UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की नजर: कल फैसला तय करेगा भविष्य, CJI सूर्यकांत की बेंच करेगी अहम सुनवाई
UGC के नए समानता नियम 2026 को लेकर देशभर में विरोध तेज, सवर्ण विरोधी होने के आरोप। सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत की बेंच कल करेगी अहम सुनवाई, फैसले से तय होगा नियमों का भविष्य।
- UGC के नए ‘समानता नियम 2026’ को लेकर देशभर में विरोध
- सवर्ण विरोधी होने के आरोप
नई दिल्ली(Threesocieties.com Desk)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए रेगुलेशन को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं। इन नियमों को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह सामान्य वर्ग (सवर्ण) के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं। छात्र संगठनों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर स्तर पर इसका विरोध हो रहा है, वहीं इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।
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उत्तर प्रदेश में एक अधिकारी द्वारा इन नियमों के विरोध में इस्तीफा दिए जाने के बाद यह मामला और गरमा गया। अब पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच चुका है, जहां गुरुवार को इस पर अहम सुनवाई होने जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई
UGC के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सुनवाई के लिए सहमति दी थी। अब CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से तात्कालिक हस्तक्षेप की मांग की गई। वकील ने दलील दी कि नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों के साथ भेदभाव की आशंका पैदा हो गई है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा,“हमें पता है कि क्या चल रहा है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी प्रकार की कमियां न रहें। हम इस मामले को सूचीबद्ध कर रहे हैं।”
क्या हैं UGC के नए नियम?
UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने) नियम, 2026 के तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता समितियों (Equity Committees) के गठन को अनिवार्य किया गया है। इन समितियों में शामिल होना अनिवार्य है—
अनुसूचित जाति (SC)
अनुसूचित जनजाति (ST)
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
दिव्यांग व्यक्ति
महिला सदस्य
ये नये नियम वर्ष 2012 में लागू किए गए पुराने UGC नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं।
याचिका में क्या है आपत्ति?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा केवल SC, ST और OBC वर्गों तक सीमित कर दी गई है। इससे सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के लोगों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि सामान्य वर्ग के किसी व्यक्ति को उसकी जाति पहचान के आधार पर उत्पीड़न या भेदभाव का सामना करना पड़े, तो उसके लिए कोई प्रभावी मंच उपलब्ध नहीं है।
संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन?
याचिका में यह भी कहा गया है कि ये नियम—
अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता)
अनुच्छेद 15(1) (धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक)
के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
देशभर में जारी विरोध
UGC के नए नियमों के खिलाफ कई राज्यों में छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इन नियमों को तत्काल वापस लिया जाए या इनमें सभी वर्गों के लिए समान संरक्षण का प्रावधान जोड़ा जाए। अब सबकी नजरें गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से यह तय हो सकता है कि UGC के नए रेगुलेशन का भविष्य क्या होगा।






