झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर 2.5 लाख कैश के साथ पकड़े गये धनबाद जिले का थाना प्रभारी! 5 घंटे तक चली पूछताछ

झारखंड के धनबाद जिले में जीटी रोड पर तैनात थाना प्रभारी को बंगाल सीमा पर देबूडीह चेकपोस्ट पर ₹2.5 लाख नकद के साथ पकड़ा गया। चुनाव जांच के दौरान हुई इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया।

झारखंड-बंगाल बॉर्डर पर 2.5 लाख कैश के साथ पकड़े गये धनबाद जिले का थाना प्रभारी!  5 घंटे तक चली पूछताछ
एआई जनरेटेड इमेज ।

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर स्थित देबूडीह चेकपोस्ट पर एक थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) को ₹2.5 लाख नकद के साथ पकड़ा गया। यह कार्रवाई चुनावी सख्ती के दौरान की गई, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

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 चुनाव जांच के दौरान फंसे पुलिस इंस्पेक्टर

जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सीमा क्षेत्रों में सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। देबूडीह चेकपोस्ट पर बंगाल पुलिस और चुनाव आयोग की टीम हर आने-जाने वाले वाहन की कड़ी जांच कर रही थी। इसी दौरान जीटी रोड किनारे स्थित धनबाद के एक महत्वपूर्ण थाने के प्रभारी की प्राइवेट गाड़ी को रोका गया। तलाशी के दौरान वाहन से करीब ₹2.5 लाख कैशबरामद हुआ। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण इतनी बड़ी रकम बिना वैध दस्तावेज के ले जाना नियमों के खिलाफ माना गया, जिसके बाद तुरंत राशि जब्त कर ली गई।

पांच घंटे तक चली पूछताछ

सूत्रों के अनुसार,कैश बरामद होने के बाद संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को हिरासत में लेकर करीब 5 घंटे तक पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने इन सवालों पर जवाब मांगा:

पैसे का स्रोत क्या है?
रकम कहां ले जाई जा रही थी?
इसका उद्देश्य क्या था?

बताया जा रहा है कि पुलिस इंस्पेक्टर संतोषजनक जवाब या कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सके, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

चुनाव आयोग की सख्ती से बच नहीं पाए

पुलिस सूत्रों के बीच चर्चा है कि अगर मामला केवल स्थानीय स्तर पर होता, तो संभवतः इसे दबाने की कोशिश की जा सकती थी। लेकिन चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वाड टीम की मौजूदगी के कारण नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया पर वायरल होने की चर्चा

घटना से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। थ्री सोसाइटीज इल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

पुलिस की छवि पर असर, जांच की मांग तेज

बताया जा रहा है कि उक्त पुलिस इंस्पेक्टर की हाल ही में पदस्थापना कानून-व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से जीटी रोड के थाने में की गई थी। लेकिन इस घटना ने विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

आगे क्या?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि:

क्या इंस्पेक्टर पैसे का वैध स्रोत साबित कर पाएंगे?
क्या विभागीय कार्रवाई होगी?
चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाएगा?

यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।