लोहगढ़ किले पर नहीं था चेतन? हुडी वाले शख्स की तलाश तेज, केतन मर्डर केस में 'गेट एनालिसिस' से खुलेगा राज

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़ आ गया है। चेतन चौधरी के वकील ने दावा किया है कि घटना के समय वह लोहगढ़ किले पर मौजूद नहीं था। पुलिस अब गेट एनालिसिस के जरिए हुडी पहने व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है। वहीं सिया गोयल के भाई को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजे जाने और "सिया प्वाइंट" की चर्चा ने मामले को और सुर्खियों में ला दिया है।

लोहगढ़ किले पर नहीं था चेतन? हुडी वाले शख्स की तलाश तेज, केतन मर्डर केस में 'गेट एनालिसिस' से खुलेगा राज

     HighLights:

  • चेतन चौधरी के वकील ने दावा किया कि घटना के समय वह लोहगढ़ किला पर मौजूद नहीं था।
  • पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपी का गेट (चाल-ढाल) एनालिसिस कराएगी।
  • मामले में दोबारा क्राइम सीन रीक्रिएशन की तैयारी।
  • साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया।
  • सोशल मीडिया पर घटना स्थल को लोग "सिया प्वाइंट" के नाम से पहचानने लगे हैं।

पुणे (Threesocieties.com Desk): चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच अब एक नए और बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। आरोपी चेतन चौधरी के वकील ने दावा किया है कि घटना वाले दिन लोहगढ़ किला पर हुडी पहनकर दिखाई देने वाला व्यक्ति और चेतन चौधरी एक ही शख्स नहीं हैं।

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बचाव पक्ष के इस दावे ने जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब पुलिस तकनीकी और फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किले के प्रवेश द्वार के पास कैमरे में कैद हुआ व्यक्ति कौन था और क्या वह वास्तव में चेतन चौधरी ही था।

गेट एनालिसिस से खुलेगा राज

पुलिस अब आरोपी चेतन चौधरी का "गेट एनालिसिस" कराने की तैयारी कर रही है। इस तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति के चलने के तरीके, शरीर की गतिविधियों और चाल-ढाल का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। जांच एजेंसियां आरोपी की चाल का मिलान घटना के दिन उपलब्ध वीडियो फुटेज में दिखाई देने वाले हुडी पहने व्यक्ति से करेंगी। यदि दोनों की चाल और शरीर की गतिविधियों में समानता मिलती है, तो यह जांच में बड़ा सबूत साबित हो सकता है।

दोबारा होगा क्राइम सीन रीक्रिएशन

पुलिस जल्द ही आरोपी चेतन चौधरी को लेकर दोबारा लोहगढ़ किले पहुंचेगी, जहां पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएशन किया जाएगा। इसके साथ ही घटना के दौरान पहने गए कपड़ों की बरामदगी का भी प्रयास किया जाएगा। जांच अधिकारियों का मानना है कि घटनास्थल पर दोबारा की जाने वाली जांच से कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं।

10 करोड़ के मानहानि नोटिस से गरमाया मामला

इस बीच मामले में कानूनी मोर्चे पर भी नया विवाद सामने आया है। सिया गोयल की ओर से अधिवक्ता के रूप में पेश हुए आशुतोष श्रीवास्तव ने दावा किया है कि उन्हें विधिवत वकालतनामा के माध्यम से नियुक्त किया गया था और संबंधित दस्तावेज अदालत में जमा हैं।वहीं, सिया गोयल के भाई साहिल गोयल द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहे जाने के बाद कि उन्हें परिवार ने अधिकृत नहीं किया है, विवाद और गहरा गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इन बयानों के कारण उन्हें ट्रोलिंग, धमकियों और प्रतिष्ठा को नुकसान का सामना करना पड़ा। इसी के चलते साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है, जिसमें सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग की गई है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

लोहगढ़ किला बना 'डार्क टूरिज्म' का केंद्र

घटना के बाद लोनावला स्थित ऐतिहासिक लोहगढ़ किला अब एक अलग वजह से चर्चा में है। जिस स्थान से कथित तौर पर केतन अग्रवाल को नीचे धकेला गया था, उसे सोशल मीडिया पर लोग अब "सिया प्वाइंट" के नाम से पुकारने लगे हैं।स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस सनसनीखेज मामले के बाद किले में आने वाले पर्यटकों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बड़ी संख्या में लोग उस स्थान को देखने पहुंच रहे हैं, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध से जुड़े स्थानों के प्रति लोगों का आकर्षण "डार्क टूरिज्म" की श्रेणी में आता है, जो दुनिया के कई देशों में पहले से देखा जाता रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि चेतन चौधरी वास्तव में लोहगढ़ किले पर मौजूद नहीं था, तो फिर सीसीटीवी और वीडियो फुटेज में दिखाई देने वाला हुडी पहने व्यक्ति कौन था? क्या हत्या की साजिश में कोई और भी शामिल था या बचाव पक्ष केवल कानूनी रणनीति के तहत यह दावा कर रहा है? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की फोरेंसिक जांच और गेट एनालिसिस रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएंगे।