पश्चिम बंगाल : ‘चोर-चोर’ के नारों के बीच घिरे अभिषेक बनर्जी, चले जूते-चप्पल, हेलमेट पहनकर बचानी पड़ी जान!
सोनारपुर दौरे पर तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ‘चोर-चोर’ के नारों, जूते-चप्पल और अंडों के बीच उनका काफिला घिर गया। हालात ऐसे बने कि उन्हें हेलमेट पहनकर आगे बढ़ना पड़ा।
- बंगाल में अभिषेक बनर्जी का जबरदस्त विरोध: फटी कमीज, टूटे बटन, हेलमेट पहनकर निकले TMC नेता
- ‘गो बैक’ के नारों के बीच जूते-चप्पल और अंडों से हमला
- सोनारपुर में बेकाबू भीड़ ने घेरा अभिषेक बनर्जी को
कोलकाता (Threesocieties.com Desk) : पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर दौरे के दौरान भारी जनविरोध का सामना करना पड़ा। चुनाव बाद हिंसा के पीड़ित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने पहुंचे अभिषेक के खिलाफ रास्ते भर ‘चोर-चोर’ और ‘गो बैक’ के नारे गूंजते रहे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि भीड़ के विरोध से बचने के लिए उन्हें हेलमेट पहनना पड़ा।
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प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सोनारपुर पहुंचने से पहले ही कामलगाजी इलाके से विरोध शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में महिलाओं ने काले झंडे दिखाकर नाराजगी जताई। जैसे-जैसे अभिषेक का काफिला आगे बढ़ा, विरोध और आक्रामक होता गया। प्रदर्शनकारियों ने जूते-चप्पल, अंडे और अन्य वस्तुएं फेंकनी शुरू कर दीं। भीड़ के धक्कामुक्की और विरोध के बीच अभिषेक की सफेद कमीज के बटन टूट गए और कपड़े तक फट गए। बताया जा रहा है कि इस अफरा-तफरी में उनका चश्मा और घड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गए। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें अपनी चारपहिया गाड़ी छोड़कर मोटरसाइकिल से आगे बढ़ना पड़ा।
राजनीतिक रूप से यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार अभिषेक बनर्जी चुनावोत्तर हिंसा से प्रभावित तृणमूल कार्यकर्ताओं के परिवारों तक पहुंच रहे थे। भारी विरोध के बावजूद वे अंततः हिंसा में मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता संजू कर्मकार के घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात की। इस दौरान अभिषेक बनर्जी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार” के नाम पर विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है और यदि वे प्रभावित परिवारों के बीच नहीं पहुंचते, तो उनका मनोबल और टूट जाता।इससे पहले उन्होंने कोलकाता के बेलेघाटा में चुनाव परिणाम आने वाली रात मारे गए तृणमूल कार्यकर्ता विश्वजीत पटनायक के परिवार से भी मुलाकात की और कानूनी सहायता का भरोसा दिया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच विपक्ष अब सवाल उठा रहा है कि चुनाव परिणाम आने के लगभग 26 दिन बाद तृणमूल नेतृत्व को प्रभावित परिवारों तक पहुंचने की याद क्यों आई। भाजपा इस दौरे को राजनीतिक मजबूरी बता रही है, जबकि तृणमूल इसे अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने की शुरुआत बता रही है।
बंगाल की सियासत में अभिषेक बनर्जी का यह दौरा अब केवल पीड़ित परिवारों से मुलाकात तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और बढ़ती ध्रुवीकरण की तस्वीर भी पेश कर रहा है।
वे चाहते हैं कि मुझे मार दें. जनता सब देख रही है,मार दो मुझे, मैं झुकूंगा नहीं : अभिषेक
अभिषेक बनर्जी ने मीडिया के सामने अपना दर्द और गुस्सा दोनों जाहिर किया. अभिषेक ने सीधे तौर पर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा- वे चाहते हैं कि मुझे मार दें. जनता सब देख रही है कि कैसे एक विपक्षी नेता को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने ललकारते हुए कहा कि वे इन हमलों से डरने वाले नहीं हैं और किसी के भी आगे अपना सिर नहीं झुकायेंगे. तृणमूल ने इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया है. पार्टी का कहना है कि पीड़ित परिवारों से मिलने जा रहे नेता पर हमला करना लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है.






