलिह के साथ विस्तृत और उपयोगी विचार-विमर्श किया. हमने आपसी हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ हमारे द्विपक्षीय सहयोग की विस्तार से समीक्षा की है. हमारी साझेदारी की भावी दिशा पर हमारे बीच पूर्ण सहमति है. राष्ट्रपति सोलिह के पद ग्रहण करने के बाद से द्विपक्षीय सहयोग की गति और दिशा में मौलिक बदलाव आया है.
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2018 की आपकी (राष्ट्रपति सोलिह) भारत यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों को ठोस और समयबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है. सोलिह की भारत यात्रा के दौरान घोषित 1.4 अरब डॉलर के वित्तीय पैकेज से मालदीव की तत्कालीन वित्तीय जरूरतें तो पूरी हुई हैं. साथ ही सामाजिक प्रभाव के कई प्रॉजेक्ट शुरू किए गए हैं. 1800 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत विकास कार्यों के नए रास्ते भी खुले हैं.भारत और मालदीव के बीच विकास साझेदारी को और मजबूत करने के लिए मालदीव के नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है. विभिन्न द्वीपों पर पानी और सफाई की व्यवस्था, छोटे और लघु उद्योगों के लिए पयाप्त वित्त, बंदरगाहों का विकास, कॉन्फ्रेंस और कम्युनिटी सेंटर का निर्माण, क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण, ऐंम्बुलेंस सेवा, तटीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, कृषि और मत्स्य पालन, पर्यटन जैसे अनेक भारतीय सहयोग के प्रॉजेक्ट से मालदीव के लोगों को सीधा फायदा पहुंच रहा है. दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए हम भारत में कोच्चि और मालदीव में कुल्तुफुशी और माले के बीच नौका सेवा शुरू करने पर सहमत हुए हैं.मालदीव में रुपे कार्ड जारी करने से भारतीय पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी. इसबारे में जल्द कार्यवाही होगी। रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई है. आज हमने संयुक्त रूप से मालदीव डिफेंस फोर्सेज के कंपोजिट ट्रेनिंग सेंटर और तटीय निगरानी प्रणाली का उद्घाटन किया है. यह मालदीव की समुद्री सुरक्षा को और बढ़ायेगा. भारत मालदीव के साथ अपने संबंधों को सबसे अधिक महत्व देता है. हम एक दूसरे के साथ गहरी और मजबूत साझेदारी चाहते हैं. एक समृद्ध, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मालदीव पूरे क्षेत्र के हित में है. हम दोहराना चाहते हैं कि भारत मालदीव की हरसंभव सहायता करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है। आखिर में उन्होंने कहा, 'भारत-मालदीव दोस्ती अमर रहे.
मालदीव की संसद से संबोधन में PM मोदी बोले आतंक पर कहा- पानी सिर से ऊपर निकल गया

पीएम मोदी ने मालदीव की संसद में ऐतिहासिक संबोधन के दौरान आतंकवाद पर जहां पाकिस्तान को घेरा तो वहीं, कर्ज के जाल में फंसाने की चीन की चाल पर भी निशाना साधा. पीएम ने कहा कि आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है. मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि यह दुर्भाग्य है कि लोग अब भी अच्छा आतंकी और बुरा आतंकी का भेद करने की गलती कर रहे हैं. आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना जरूरी है. मोदी ने कहा कि हम मित्र हैं और मित्रता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता है. भारत की विकास साझेदारी लोगों को सशक्त करने के लिए है, उन्हें कमजोर करने, खुद पर निर्भरता बढ़ाने या भावी पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ लादने के लिए नहीं है.
पीएम ने कहा कि आतंकवाद हमारे समय की एक बड़ी चुनौती है. यह खतरा एक देश या एक क्षेत्र के लिए नहीं, ये खतरा पूरी मानवता के लिए है. कोई दिन ऐसा नहीं जाता है जब आतंकवाद कहीं किसी जगह अपना भयानक रूप दिखाकर किसी निर्दोष की जान न लेता हो. आतंकियों के न तो अपने बैंक होते हैं, न टकसाल और न ही हथियारों की फैक्ट्री फिर भी उन्हें धन और हथियारों की कभी कमी नहीं होती है. कहां से पाते हैं ये सब, कौन देता उन्हें ये सुविधाएं? पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा कि आतंकवाद की स्टेस स्पॉन्सरशिप सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि लोग अभी भी अच्छा आतंकी और बुरा आतंकी का भेद करने की गलती कर रहे हैं.कृत्रिम मतभेदों में पड़कर हमने बहुत समय गंवा दिया है. पानी अब सिर से ऊपर निकल रहा है. आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए सभी मानवतावादी शक्तियों का एकजुट होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटना विश्व के नेतृत्व की सबसे खरी कसौटी है.
