झारखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बड़ा प्लान: 3 संभागों में होगा पुनर्गठन, देवघर बनेगा नया पावर सेंटर
RSS ने झारखंड में संगठन विस्तार के लिए राज्य को तीन संभाग—रांची, हजारीबाग और देवघर—में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया है। देवघर संभाग में 8 जिले शामिल होंगे और इसे प्रमुख मुख्यालय बनाया जाएगा।
- झारखंड में RSS का नया खाका
- तीन संभागों में बांटने की तैयारी
देवघर (Threesocieties.com Desk): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर झारखंड में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी में है। संघ ने राज्य को तीन प्रमुख संभाग—रांची, हजारीबाग और देवघर—में बांटने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य संगठन की पकड़ को गांव-गांव और हर वर्ग तक मजबूत करना है।
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देवघर संभाग बनेगा सबसे अहम केंद्र
नए प्रस्ताव के मुताबिक, देवघर को सबसे अहम संभाग के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संभाग के तहत संताल परगना के छह जिलों के साथ-साथ धनबाद और गिरिडीह को भी जोड़ा जाएगा। सूत्रों के अनुसार:
देवघर संभाग में कुल 8 जिलों का नेटवर्क तैयार होगा
यहां 25 सदस्यों की कार्यकारिणी बनाई जाएगी
इसे एक “मिनी स्टेट” की तरह संचालित करने की रणनीति है
नए जिलों और संरचना का प्रस्ताव
संघ के प्रस्ताव में कई नए जिलों के गठन की भी बात सामने आई है:
देवघर और मधुपुर अलग जिले
दुमका और बासुकीनाथ अलग इकाई
साहिबगंज, पाकुड़ और राजमहल को जिला स्तर पर संरचित करने की योजना
गोड्डा, महगामा और जामताड़ा को भी अलग इकाइयों में मजबूत करने का प्रस्ताव
शहर से बस्ती तक संगठन विस्तार
संघ अब शहरों में भी माइक्रो-लेवल पर काम कर रहा है: देवघर नगर निगम के 36 वार्ड → 16 बस्तियों में विभाजन, मधुपुर के 23 वार्ड → 9 बस्तियों में विभाजित, हर बस्ती में “हिंदू सम्मेलन” आयोजित करने की योजना है। इस रणनीति का मकसद है कि संगठन सीधे मोहल्लों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।
शताब्दी वर्ष में बड़ा लक्ष्य: 1 लाख युवाओं को जोड़ना
RSS ने अपने शताब्दी वर्ष में युवाओं को जोड़ने के लिए बड़ा लक्ष्य रखा है।
जुलाई में देवघर में 1 लाख युवाओं का सम्मेलन प्रस्तावित
लगातार जन-गोष्ठियों और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन
प्रबुद्धजनों के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर
दुर्गापूजा के बाद हो सकती है बड़ी घोषणा
संघ सूत्रों की मानें तो इस पूरे परिसीमन (restructuring) की औपचारिक घोषणा दुर्गा पूजा के बाद की जा सकती है। पहले बिहार और झारखंड एक ही क्षेत्रीय ढांचे में थे, लेकिन अब झारखंड को अलग इकाई बनाकर संगठन विस्तार को नया रूप दिया जा रहा है।
क्या बदलेगा इससे?
संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत होगी
छोटे-छोटे क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की पहुंच बढ़ेगी
युवाओं और स्थानीय समाज को जोड़ने में तेजी आएगी
झारखंड में RSS का प्रभाव और व्यापक होगा
कुल मिलाकर, RSS का यह प्रस्ताव सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि झारखंड में सामाजिक और वैचारिक विस्तार की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।






