खरमास खत्म, फिर भी नहीं बजेगा बैंड-बाजा! 20 दिन बाद शुरू होंगे विवाह मुहूर्त

खरमास 16 जनवरी को खत्म होगा, लेकिन शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण विवाह मुहूर्त 4 फरवरी से शुरू होंगे। जानिए देरी की वजह और शुभ तिथियां।

खरमास खत्म, फिर भी नहीं बजेगा बैंड-बाजा! 20 दिन बाद शुरू होंगे विवाह मुहूर्त
 जानिए ग्रहों की असली चाल।
  • 16 जनवरी को समाप्त होगा खरमास
  • शुक्र ग्रह के अस्त होने से 4 फरवरी तक टल गए शुभ विवाह लग्न

रांची। इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ खरमास का समापन 16 जनवरी 2026 को हो जाएगा, लेकिन इसके बावजूद शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त तुरंत शुरू नहीं होंगे। वैवाहिक कार्यक्रमों की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को इस बार करीब 20 दिन अतिरिक्त इंतजार करना पड़ेगा।काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इसकी प्रमुख वजह शुक्र ग्रह का अस्त होना है, जिसे विवाह और दांपत्य जीवन का कारक ग्रह माना जाता है।

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 क्यों नहीं शुरू हो रहे विवाह मुहूर्त?

ज्योतिषियों का कहना है कि बीते वर्षों में खरमास समाप्त होते ही शुक्र ग्रह उदित हो जाता था, जिससे अगले ही दिन से शुभ विवाह लग्न प्रारंभ हो जाते थे।
लेकिन इस वर्ष शुक्र ग्रह 4 फरवरी 2026 को उदित होंगे, और उसी दिन से विवाह मुहूर्त की विधिवत शुरुआत होगी।

कब से कब तक रहेंगे शुभ विवाह लग्न?

शुक्रोदय: 4 फरवरी 2026

शुभ विवाह लग्न: 4 फरवरी से 15 मार्च 2026 तक

इस अवधि में कई शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी, जिससे वर-वधू पक्ष अपनी सुविधा अनुसार विवाह तिथि का चयन कर सकेंगे।

 शुक्र अस्त में विवाह क्यों वर्जित?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह के अस्त होने की स्थिति में विवाह, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते।ऐसे समय में किए गए विवाह से दांपत्य जीवन में बाधाएं, तनाव और असंतुलन की आशंका रहती है। यही कारण है कि आचार्य इस अवधि में विवाह आयोजन से बचने की सलाह देते हैं।

परिवारों के लिए क्या है संदेश?

जो परिवार जनवरी में विवाह की योजना बना रहे थे, उन्हें अब अपने कार्यक्रमों को पुनः निर्धारित करना होगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतराल परिवारों के लिए तैयारियों को और बेहतर करने का अवसर भी प्रदान करेगा।

 धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से खास वर्ष

इस वर्ष विवाह मुहूर्तों में लंबा अंतराल देखने को मिल रहा है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस दौरान लोग धार्मिक अनुष्ठान, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे अन्य संस्कारों की योजना बना सकते हैं।