Uttar Pradesh : गैंगस्टर एक्ट में चार वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद BSP एमपी Afzal Ansari की लोकसभा सदस्यता खत्म

गैंगस्टर एक्ट में चार वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से बीएसपी एमपी अफजाल अंसारी की लोकसभा सदस्यता खत्म हो गई है। लोकसभा सचिवालय की ओर से इसकी नोटिफिकेशन सोमवार को जारी कर दी गई है। अफजाल की लोकसभा सदस्यता सजा सुनाए जाने वाले दिन यानी 29 अप्रैल से ही रद मानी जायेगी।

Uttar Pradesh : गैंगस्टर एक्ट में चार वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद BSP एमपी Afzal Ansari की लोकसभा सदस्यता खत्म

नई दिल्ली। गैंगस्टर एक्ट में चार वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से बीएसपी एमपी अफजाल अंसारी की लोकसभा सदस्यता खत्म हो गई है। लोकसभा सचिवालय की ओर से इसकी नोटिफिकेशन सोमवार को जारी कर दी गई है। अफजाल की लोकसभा सदस्यता सजा सुनाए जाने वाले दिन यानी 29 अप्रैल से ही रद मानी जायेगी।

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एमपी-एमएलए कोर्ट 29 अप्रैल को सुनाई गई थी सजा
बाहुबली लीडर एमपी अफजाल अंसारी और उसके भाई एक्स एमएलए मुख्तार अंसारी को 29 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट में सजा सुनाई। इसमें मुख्तार को 10 वर्ष व अफजाल को चार वर्ष का कारावास हुआ है। कानून के मुताबिक, दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाये जनप्रतिनिधि की संबंधित सदन से सदस्यता समाप्त हो जाती है। 
अफजाल को पहली बार किसी मामले में हुई सजा
अफजाल अंसारी ने साल 1985 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़कर सफलता हासिल की थी। वह पांच बार एमएलए व दो बार एमपी चुने गये हैं। अब तक के 37 साल की राजनीति में वह बेदाग होने की बेबाक कहते रहे हैं। लेकिन एमपी-एमएलए कोर्ट से हुई सजा ने उनकी बेबाकी बोल पर विराम लगा दिया है। अब तक वह अंसारी परिवार के लिए वटवृक्ष की तरह है। गैंगस्टर के मामले में कोर्ट से चार साल की सजा सुनाने के बाद उनकी 37 साल की लंबी राजनीति पर विराम लगता दिख रहा है।
गाजीपुर जिला जेल में बंद है अफजल
सजा सुनाये जाने के बाद वह गाजीपुर जिला जेल की बैरक संख्या 10 में रहेगा। 2005 में माफिया मुख्तार अंसारी इसी बैरक में बंद था। वहां से मर्डर करा रहा था। उगाही करा रहा था। चुनाव जीत रहा था।

बीजेपी एमएलए कृष्णानंद राय मर्डर केस में लगाया गया था गैंगस्टर एक्ट
अंसारी भाइयों पर गैंगस्टर एक्ट का ये मामला 2007 में कृष्णानंद राय की मर्डर के दो साल बाद दर्ज किया गया था। केस में राय की मर्डर के बाद हुई आगजनी और कारोबारी नंद किशोर रुंगटा की किडनैपिंग को आधार बनाया गया था। कृष्णानंद राय की मर्डर मामले में कोर्ट अंसारी भाइयों को बरी कर चुका है, लेकिन गैंगस्टर एक्ट का यह मामला इसी से जुड़ा है। 23 सितंबर 2022 को दोनों भाई पर गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोप तय हुए थे। इस मामले में 15 अप्रैल को फैसला आना था। हालांकि जज के छुट्टी पर जाने से सुनवाई टल गई थी।गाजीपुर MP/MLA कोर्ट ने शनिवार को अंसारी ब्रदर्स को सजा सुलाई थी। पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर एक्ट में दोषी मानते हुए 10 वर्षों की सजा और पांच लाख का जुर्माना लगाया। जबकि उसके बड़े भाई और बीएसपी अफजाल अंसारी को चार वर्ष की सजा और एक लाख का जुर्माना लगाया।

कोर्ट में अफजाल अंसारी के खिलाफ सात पुलिसकर्मियों ने गवाही दी। वहीं डिफेंस में तीन लोगों ने गवाही दी। अफजाल पर गाजीपुर के भांवरकोल थाने में कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इसी केस के आधार पर अफजाल पर गैंगस्टर लगाया गया। अफजाल के वकील ने पुलिसकर्मियों की गवाही पर अपनी दलीलें दीं। उसने कहा कि अफजाल पर राजनीति दुश्मनी के चलते मुकदमे दर्ज कराये गये हैं।एक्स एमएलए बाहुबली मुख्तार अंसारी और बहनोई एजाजुल के साथ ही साल 2007 में अफजाल अंसारी के खिलाफ कृष्णानंद राय मर्डर का केस दर्ज हुआ था। जिसमें बरी होने के बावजूद उसी के आधार पर गैंगस्टर का मुकदमा कायम किया गया। दलील दी गई कि सिर्फ एक मुकदमे के आधार पर गैंगस्टर एक्ट का केस नहीं चलाया जा सकता। याचिका में गिरोह बंद कानून के तहत कार्यवाही को रद किये जाने की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
पिछले दिनों अफजाल अंसारी ने कहा था। हम पर मर्डर का जो केस लगा था उसमें कोर्ट बरी कर चुका है। ऐसे में गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे का कोई आधार नहीं बनता है। कोर्ट पर भरोसा है।" दरअसल, मर्डर से बरी होने की बात को आधार बनाते हुए अफजाल गैंगस्टर केस के खिलाफ हाईकोर्ट गया था। हालांकि वहां राहत नहीं मिली थी।
अफजाल ने मनोज सिन्हा को 119392 वोटों से हराया था
2019 में अफजाल अंसारी गाजीपुर से बीएसपी की सीट पर चुनावी मैदान में उतरा था। उसने बीजेपी कैंडिडेट मनोज सिन्हा को 119392 वोटों से हराया था। इससे पहले 2014 में अफजाल ने सपा की टिकट से चुनाव लड़ा था।