मुंबई:बांबे हाईकोर्ट ने शरद पवार व समेत 70 के खिलाफ कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में FIR दर्ज करने के आदेश दिया

मुंबई: बांबे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाले में एनसीपी चीीफ शरद पवार, उनके भतीजे व एकस् डिप्टी सीएम अजित पवार और 70 अन्य के खिलाफ पांच दिन के भीतर एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया है.कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में पहली नजर में उनके खिलाफ विश्वसनीय सुबूत हैं. जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस एसके शिंदे की बेंच ने गुरुवार यह आदेश दिये.इनमें शरद पवार और अजित पवार के अलावा इस मामले में एनसीपी लीडर जयंत पाटिल,कई अन्य लीडर, गर्वमेंट ऑफिसर व राज्य के 34 जिलों के कोऑपरेटिव बैंक के कई सीनीयर अफसर शामिल हैं. सभी आरोपितों पर वर्ष 2007 से 2011 के बीच एमएससीबी को कथित रूप से 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा कराये गये ऑडिट और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव सोसायटीज (एमसीएस) एक्ट के तहत अर्धन्यायिक जांच आयोग द्वारा दाखिल आरोपपत्र में शरद पवार, अजित पवार और बैंक के कई निदेशकों समेत अन्य आरोपितों को दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि उनके फैसलों, कार्यो और लापरवाही की वजह से बैंक को यह नुकसान उठाना पड़ा. नाबार्ड की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि आरोपितों ने चीनी और कताई मिलों को कर्ज बांटने, कर्जे नहीं चुकाये जाने और लोन की वसूली में कई बैंकिंग कानूनों व रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया.उस दौरान अजित पवार बैंक के निदेशक थे.निरीक्षण रिपोर्ट के बावजूद इस मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की गई थी. लोकल आरटीआइ कार्यकर्ता सुरेंद्र अरोड़ा ने 2015 में आर्थिक अपराध शाखा में एक शिकायत दर्ज कराई थी और हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर एफआइआर दर्ज किए जाने की मांग की थी. हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पहली नजर में नाबार्ड की निरीक्षण रिपोर्ट, शिकायत और एमसीएस एक्ट के तहत दायर आरोपपत्र से साफ है कि आरोपितों के खिलाफ इस मामले में विश्वसनीय सबूत हैं.