पीएम ने कहा कि जिस प्रकार विश्व समुदाय ने जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति विश्व सम्मेलन किए हैं वैसे ही आतंकवाद पर क्यों नहीं हो रहे हैं? मैं विश्व संगठनों से आग्रह करूंगा कि एक समय सीमा के भीतर आतंकवाद पर ग्लोबल कॉन्फ्रेंस आयोजित करें ताकि आतंकियों और उनके समर्थक जिन खामियों का फायदा उठाते हैं उन्हें बंद करने पर विचार किया जा सके. अगर अब हमने और देर की तो आज और आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी. पीएम ने कहा कि मालदीव यानी हजार से अधिक द्वीपों की माला, जो हिंद महासागर का ही नहीं पूरी दुनिया का एक नायाब नगीना है. इसकी असीम सुंदरता और प्राकृतिक संपदा हजारों साल से आकर्षण का केंद्र रही है. प्रकृति की ताकत के सामने मानव के अदम्य साहस का यह देश एक अनूठा उदाहरण है. व्यापार, लोगों और संस्कृति के अनवरत प्रवाह का मालदीव साक्षी रहा है. राजधानी माले विशाल नीले समंदर की प्रवेश द्वारी ही नहीं बल्कि यह स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्धशाली हिंद महासागर की कुंजी भी है. आज मालदीव में और इस मजलिस में आपके बीच आकर अपार हर्ष हो रहा है. मजलिस ने सर्वसम्मति से मुझे निमंत्रण देने का निर्णय नशीद के स्पीकर बनने के बाद अपनी पहली ही बैठक में लिया, आपके इस भाव ने हर भारतीय के दिल को छू लिया और उनका सम्मान और गौरव बढ़ाया है. इसके लिए मैं अध्यक्ष और सदन के सम्मानित सदस्यों को अपने और भारत की ओर से बधाई देता हूं.

पीएम ने कहा, 'मजलिस ईंट-पत्थर से बनी इमारत नहीं है. यह लोगों का मजमा नहीं है. यह लोकतंत्र की वह ऊर्जा भूमि है जहां देश की धड़कनें आपके विचारों और आवाज में गूंजती हैं. यहां आपके माध्यम से लोगों के सपने और आशाएं सच में बदलते हैं. यहां अलग-अलग विचारधारा और दलों के सदस्य देश में लोकतंत्र, विकास और शांति के लिए सामूहिक संकल्प को सिद्धि में बदलते हैं ठीक उसी तरह जैसे मालदीव के लोगों ने एकजुट होकर लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की. आपने दिखा दिया कि जीत आखिर में जनता की ही होती है. यह कोई मामूली सफलता नहीं थी। आपकी कामयाबी दुनियाभर के लिए मिसाल और प्रेरणा है. मालदीव की इस सफलता (लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया) पर सबसे अधिक गर्व और खुशी किसको हो सकती थी? उत्तर स्वाभाविक है- आपके सबसे घनिष्ठ मित्र, आपके सबसे नजदीकी पड़ोसी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को. मालदीव में लोकतंत्र की मजबूती के लिए भारत और हर भारतीय आपके साथ थे और साथ रहेंगे. मेरी सरकार का मूल मंत्र सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व में और खासकर अपने पड़ोस में मेरी सरकार की विदेश नीति का भी आधार है. नेबरहुड फर्स्ट हमारी प्राथमिकता है और इसमें मालदीव की प्राथमिकता बहुत स्वाभाविक है इसलिए आपके बीच मेरी उपस्थिति संयोग मात्र नहीं है. पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति सोलिह ने भारत को अपना पहला गंतव्य बनाया और अब मालदीव का स्नेहपूर्ण निमंत्रण मुझे मेरे इस कार्यकाल में पहली विदेश यात्रा पर मालदीव ले आया है.'
धन्यवाद के लिए शब्द नहीं
पीएम ने कहा कि मुझे मालदीव के सबसे बड़े सम्मान से नवाजा गया है. मेरे पास धन्यवाद देने के लिए शब्द नहीं हैं. अध्यक्ष महोदय, भारत और मालदीव के संबंध इतिहास से भी पुराने हैं. सागर की लहरें हम दोनों देशों की तटों को पखार रही हैं. ये लहरें हमारे लोगों के बीच मित्रता की संदेशवाहक रही हैं. हमारी सभ्यता और संस्कृति इन तरंगों की शक्ति लेकर फली-फूली हैं. हमारे रिश्तों को सागर की गहराई और विस्तार का आशीर्वाद मिला है.पीएम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि यहां दुनिया की 50 फीसदी जनसंख्या रहती है लेकिन इस क्षेत्र में बहुत से अनसुलझे विवाद हैं. यह क्षेत्र हमारी जीवन रेखा है और व्यापार का राजमार्ग भी है. यह हर मायने में हमारे साझा भविष्य की कुंजी है इसलिए मैंने जून 2018 में इंडो-पसिफिक रीजन में खुलेपन, एकीकरण एवं संतुलन कायम करने के लिए सबके साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया था. इससे देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा.