मकर संक्रांति 15 जनवरी को, पुण्य स्नान-दान का महायोग; जानें शुभ योग और दान का महत्व

मकर संक्रांति 2026 कब है? हृषिकेश पंचांग के अनुसार 15 जनवरी को मनेगी मकर संक्रांति। जानिए पुण्य स्नान-दान का समय, तिल-खिचड़ी का महत्व और विशेष योग।

मकर संक्रांति 15 जनवरी को, पुण्य स्नान-दान का महायोग; जानें शुभ योग और दान का महत्व
स्नान दान 15 जनवरी को होगा।
  •  खिचड़ी और कंबल दान से मिलेगा अक्षय फल

रांची। हृषिकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पावन पर्व 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के मुताबिक 14 जनवरी की रात 9:38 बजे सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी कारण संक्रांति का पुण्य काल और स्नान-दान 15 जनवरी को मान्य होगा।

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मकर संक्रांति भारतीय सनातन संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के उत्तरायण होने और प्रकृति में परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।

15 जनवरी को ही पुण्य स्नान-दान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 15 जनवरी की सुबह सूर्योदय से दोपहर 1:39 बजे तक स्नान-दान का विशेष पुण्य काल रहेगा। इस अवधि में गंगा, यमुना, सरयू सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर तिल, कंबल, घृत, दही, चूड़ा और अन्न का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।बनारस सहित कई प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी।

खिचड़ी और तिल द्वादशी का विशेष संयोग

ज्योतिष के अनुसार इस बार मकर संक्रांति गुरुवार को पड़ रही है। सामान्यतः गुरुवार को खिचड़ी खाने की मनाही मानी जाती है, लेकिन मकर संक्रांति पर खिचड़ी का सेवन और दान अत्यंत पुण्य फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि इसी दिन तिल द्वादशी का भी संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ मास की कृष्ण द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी। इस कारण इस दिन तिल का दान और सेवन विशेष फलदायी माना गया है।

प्रकृति परिवर्तन का पर्व है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक पर्व है। इसके साथ ही दिन बड़े होने लगते हैं, प्रकाश की अवधि बढ़ती है और शीत ऋतु का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। भारतीय संस्कृति में इसे प्रकृति की उपासना के रूप में मनाया जाता है।

माघ मास में संक्रांति का विशेष महत्व

इस वर्ष मकर संक्रांति माघ मास में पड़ रही है, जिसे स्नान और दान का अत्यंत पुण्यकारी मास माना गया है। साथ ही इस दिन वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे पर्व का पुण्य कई गुना बढ़ जाएगा।

14 जनवरी को भी मनाने को लेकर मतभेद

कुछ पंचांगों में मकर संक्रांति 14 जनवरी को भी बतायी गयी है। द्रिक पंचांग के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को अपराह्न 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार संक्रांति काल से 6 घंटे 24 मिनट पूर्व और बाद तक पुण्य काल रहता है। इस आधार पर 14 जनवरी को भी खिचड़ी और स्नान का महत्व बताया गया है।