“बांग्लादेश में अब भी1.25 करोड़ हिंदू, एकजुट हों तो बदल सकती है तस्वीर”: मोहन भागवत

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश के हिंदुओं से एकजुट होने की अपील की। मुंबई में संघ के शताब्दी कार्यक्रम में उन्होंने समान नागरिक संहिता, जनसंख्या असंतुलन, आरक्षण और संघ की नीतियों पर भी विस्तार से अपने विचार रखे।

“बांग्लादेश में अब भी1.25 करोड़ हिंदू, एकजुट हों तो बदल सकती है तस्वीर”: मोहन भागवत
मुंबई में संघ के शताब्दी कार्यक्रम में भागवत।

मुंबई(Threesocieties.com Desk)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में आज भी लगभग 1.25 करोड़ हिंदू मौजूद हैं और यदि वे संगठित होकर खड़े हो जाएं तो अपनी सुरक्षा और अधिकारों के लिए राजनीतिक व्यवस्था का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं।

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मुंबई में संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला में बोलते हुए भागवत ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी बांग्लादेश के हिंदुओं ने देश छोड़कर जाने के बजाय वहीं रहकर संघर्ष करने का फैसला किया है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरएसएस अपनी मर्यादा में रहकर हर संभव मदद करेगा और दुनिया भर के हिंदू भी अपने-अपने स्तर पर सहयोग करेंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपने शताब्दी वर्ष में देश के चार महानगरों में अपने सर संघचालक मोहन भागवत की दो दिवसीय व्याख्यानमाला का आयोजन किया था। कोलकाता, बेंगलूरू और दिल्ली के बाद अंतिम व्याख्यानमाला मुंबई में शनिवार और रविवार को आयोजित की गई। शनिवार को मुंबई में नेहरू सेंटर में हुए दो सत्रों में मोहन भागवत ने संघ का परिचय एवं संघ की कार्ययोजना पर विस्तार से प्रकाश डाला था।

दो सत्रों में भागवत ने कार्यक्रम में आमंत्रित श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर दिया

रविवार को आयोजित दो सत्रों में भागवत ने कार्यक्रम में आमंत्रित श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर दिया। इसी क्रम में मोहन भागवत से देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के बारे में पूछा गया था। जिसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा विचार है। लेकिन इसे सभी को विश्वास में लेकर करना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार ने यूसीसी के मसौदे पर राज्य के लोगों की राय ली, और व्यापक जनसमर्थन जुटाकर इसे लागू किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूसीसी के क्रियान्वयन से समाज में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। कानून का ढांचा ऐसा होना चाहिए, जो लोगों को जोड़ने का काम करे, ना कि बांटने का।

इसी क्रम में जब मोहन भागवत से पूछा गया कि क्या कभी कोई अनुसूचित जाति या जनजाति का व्यक्ति भी संघ का सर संघचालक बन पाएगा। इसका उत्तर देते हुए संघ प्रमुख ने संघ में जाति व्यवस्था की अवधारणा को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि संघ का सर संघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता, कोई क्षत्रिय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का भी नहीं बन सकता, हां जो कोई भी बनेगा वह हिंदू ही होगा।

समान नागरिक संहिता पर क्या बोले

भागवत ने समान नागरिक संहिता (UCC) को देश की एकता के लिए अच्छा विचार बताया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि इसे सभी समुदायों की सहमति और विश्वास के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए जो समाज को जोड़ने का काम करे, न कि विभाजन पैदा करे। उत्तराखंड सरकार द्वारा व्यापक जनपरामर्श के बाद यूसीसी लागू करने के प्रयास का उन्होंने उदाहरण दिया।

संघ में जाति नहीं, योग्यता मायने

संघ में जाति आधारित किसी भी भेदभाव को नकारते हुए भागवत ने कहा कि सरसंघचालक का पद जाति से नहीं बल्कि योग्यता से तय होता है। एससी-एसटी वर्ग का व्यक्ति भी संघ का सर्वोच्च पद संभाल सकता है और ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। संघ में सेवानिवृत्ति की आयु को भी स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वैसे तो 75 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति को बिना कोई दायित्व लिए काम करना चाहिए।75 वर्ष का होने के बाद मैंने भी निवृत्त होने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन लोगों ने यह कहकर मुक्त नहीं किया कि अभी तो आप स्वस्थ हैं। घूम रहे हैं। फिर निवृत्त होने की जरूरत क्या है।

आरक्षण और जनसंख्या असंतुलन पर विचार

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज से जातीय भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने देश में बढ़ते जनसंख्या असंतुलन, अवैध घुसपैठ और जबरन मतांतरण को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की।

सावरकर और वैश्विक समझौतों पर बयान

वीर सावरकर को भारत रत्न देने के सवाल पर भागवत ने कहा कि यदि उन्हें यह सम्मान मिलता है तो उस सम्मान का ही गौरव बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था में किसी भी देश के लिए अकेले चलना संभव नहीं है, लेकिन समझौते ऐसे होने चाहिए जिनसे राष्ट्रीय हित सुरक्षित रहें।

भागवत ने 2047 को लेकर फैलाए जा रहे डर को भी खारिज करते हुए कहा कि देश को विभाजन की आशंकाओं से डरने के बजाय मजबूत और एकजुट भारत की दिशा में काम करना चाहिए। हमें 2047 का भय पालने के बजाय 2047 में अखंड भारत की कल्पना करनी चाहिए। ये मंसूबे पालनेवालों का सपना कभी पूरा नहीं होगा। अब भारत को तोड़नेवाले खुद टूट जाएंगे। संघ प्रमुख ने एक बार फिर दोहराया कि दुष्प्रचार या दूसरों के विचारों से संघ के प्रति कोई धारणा न बनाएं। संघ के बारे में जो भी धारणा बनाएं, अपने अनुभव के आधार पर बनाएं।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर को भारत रत्न देने के प्रश्न पर सरसंघचालक ने कहा कि सावरकर को भारत रत्न मिलता है, तो उस सम्मान का ही गौरव बढ़ेगा। वैसे वह बिना भारत रत्न सम्मान के ही लाखों हृदयों में बसे हुए हैं। भारत के दुनिया के कई देशों के साथ हो रहे व्यापारिक समझौतों पर भागवत ने कहा कि आज की दुनिया में कोई देश अकेले नहीं चल सकता। व्यापारिक समझौते सभी को करने पड़ते हैं। पिछले 10 वर्षों में हमने देखा है कि वर्तमान प्रशासन देश का हित देखकर ही समझौते कर रहा है। हमें ऐसी डील करनी चाहिए, जिसमें अपना नुकसान न हो।

उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्मों के बारे में संघ के स्वयंसेवक कानाफूसी करके एक-दूसरे को बताते हैं, जिसके कारण अधिक से अधिक लोग ऐसी फिल्में देखने के लिए प्रेरित होते हैं। कभी-कभी संघ की शाखाएं योजना बनाकर भी ऐसी फिल्में देखने जाती हैं।