20 साल की सजा काट चुके वैसे अपराधी जिनका आचरण सरल है, उनकी रिहाई की जानी चाहिए: सीएम

रांची: सीएम रघुवर दास ने कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए. राज्य के आदिवासी सीधे सरल होते हैं. कई बार भावनाओं में आकर किए गए उनके अपराध के बाद खुद ही सरेंडर करने तथा बेहतरीन आचरण वाले मामलों में 20 साल की सजा काट चुके लोगों की रिहाई की जानी चाहिए. इन लोगों को फिर से नया जीवन शुरू करने का मौका मिलना चाहिए. इससे जेल में अच्छा व्यवहार कर रहे कैदियों को अच्छे आचरण का प्रोत्साहन मिलेगा.सीएम रघुवर दास ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बातें कही. 221 बंदियों को रिहाई सीएम ने कहा कि सजा पूरी कर या जमानत पर रिहा हो वैसे बंदियों/आरोपियों जिन पर अपराधी गतिविधियों में सक्रिय रहने के आरोप हैं, उनके आचरण पर प्रशासन अपनी नजर अवश्य रखे. आज की बैठक में 233 आजीवन कारावास की सजा प्राप्त बंदियों की मुक्ति के प्रस्ताव पर पर्षद द्वारा विचार किया गया. इनमें से 221 को मुक्त करने का निर्णय लिया गया. कैदियों ने औसतन 23 वर्ष की सजा पूरी कर ली है. शेष 12 मामलों को लंबित रखते हुए अगली बैठक में विस्तृत प्रतिवेदन के साथ फिर से लाने का निर्णय लिया गया. जेल से मुक्त किए गए कैदी 221 में से 104 कैदी अनुसूचित जनजाति के एवं तीन महिलाएं शामिल हैं. रांची से 100, हजारीबाग से 54, दुमका से 40, घाघीडीह, जमशेदपुर से 23, मेदिनीनगर, पलामू से 2, चास, बोकारो से एक एवं खुला जेल-सह-पुनर्वास कैम्प, हजारीबाग से एक बंदी को छोड़ा गया है. बैठक में प्रधान सचिव, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग, एस के जी रहाटे, डीजीपी डीके पांडेय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील बर्णवाल, एडीजी स्पेशल ब्रांच अनुराग गुप्ता, कारा महानिरीक्षक हर्ष मंगला, सचिव, विधि (न्याय विभाग)सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे.